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शुगर-थायरॉयड से बढ़ रहा नसों की बीमारी का खतरा, इन लक्षणों को न करे इग्नोर

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 30 Aug, 2026 08:51 AM
शुगर-थायरॉयड से बढ़ रहा नसों की बीमारी का खतरा, इन लक्षणों को न करे इग्नोर

नारी डेस्क:  दिनभर की भागदौड़ के बाद तलवों में जलन हो तो अक्सर लोग इसे थकान समझकर टाल देते हैं। पैरों में झनझनाहट हो तो कमजोरी मान लेते हैं और कभी करंट जैसा झटका महसूस होने पर भी इसे सामान्य परेशानी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन लगातार बने रहने वाले ये लक्षण पैरों की नसों से जुड़ी गंभीर समस्या का संकेत हो सकते हैं। टखने के भीतर नस पर दबाव पड़ने से होने वाली टार्सल टनल सिंड्रोम ऐसी ही बीमारी है, जिसकी शुरुआती पहचान न होने पर परेशानी धीरे-धीरे बढ़ सकती है। खास बात यह है कि मधुमेह और हाइपोथायरॉयड से पीड़ित लोगों में इसका खतरा अधिक देखा गया है।

जीएसवीएम की स्टडी में सामने आई तस्वीर

जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के न्यूरो विभाग में की गई स्टडी में सामने आया कि बड़ी संख्या में मरीजों ने बीमारी के शुरुआती लक्षणों को सामान्य थकान या कमजोरी समझ लिया। इस वजह से उन्होंने समय रहते चिकित्सकीय सलाह नहीं ली और इलाज में देरी होती रही। न्यूरो विभाग में एक साल के दौरान 30 से 65 वर्ष की उम्र के 122 मरीजों की पड़ताल की गई। इनमें करीब 70 फीसदी मरीज ऐसे थे, जिन्होंने तलवों में जलन, झनझनाहट और करंट जैसे अहसास को लंबे समय तक सामान्य परेशानी मानकर नजरअंदाज किया। जब लक्षण बढ़े और रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगे, तब उन्होंने डॉक्टर से संपर्क किया।

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40 फीसदी मरीज डायबिटीज से पीड़ित

स्टडी में टार्सल टनल सिंड्रोम और दूसरी बीमारियों के बीच भी संबंध सामने आया। 122 मरीजों में करीब 40 फीसदी पहले से मधुमेह से पीड़ित थे। वहीं लगभग 30 फीसदी मरीजों में हाइपोथायरॉयड की समस्या मिली। विशेषज्ञों के मुताबिक, डायबिटीज और थायरॉयड जैसी स्थितियां नसों को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में पैरों में होने वाले असामान्य अहसास को केवल थकान मानकर छोड़ना परेशानी को बढ़ा सकता है।

टखने के अंदर दबती है टिबियल नस

न्यूरो विभाग के डॉ. मनीष सिंह के अनुसार, टार्सल टनल सिंड्रोम में असली समस्या टखने के भीतर होती है। टखने के अंदर एक संकरी सुरंग होती है, जिसमें से टिबियल नस गुजरती है। किसी कारण से इस नस पर लगातार दबाव पड़ने लगे तो तलवों और पैरों में अलग-अलग तरह के असामान्य अहसास होने लगते हैं। शुरुआत में तलवों में हल्की जलन, झनझनाहट या करंट जैसा महसूस हो सकता है। इसके बाद चुभन और सुन्नपन की शिकायत भी होने लगती है। समय पर बीमारी की पहचान और उपचार न होने पर नस पर दबाव बढ़ सकता है और पैरों की ताकत भी प्रभावित हो सकती है।

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इन लक्षणों को समझें संकेत

टार्सल टनल सिंड्रोम के शुरुआती लक्षणों को पहचानना जरूरी है। तलवों में बार-बार करंट दौड़ने जैसा अहसास, लगातार जलन, सुई चुभने जैसी चुभन या सुन्नपन इसकी ओर इशारा कर सकते हैं। बीमारी बढ़ने पर पैरों में कमजोरी महसूस हो सकती है। ऐसे लक्षण लगातार बने रहें, खासकर यदि मरीज पहले से डायबिटीज या हाइपोथायरॉयड से पीड़ित है, तो इसे सामान्य थकान समझकर छोड़ने के बजाय चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए।

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दो मरीजों से समझें बीमारी की गंभीरता

42 वर्षीय एक नौकरीपेशा व्यक्ति को कई महीनों से तलवों में जलन और बिजली के हल्के झटके जैसा अहसास हो रहा था। शुरुआत में उन्होंने इसे सामान्य थकान समझा और ध्यान नहीं दिया। परेशानी बनी रहने पर जांच कराई गई तो टार्सल टनल सिंड्रोम की पुष्टि हुई। इसी तरह 55 वर्षीय मधुमेह पीड़ित महिला को भी तलवों में इसी तरह की परेशानी थी। जांच के बाद उनमें भी टार्सल टनल सिंड्रोम पाया गया। इन मामलों से यह साफ होता है कि पैरों में बार-बार होने वाली जलन, झनझनाहट या करंट जैसे अहसास को नजरअंदाज करना ठीक नहीं है।

अहम आंकड़े

30 से 65 वर्ष की उम्र के मरीज स्टडी में शामिल किए गए। 122 मरीज एक साल में न्यूरो विभाग में इलाज के लिए पहुंचे। करीब 70 फीसदी मरीज शुरुआती लक्षणों को थकान या कमजोरी समझते रहे। करीब 40 फीसदी मरीज पहले से डायबिटीज से पीड़ित थे। करीब 30 फीसदी मरीजों में हाइपोथायरॉयड की समस्या पाई गई। पैरों में लगातार जलन, झनझनाहट, चुभन, सुन्नपन या करंट जैसा अहसास हो रहा हो तो इसे केवल थकान मानकर टालना नुकसानदेह हो सकता है। खासकर डायबिटीज और हाइपोथायरॉयड के मरीजों को ऐसे लक्षण दिखाई देने पर समय रहते विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।  

 
 

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