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बच्चों के लंच की प्लानिंग में 432 घंटे! जानें क्यों पेरेंट्स के लिए बना ये बड़ा टास्क

  • Edited By Monika,
  • Updated: 31 Aug, 2026 01:52 PM
बच्चों के लंच की प्लानिंग में 432 घंटे! जानें क्यों पेरेंट्स के लिए बना ये बड़ा टास्क

नारी डेस्क : बच्चों को हेल्दी खाना खिलाना और उनके लिए रोज नया टिफिन तैयार करना माता-पिता की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा है। हालांकि, इसमें कितना समय खर्च होता है, इसका अंदाजा एक नए सर्वे से लगाया जा सकता है। अमेरिकी कंपनी टॉकर रिसर्च की ओर से किए गए इस सर्वे में 5 से 17 साल की उम्र के स्कूली बच्चों के 20 हजार अभिभावकों से सवाल पूछे गए। रिपोर्ट के मुताबिक, माता-पिता हर हफ्ते औसतन 12 घंटे बच्चों और परिवार के भोजन से जुड़े कामों में लगा देते हैं। इसमें भोजन की योजना बनाने, राशन खरीदने, खाना पकाने और स्कूल लंच पैक करने जैसे काम शामिल हैं।

हर साल 432 घंटे खाने की प्लानिंग में

सर्वे में सामने आया कि स्कूल के पूरे सत्र के दौरान माता-पिता करीब 432 घंटे सिर्फ इस बात की योजना बनाने में खर्च करते हैं कि उनके बच्चों को क्या खिलाया जाए। इसमें बच्चों की पसंद के साथ-साथ भोजन पौष्टिक और संतुलित हो, इसका भी ध्यान रखा जाता है। रिपोर्ट के अनुसार, हर सप्ताह करीब तीन घंटे भोजन की प्लानिंग, तीन घंटे राशन खरीदने, चार घंटे स्कूल के दिनों में खाना पकाने और दो घंटे स्कूल लंच पैक करने में खर्च होते हैं।

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71 फीसदी बच्चों को खाने में नखरे

बच्चों की खाने की आदतें माता-पिता के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आई हैं। सर्वे में 71 फीसदी अभिभावकों ने माना कि उनके बच्चे खाने को लेकर नखरे करते हैं। वहीं, 56 फीसदी माता-पिता को बच्चों की पसंद के मुताबिक भोजन में बदलाव करना पड़ता है। कई बार माता-पिता को मसाले कम करने, सब्जियां हटाने या बच्चों की पसंद की कोई दूसरी चीज अलग से तैयार करने की जरूरत पड़ती है। वहीं, 58 फीसदी अभिभावकों ने माना कि ऐसा भोजन तैयार करना मुश्किल है, जिसे परिवार का हर सदस्य पसंद करे।

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रोज नया और पसंदीदा लंच बनाना भी चुनौती

स्कूल लंच को लेकर माता-पिता के सामने कई तरह की चुनौतियां हैं। सर्वे में 34 फीसदी अभिभावकों ने कहा कि बच्चों की पसंद का खाना खोजना मुश्किल होता है। वहीं 31 फीसदी ने रोजाना लंच को नया और दिलचस्प बनाए रखना चुनौतीपूर्ण बताया। ऐसे में कई माता-पिता ऐसे विकल्प तलाशते हैं जिन्हें बच्चे आसानी से खा लें और जिन्हें तैयार करने में ज्यादा समय भी न लगे।

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सैंडविच बना माता-पिता का पसंदीदा विकल्प

सर्वे में सैंडविच को माता-पिता के लिए सबसे सुविधाजनक विकल्पों में से एक बताया गया। करीब 80 फीसदी अभिभावकों ने कहा कि उनके बच्चे सैंडविच को बिना ज्यादा नखरे के खा लेते हैं। टॉपिंग की बात करें तो करीब 60 फीसदी लोगों ने चीज और 45 फीसदी ने सलाद पत्ते को लोकप्रिय विकल्प बताया। हालांकि, भारत में बच्चों के टिफिन में सैंडविच के अलावा पराठा, पूरी-सब्जी, पास्ता, पोहा और इडली जैसे विकल्प भी काफी आम हैं।

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भारत में खाना बनाने में ज्यादा समय

भारत में घर का खाना बनाने की परंपरा मजबूत होने के कारण भोजन तैयार करने में लगने वाला समय भी काफी अधिक है। टाइम यूज सर्वे के अनुसार, भारतीय लोग औसतन 13.2 घंटे प्रति सप्ताह खाना पकाने में बिताते हैं। यह 22 बड़े देशों के बीच सबसे अधिक और वैश्विक औसत 6.5 घंटे प्रति सप्ताह से करीब दोगुना है। ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में भारतीय महिलाएं रोजाना औसतन तीन से पांच घंटे रसोई और उससे जुड़े कामों में खर्च करती हैं। सर्वे में यह भी सामने आया कि बच्चों के लिए खाना तैयार करते समय माता-पिता अब पोषण को लेकर ज्यादा जागरूक हो रहे हैं। वे सिर्फ बच्चे की पसंद ही नहीं, बल्कि भोजन में जरूरी पोषक तत्वों को शामिल करने पर भी ध्यान दे रहे हैं। हालांकि, बच्चों की पसंद, खाने के नखरे और रोजाना कुछ नया बनाने की जरूरत के बीच संतुलन बनाना माता-पिता के लिए लगातार चुनौती बना हुआ है।

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