नारी डेस्क: जीभ पर छोटा सा छाला या घाव हो जाए तो अक्सर लोग इसे सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। कई बार इसकी वजह दांत से लगी चोट या किसी अन्य मामूली कारण को मान लिया जाता है। लेकिन अगर ऐसा घाव लंबे समय तक ठीक न हो, तो इसे हल्के में लेना भारी पड़ सकता है। पटना में सामने आया 55 वर्षीय महिला का एक मामला इसी ओर इशारा करता है। महिला की जीभ पर एक नुकीले दांत से बार-बार चोट लगने के कारण छाला बना था। उन्हें लगा कि चोट ठीक होने के साथ यह भी अपने आप ठीक हो जाएगा। लेकिन जब एक महीने से ज्यादा समय गुजरने के बाद भी घाव ठीक नहीं हुआ, तो वह जांच के लिए पटना के जय प्रभा मेदांता सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल पहुंचीं। जांच के बाद पता चला कि जिसे वह सामान्य छाला समझ रही थीं, वह दरअसल जीभ का कैंसर था।
जीभ के करीब दो-तिहाई हिस्से तक फैल चुका था कैंसर
अस्पताल में जांच के दौरान सामने आया कि बीमारी जीभ के आगे के करीब दो-तिहाई हिस्से तक फैल चुकी थी। इसके अलावा महिला के गले में भी कुछ गांठें मौजूद थीं। डॉक्टरों ने अलग-अलग जांच के जरिए स्थिति को समझने की कोशिश की। जांच से यह स्पष्ट हुआ कि बीमारी मुख्य रूप से जीभ में थी, लेकिन गले में मौजूद गांठों को देखते हुए वहां भी कैंसर के फैलने की आशंका थी। ऐसी स्थिति में सिर्फ दवाओं के सहारे इलाज करना पर्याप्त नहीं था। डॉक्टरों ने सर्जरी को उपचार का पहला विकल्प माना, क्योंकि कैंसर प्रभावित हिस्से को निकालना जरूरी था।

तंबाकू का सेवन नहीं करती थीं महिला
इस मामले की एक खास बात यह भी थी कि महिला तंबाकू का सेवन नहीं करती थीं। जय प्रभा मेदांता सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के ऑन्कोलॉजी सर्जरी विभाग के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. संदीप कुमार के मुताबिक, महिला की जीभ के पास मौजूद एक दांत काफी नुकीला था और वह लगातार जीभ से रगड़ खा रहा था। इसी वजह से जीभ पर चोट लगी और छाला बन गया। शुरुआत में महिला ने इसे सामान्य चोट माना, लेकिन एक महीने से अधिक समय तक ठीक न होने के बाद उन्होंने डॉक्टर से संपर्क किया। जांच में कैंसर की पुष्टि होने के बाद इलाज की दिशा पूरी तरह बदल गई।
सर्जरी से हटाया गया कैंसर प्रभावित हिस्सा
सर्जरी से पहले डॉक्टरों ने महिला और उनके परिवार को बीमारी की गंभीरता और ऑपरेशन से जुड़ी संभावित परेशानियों के बारे में विस्तार से बताया। उन्हें यह भी समझाया गया कि जीभ का बड़ा हिस्सा हटाने के बाद कुछ समय तक बोलने और खाना खाने में दिक्कत हो सकती है। इसके बाद डॉक्टरों की टीम ने ऑपरेशन किया। सर्जरी के दौरान जीभ के कैंसर प्रभावित हिस्से को पर्याप्त मार्जिन के साथ निकाल दिया गया। गले में मौजूद गांठों को भी हटाया गया, ताकि बीमारी के प्रभावित हिस्से को अधिकतम संभव सीमा तक निकाला जा सके।
एक ही ऑपरेशन में जीभ का किया गया रिकंस्ट्रक्शन
जीभ का बड़ा हिस्सा निकालने के बाद मरीज के लिए सबसे बड़ी चुनौती उसकी संरचना और काम करने की क्षमता को दोबारा तैयार करना था। इसी सर्जरी के दौरान प्लास्टिक सर्जरी टीम ने जीभ का रिकंस्ट्रक्शन किया। इसके लिए महिला की कलाई से त्वचा और मांसपेशी का एक हिस्सा लिया गया। इस टिशू का इस्तेमाल जीभ के हटाए गए हिस्से को दोबारा बनाने में किया गया। इस तरह कैंसर प्रभावित हिस्से को निकालने के साथ उसी ऑपरेशन में जीभ का पुनर्निर्माण भी कर दिया गया।
करीब एक महीने में बोलने और खाने लगीं
सर्जरी के बाद महिला की रिकवरी अच्छी रही। करीब एक सप्ताह बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। इसके बाद धीरे-धीरे उनकी बोलने और खाने की क्षमता में सुधार हुआ। डॉक्टरों के मुताबिक, सर्जरी के लगभग एक महीने बाद महिला सामान्य तरीके से बातचीत करने और खाना-पीना करने लगी थीं। यह रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी उनके सामान्य जीवन में लौटने के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण रही।
सर्जरी के बाद भी पूरा करना पड़ा कैंसर का इलाज
ऑपरेशन के दौरान निकाले गए टिशू की बायोप्सी कराई गई। बायोप्सी रिपोर्ट के आधार पर आगे के उपचार की जरूरत तय की गई। रिपोर्ट के अनुसार, महिला को सर्जरी के बाद कीमोथेरेपी और रेडिएशन की आवश्यकता थी। इसके बाद उन्होंने डॉक्टरों की सलाह के अनुसार आगे का इलाज कराया। उनका रेडिएशन करीब डेढ़ महीने तक चला। कैंसर के इलाज में सर्जरी के बाद आगे का उपचार किस तरह होगा, यह बायोप्सी और बीमारी की स्थिति के आधार पर तय किया जाता है।
करीब दो साल से ट्यूमर से मुक्त हैं महिला
इलाज पूरा होने के बाद महिला लगातार डॉक्टरों के संपर्क में रहीं। नियमित फॉलोअप के दौरान उनकी स्थिति पर नजर रखी जाती रही। डॉक्टर के अनुसार, महिला पिछले करीब दो वर्षों से ट्यूमर से मुक्त हैं और फिलहाल सामान्य जीवन जी रही हैं। वह नियमित रूप से अस्पताल जाकर जांच कराती हैं और करीब हर तीन महीने में फॉलोअप कराया जाता है। समय पर इलाज और नियमित निगरानी की वजह से उनकी स्थिति फिलहाल ठीक बताई जा रही है।

जीभ के छाले को लंबे समय तक नजरअंदाज न करें
डॉक्टरों का कहना है कि हर छाला कैंसर नहीं होता, लेकिन जीभ पर होने वाले ऐसे घाव जो लंबे समय तक ठीक नहीं होते, उनकी जांच जरूर करानी चाहिए। खासतौर पर अगर छाला दो से तीन सप्ताह में ठीक नहीं हो रहा है, बार-बार खून निकल रहा है, लगातार दर्द है या उसके आकार और रूप में बदलाव दिखाई दे रहा है, तो विशेषज्ञ से संपर्क करना जरूरी है। कई बार लगातार होने वाली रगड़, दांत की समस्या या अन्य कारणों से भी जीभ पर घाव हो सकता है। इसलिए घाव का कारण खुद तय करने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना ज्यादा सुरक्षित है।
कैंसर का इलाज सर्जरी के बाद भी जारी रह सकता है
कैंसर की पहचान होने के बाद केवल सर्जरी करा लेना ही हमेशा पर्याप्त नहीं होता। ऑपरेशन के दौरान निकाले गए टिशू की बायोप्सी रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टर यह तय करते हैं कि मरीज को आगे रेडिएशन, कीमोथेरेपी या किसी अन्य उपचार की जरूरत है या नहीं। इसलिए मरीज के लिए डॉक्टर द्वारा सुझाया गया पूरा उपचार कराना और बीच में इलाज न छोड़ना बेहद जरूरी है। इसके साथ नियमित फॉलोअप भी उपचार का अहम हिस्सा है।
समय पर जांच से बदल सकती है इलाज की तस्वीर
इस मामले से सबसे बड़ी सीख यही मिलती है कि शरीर में होने वाले ऐसे बदलावों को लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, जो सामान्य समय में ठीक नहीं हो रहे हैं। जीभ पर लगातार बना रहने वाला छाला भी ऐसी ही समस्या हो सकती है। हालांकि हर लंबे समय तक रहने वाला छाला कैंसर का संकेत नहीं होता, लेकिन समय पर जांच कराने से कारण स्पष्ट हो जाता है। अगर किसी गंभीर बीमारी की पुष्टि होती है, तो शुरुआती स्तर पर सही इलाज मिलने से उपचार के विकल्प भी बेहतर हो सकते हैं।