11 AUGTUESDAY2026 5:45:26 PM
Nari

‘हूं मैं अंधभक्त, ’, PM को गाली देने वालों पर भड़कीं ईशा, बोलीं- अनफॉलो करने से नहीं पड़ता फर्क

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 11 Aug, 2026 01:18 PM
‘हूं मैं अंधभक्त, ’, PM को गाली देने वालों पर भड़कीं ईशा, बोलीं- अनफॉलो करने से नहीं पड़ता फर्क

नारी डेस्क:   बॉलीवुड एक्ट्रेस ईशा कोप्पिकर एक बार फिर अपने बेबाक बयान को लेकर चर्चा में हैं। अभिनेत्री ने उन सोशल मीडिया यूजर्स को जवाब दिया है, जिन्होंने छात्रों के विरोध प्रदर्शन को लेकर उनकी राय पर आपत्ति जताई और उन्हें ट्रोल किया। ईशा ने साफ कहा कि सोशल मीडिया पर कुछ लोगों का उन्हें अनफॉलो करना उनके लिए कोई मायने नहीं रखता। उन्होंने यह भी कहा कि अगर देश के प्रति अपनी सोच रखने की वजह से उन्हें ‘अंधभक्त’ कहा जाता है, तो उन्हें इससे कोई परेशानी नहीं है।

‘हां, मैं अंधभक्त हूं... अपने देश के लिए’

ईशा कोप्पिकर ने एक इंटरव्यू में सोशल मीडिया पर हुई ट्रोलिंग और अनफॉलो किए जाने को लेकर खुलकर बात की। अभिनेत्री के मुताबिक, कई लोगों ने उन्हें इंस्टाग्राम पर अनफॉलो कर दिया और कुछ ने उन्हें ‘अंधभक्त’ भी कहा। हालांकि, ईशा का कहना है कि वह इन बातों से प्रभावित नहीं होतीं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग उन्हें अनफॉलो करेंगे, लेकिन इसके बावजूद बहुत से लोग ऐसे भी हैं जो उन्हें फॉलो करते हैं। ईशा ने अपने लिए ‘अंधभक्त’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए कहा कि अगर वह अपने देश के लिए ऐसी हैं, तो उन्हें इस बात पर गर्व है।

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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अपनी बात रखने से पीछे नहीं हटेंगी ईशा

ईशा से जब पूछा गया कि क्या सोशल मीडिया पर हुई आलोचना के बाद वह अपने पुराने बयान से पीछे हटेंगी, तो अभिनेत्री ने ऐसा करने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि किसी को जानबूझकर दुख पहुंचाना उनकी फितरत नहीं है, लेकिन अपनी राय रखना उनका अधिकार है। अभिनेत्री ने कहा कि उनकी सोच काफी स्पष्ट और मजबूत है। अगर किसी मुद्दे पर उनका कोई विचार है, तो वह सिर्फ इसलिए उसे बदलने के पक्ष में नहीं हैं कि किसी को उनकी बात पसंद नहीं आई या उनकी वजह से कोई उन्हें सोशल मीडिया पर अनफॉलो कर दे।

‘फैंस के लिए अपनी सोच क्यों बदलूं?’

ईशा ने उन सेलिब्रिटीज पर भी टिप्पणी की, जो सोशल मीडिया पर अपने फॉलोअर्स की संख्या को ध्यान में रखते हुए अपनी राय रखने से बचते हैं। उनका कहना है कि एक सेलिब्रिटी के पास लोगों को प्रभावित करने की ताकत होती है और इस वजह से अपनी बात कहते समय जिम्मेदारी भी समझनी चाहिए। अभिनेत्री ने सवाल उठाया कि अगर उन्हें किसी बात पर विश्वास है, तो वह सिर्फ अपनी फिल्मों के लिए फैंस बनाए रखने या सोशल मीडिया पर फॉलोअर्स न खोने के डर से अपनी सोच के विपरीत बात क्यों करेंगी। उन्होंने कहा कि वह ऐसा नहीं कर सकतीं और अपनी बात रखने से पीछे नहीं हटेंगी।

‘मैं उनका भी सम्मान करती हूं जो ऐसा करते हैं’

ईशा ने यह भी स्पष्ट किया कि वह अपनी राय को लेकर भले ही मुखर हैं, लेकिन दूसरों की सोच का भी सम्मान करती हैं। उनका कहना है कि हर व्यक्ति का अपना नजरिया होता है और हर कोई अपने तरीके से फैसले लेता है। उन्होंने उन लोगों के प्रति भी सम्मान जताया, जो सोशल मीडिया के दबाव में अपनी राय सार्वजनिक नहीं करना चाहते। हालांकि, ईशा ने कहा कि वह खुद इस तरह चुप रहकर अपनी सोच बदलने वालों में से नहीं हैं।

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छात्रों के प्रदर्शन पर ईशा ने उठाए थे सवाल

दरअसल, मामला उस समय शुरू हुआ जब जुलाई में जंतर-मंतर पर छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान ईशा कोप्पिकर ने सोशल मीडिया पर कई पोस्ट शेयर किए थे। प्रदर्शन और उसमें इस्तेमाल की गई भाषा को लेकर अभिनेत्री ने सवाल उठाए थे। ईशा ने छात्रों के सरकार से सवाल पूछने और अपनी समस्याओं को सामने रखने के अधिकार का समर्थन किया था। हालांकि, उन्होंने व्यक्तिगत टिप्पणियों, गाली-गलौज और अपशब्दों के इस्तेमाल की आलोचना की थी। इसी के बाद सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ काफी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली थीं।

‘देश से प्यार करने पर कोई लेबल लगाता है तो लगने दो’

ट्रोलिंग के बाद ईशा ने सोशल मीडिया स्टोरी के जरिए भी अपनी बात रखी थी। अभिनेत्री ने कहा था कि अगर देश से प्यार करने की वजह से उन पर कोई लेबल लगाया जाता है, तो उन्हें इसकी चिंता नहीं है। उन्होंने खुद को भारत भक्त बताते हुए कहा था कि उन्हें इस पहचान पर शर्मिंदा होने के बजाय गर्व करना पसंद होगा। ईशा का कहना था कि देश के प्रति अपनी भावना को लेकर वह किसी तरह की सफाई देने के दबाव में नहीं हैं।

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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‘तानाशाही’ शब्द के इस्तेमाल पर भी जताई थी आपत्ति

ईशा कोप्पिकर ने लोकतंत्र और राजनीतिक बहस को लेकर भी अपनी राय रखी थी। उन्होंने सोशल मीडिया पर होने वाली राजनीतिक चर्चाओं में ‘तानाशाही’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल को लेकर आपत्ति जताई थी। अभिनेत्री के मुताबिक, लोकतंत्र का मतलब केवल बोलने की आजादी नहीं है, बल्कि इसके साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है। उन्होंने कहा था कि किसी व्यवस्था को तानाशाही कहने से पहले इस शब्द के वास्तविक अर्थ और उसके गंभीर परिणामों को समझना चाहिए। ईशा ने यह भी कहा था कि ऐसी बहसों में उलझने के बजाय लोगों को जरूरी मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। उनके मुताबिक, सरकार की आलोचना करना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है, लेकिन व्यक्तिगत अपशब्दों और गैर-जिम्मेदाराना भाषा को सही नहीं ठहराया जा सकता।

2019 में बीजेपी में शामिल हुई थीं ईशा

ईशा कोप्पिकर साल 2019 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुई थीं। फिल्मों में अपने अभिनय के अलावा वह समय-समय पर सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी राय रखने के लिए भी चर्चा में रहती हैं। कंपनी’, ‘फिजा’ और ‘एक विवाह... ऐसा भी’ जैसी फिल्मों में नजर आ चुकीं ईशा अब एक बार फिर अपने बेबाक बयानों को लेकर सुर्खियों में हैं। ताजा बयान में भी उन्होंने साफ कर दिया है कि सोशल मीडिया पर फॉलोअर्स कम होने या ट्रोलिंग के डर से वह अपनी राय बदलने वाली नहीं हैं।
  
 
 
 
 

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