नारी डेस्क: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय मुक्केबाजों ने ऐसा प्रदर्शन किया है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। ग्लास्गो में खेले जा रहे राष्ट्रमंडल खेलों में 1 अगस्त भारत के लिए बेहद यादगार दिन साबित हुआ, जब पुरुष और महिला वर्ग के भारतीय बॉक्सरों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एक ही दिन में सात स्वर्ण पदक जीत लिए। भारतीय मुक्केबाजों ने अपने तेज आक्रमण, बेहतरीन तकनीक और आत्मविश्वास के दम पर कई मजबूत अंतरराष्ट्रीय प्रतिद्वंद्वियों को हराया। बॉक्सिंग के अलावा जूडो और पैरा ट्रैक एंड फील्ड में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया, जिससे भारत की पदक तालिका में स्थिति और मजबूत हुई।
पदक तालिका में चौथे स्थान पर पहुंचा भारत
फाइनल मुकाबलों के बाद भारत के खाते में कुल 38 पदक दर्ज हो चुके हैं, जिनमें 13 स्वर्ण, 17 रजत और 8 कांस्य पदक शामिल हैं। इस प्रदर्शन के दम पर भारतीय दल पदक तालिका में चौथे स्थान पर पहुंच गया। हालांकि इस सफलता की सबसे बड़ी वजह भारतीय मुक्केबाजों का ऐतिहासिक प्रदर्शन रहा, जिन्होंने सात गोल्ड जीतकर नया रिकॉर्ड कायम किया।

जैस्मिन लंबोरिया: कांस्य से गोल्ड तक का शानदार सफर
हरियाणा के भिवानी की रहने वाली 24 वर्षीय जैस्मिन लंबोरिया ने फाइनल मुकाबले में अपनी प्रतिद्वंद्वी वॉल्श को हराकर स्वर्ण पदक जीता। मुकाबले की शुरुआत में उन्हें कड़ी चुनौती मिली, लेकिन अनुभव और बेहतरीन तकनीक के दम पर उन्होंने मुकाबले पर पूरी तरह नियंत्रण बना लिया। विश्व चैंपियन जैस्मिन ने निर्णायक पंच लगाकर गोल्ड अपने नाम किया। खास बात यह रही कि उन्होंने 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में जीते कांस्य पदक के बाद इस बार स्वर्ण जीतकर अपने प्रदर्शन को नई ऊंचाई दी। जैस्मिन का बॉक्सिंग से गहरा पारिवारिक रिश्ता है। वह एशियाई खेलों में दो बार स्वर्ण पदक जीतने वाले दिग्गज मुक्केबाज हवा सिंह की पड़पोती हैं। बचपन में अपने चाचा संदीप और परमिंदर लंबोरिया को अभ्यास करते देख उन्होंने बॉक्सिंग को अपनाया। वहीं, मैरी कॉम और विजेंदर सिंह की उपलब्धियों ने उन्हें इस खेल में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। पेरिस ओलंपिक 2024 में शुरुआती हार के बाद जैस्मिन ने अपने खेल में कई बदलाव किए, जिसका परिणाम विश्व चैंपियनशिप और अब कॉमनवेल्थ गेम्स के स्वर्ण पदक के रूप में सामने आया।
प्रीति पवार: सेना की अधिकारी और गोल्डन गर्ल
23 वर्षीय प्रीति पवार भारतीय महिला मुक्केबाजी की उभरती हुई सितारों में गिनी जाती हैं। उन्होंने 14 वर्ष की उम्र में बॉक्सिंग शुरू की थी। उनके चाचा और राष्ट्रीय स्तर के पदक विजेता मुक्केबाज विनोद पवार ने उन्हें इस खेल की शुरुआती ट्रेनिंग दी। प्रीति पहले ही एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीत चुकी हैं। इसके बाद उन्होंने 2025 वर्ल्ड बॉक्सिंग कप में स्वर्ण पदक हासिल किया। 2026 एशियन एलीट बॉक्सिंग चैंपियनशिप में उन्होंने तीन बार की विश्व चैंपियन हुआंग शियाओ-वेन को हराकर बड़ा उलटफेर किया था। उनकी लगातार सफलताओं को देखते हुए भारतीय सेना ने उन्हें सीधे नायब सूबेदार के पद पर नियुक्त किया। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत को एक और गोल्ड दिलाया।
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अंकुश पंघाल: युवा मुक्केबाज जिसने पहले ही राष्ट्रमंडल खेल में जीता गोल्ड
हरियाणा के 22 वर्षीय अंकुश पंघाल ने बेहद कम समय में भारतीय मुक्केबाजी में अपनी मजबूत पहचान बना ली है। जूनियर और यूथ स्तर पर सफलता के बाद उन्होंने सीनियर वर्ग में भी शानदार शुरुआत की। 2026 राष्ट्रीय बॉक्सिंग चैंपियनशिप जीतने के बाद उन्होंने वर्ल्ड बॉक्सिंग कप फाइनल में रजत पदक हासिल किया। इन उपलब्धियों ने उन्हें भारतीय टीम का भरोसेमंद मुक्केबाज बना दिया। अपने पहले ही कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर अंकुश ने साबित कर दिया कि वह भविष्य में ओलंपिक और विश्व चैंपियनशिप जैसे बड़े मंचों पर भी भारत के लिए मजबूत दावेदार बन सकते हैं।
अरुंधति चौधरी: बास्केटबॉल से बॉक्सिंग तक का प्रेरणादायक सफर
राजस्थान के कोटा की रहने वाली 23 वर्षीय अरुंधति चौधरी का खेल जीवन बॉक्सिंग से नहीं बल्कि बास्केटबॉल से शुरू हुआ था। करीब 15 साल की उम्र तक वह राज्य स्तर की बास्केटबॉल खिलाड़ी रहीं। बाद में उनके पिता ने उन्हें बॉक्सिंग अपनाने की सलाह दी और यही फैसला उनके करियर का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ। अरुंधति ने 2021 में विश्व युवा चैंपियनशिप जीतकर इतिहास रच दिया और किसी भी आयु वर्ग में विश्व चैंपियन बनने वाली राजस्थान की पहली महिला मुक्केबाज बनीं। इसके बाद उन्होंने 2025 वर्ल्ड कप में भी स्वर्ण पदक जीता। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के सेमीफाइनल में उन्होंने वेल्स की अनुभवी मुक्केबाज रोजी एक्लेस को हराकर फाइनल में जगह बनाई और अंततः स्वर्ण पदक जीतकर अपने शानदार सफर को नई पहचान दी।

प्रिया गंगहास: सबसे युवा स्वर्ण विजेताओं में शामिल
हरियाणा के भिवानी की रहने वाली 20 वर्षीय प्रिया गंगहास भारतीय दल की सबसे युवा गोल्ड मेडलिस्ट में शामिल हैं। वह भारतीय मुक्केबाज साक्षी चौधरी की चचेरी बहन हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कदम रखते ही उन्होंने अपनी प्रतिभा का शानदार परिचय दिया। 2026 एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में उन्होंने 60 किलोग्राम भार वर्ग का स्वर्ण पदक जीता था। इस दौरान उन्होंने चीन की पूर्व विश्व चैंपियन चेंग्यू यांग जैसी मजबूत मुक्केबाज को भी हराया। कॉमनवेल्थ गेम्स में भी उन्होंने अपने शानदार प्रदर्शन को जारी रखते हुए भारत के लिए गोल्ड जीत लिया।
साक्षी चौधरी: चोट से वापसी कर जीता स्वर्ण
25 वर्षीय साक्षी चौधरी का सफर संघर्ष और हौसले की मिसाल है। जूनियर स्तर पर शानदार प्रदर्शन के बाद उन्होंने 2021 एशियाई चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता, लेकिन इसके बाद कंधे की गंभीर चोट के कारण वह 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स और 2023 एशियाई खेलों में हिस्सा नहीं ले सकीं। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जगह बनाने के लिए उन्होंने अपना भार वर्ग बदलकर 54 किलोग्राम से 51 किलोग्राम कर लिया। चयन ट्रायल में उन्होंने ज्योति गुलिया, निखत जरीन और विश्व चैंपियन मीनाक्षी हुड्डा जैसी दिग्गज मुक्केबाजों को हराकर टीम में जगह बनाई। अपने पहले राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर साक्षी ने शानदार वापसी करते हुए भारतीय मुक्केबाजी में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज करा दिया।
सचिन सिवाच: किसान परिवार का बेटा बना गोल्ड मेडलिस्ट
हरियाणा के भिवानी के 26 वर्षीय सचिन सिवाच ने महज 10 साल की उम्र में बॉक्सिंग शुरू कर दी थी। किसान परिवार से आने वाले सचिन को उनके माता-पिता ने बचपन से ही खेल के लिए प्रेरित किया। उन्होंने जूनियर और यूथ स्तर पर भारत के लिए कई अंतरराष्ट्रीय पदक जीते, लेकिन सीनियर स्तर पर शुरुआती वर्षों में उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली। पिछले दो वर्षों में उन्होंने शानदार वापसी की। 2025 वर्ल्ड बॉक्सिंग कप फाइनल में स्वर्ण और 2026 एशियाई चैंपियनशिप में रजत पदक जीतने के बाद अब उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में गोल्ड जीतकर अपने करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली।
भारतीय मुक्केबाजी के लिए ऐतिहासिक पल
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 भारतीय मुक्केबाजी के इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा। सात मुक्केबाजों द्वारा एक साथ सात स्वर्ण पदक जीतना भारतीय बॉक्सिंग की नई ताकत और बढ़ते स्तर का प्रमाण है। इन खिलाड़ियों ने न केवल भारत की पदक संख्या बढ़ाई, बल्कि यह भी दिखा दिया कि आने वाले वर्षों में भारतीय मुक्केबाज विश्व और ओलंपिक स्तर पर भी बड़ी सफलताएं हासिल करने का दम रखते हैं।