
नारी डेस्क: कुछ लोगों में निस्टैगमस (Nystagmus), या 'डांसिंग आइज़' (आंखों का हिलना-डुलना) आंखों से जुड़ी एक खास स्थिति देखने को मिलती है। इसमें आंखें बार-बार और बिना किसी कंट्रोल के हिलती-डुलती हैं जैसे कि कांपना। यह ऊपर-नीचे, दाएं-बाएं, गोल-गोल घूमते हुए या एक तरफ खिसकने के बाद झटके के साथ हो सकता है। इसकी गति, बार-बार होने की दर और इसके दिखाई देने का स्तर अलग-अलग हो सकता है। हालांकि निस्टैगमस अपने आप में कोई बीमारी नहीं है, लेकिन यह अंदरूनी बीमारियों और आंखों से जुड़ी दूसरी समस्याओं के संकेत दे सकता है। लेकिन निस्टैगमस का कारण क्या है और क्या इसका इलाज हो सकता है? यहां जानिए इसके बारे में जरूरी बातें।

दिमाग में असर डालती है ये बीमारी
हालांकि इस स्थिति का असली कारण पता नहीं है, लेकिन जिन लोगों को यह समस्या होती है उन्हें कभी-कभी दिमाग के एक हिस्से, सेरिबेलम में दिक्कत का सामना करना पड़ता है। आंखों की गतिविधियों का तालमेल सेरिबेलम ही कंट्रोल करता है, इसलिए आंखों का हिलना-डुलना (डांसिंग आइज) इस बात का संकेत है कि यह तालमेल ठीक से काम नहीं कर रहा है। इस बीमारी वाले ज़्यादातर लोगों में न्यूरोब्लास्टोमा ट्यूमर पाए जाते हैं। ऐसा लगता है कि न्यूरोब्लास्टोमा के इलाज का ऑप्सोक्लोनस-मायोक्लोनस सिंड्रोम के नतीजों पर कोई असर नहीं पड़ता है। जिन बच्चों को न्यूरोब्लास्टोमा नहीं है, उनमें भी किसी संक्रामक बीमारी के होने के बाद यह विकार हो सकता है।
डांसिंग आइज के लक्षण
इस बीमारी में आंखों के नाचने जैसी हरकत के अलावा, शरीर के धड़ और अंगों में भी झटकेदार हरकतें होती हैं। मरीज बेचैन रहते हैं और उन्हें नींद से जुड़ी परेशानियां भी होती हैं। हालांकि यह बीमारी जानलेवा नहीं है, लेकिन बिना मेडिकल इलाज के बहुत कम लोग ही पूरी तरह ठीक हो पाते हैं। कुछ मामलों में यह बच्चों को इतना गंभीर नुकसान पहुंचाता है कि ठीक होने के बाद भी उन्हें तालमेल बिठाने, व्यवहार, नींद और दूसरी चीज़ों से जुड़ी परेशानियां बनी रहती हैं।

इलाज के विकल्प
आंखों के डॉक्टर बताते हैं कि डांसिंग आई सिंड्रोम के इलाज में आमतौर पर इसकी असल वजह का इलाज किया जाता है।जैसे ट्यूमर को हटाना या इन्फेक्शन का इलाज करना। इम्यून सिस्टम के नर्वस सिस्टम पर हमले को कम करने के लिए आमतौर पर इम्यूनोथेरेपी का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स, इंट्रावेनस इम्युनोग्लोबुलिन (IVIG) या रिटक्सिमैब जैसी दवाएं शामिल हो सकती हैं। मोटर रिकवरी और डेवलपमेंट में मदद के लिए फिजिकल और ऑक्यूपेशनल थेरेपी की भी जरूरत होती है।