नारी डेस्क : सुबह उठते ही गर्दन में जकड़न महसूस होना, कंधों में दर्द रहना या सिर भारी लगना आजकल एक आम समस्या बन चुकी है। ज्यादातर लोग इसका कारण लंबे समय तक मोबाइल चलाना, लैपटॉप पर काम करना या तनाव को मानते हैं। हालांकि, कई बार इस परेशानी की जड़ हमारी रोजमर्रा की एक छोटी-सी आदत में छिपी होती है गलत तकिए का इस्तेमाल। विशेषज्ञों के अनुसार, सही तकिया न केवल बेहतर नींद में मदद करता है, बल्कि गर्दन और रीढ़ की हड्डी को सही सपोर्ट देकर दर्द और अकड़न जैसी समस्याओं से भी बचा सकता है।
गर्दन के लिए तकिए की भूमिका क्यों है महत्वपूर्ण?
नींद के दौरान गर्दन और रीढ़ की हड्डी का संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी होता है। यदि तकिया सिर और गर्दन को सही सहारा नहीं देता, तो पूरी रात मांसपेशियों और जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता रहता है। इसका असर सुबह उठने पर दर्द, जकड़न और थकान के रूप में सामने आ सकता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि तकिया चुनते समय केवल उसकी मुलायमता या कठोरता पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। सबसे जरूरी बात यह है कि वह आपकी सोने की स्थिति और शरीर की जरूरतों के अनुरूप हो।

करवट लेकर सोने वालों के लिए कैसा तकिया सही रहेगा
जो लोग करवट लेकर सोते हैं, उनके लिए थोड़ा ऊंचा और पर्याप्त सपोर्ट देने वाला तकिया बेहतर माना जाता है। दरअसल, इस स्थिति में सिर और गद्दे के बीच एक खाली जगह बनती है, जिसे सही ऊंचाई वाला तकिया भरता है। ऐसे लोगों के लिए मेमोरी फोम या कंटूर डिजाइन वाले तकिए अच्छे विकल्प साबित हो सकते हैं। ये गर्दन को संतुलित सहारा देते हैं और रीढ़ को सीधी स्थिति में बनाए रखने में मदद करते हैं, जिससे दर्द की संभावना कम हो जाती है।
पीठ के बल सोने वालों को क्या चुनना चाहिए?
अगर आप पीठ के बल सोते हैं, तो बहुत ऊंचा या बहुत पतला तकिया दोनों ही नुकसान पहुंचा सकते हैं। इस स्थिति में मध्यम ऊंचाई वाला तकिया सबसे उपयुक्त माना जाता है। ऐसा तकिया गर्दन की प्राकृतिक वक्रता को बनाए रखता है और रीढ़ की हड्डी को सही एलाइनमेंट में रखने में मदद करता है। इससे सुबह उठने पर गर्दन, कंधों और ऊपरी पीठ में दर्द होने का खतरा कम रहता है।
पेट के बल सोने वालों के लिए क्या है सही
पेट के बल सोने वाले लोगों को अपेक्षाकृत पतला और नरम तकिया इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है। इस मुद्रा में यदि तकिया ज्यादा ऊंचा हो, तो गर्दन अनावश्यक रूप से ऊपर उठ जाती है, जिससे मांसपेशियों पर तनाव बढ़ सकता है। पतला तकिया सिर और गर्दन को अधिक प्राकृतिक स्थिति में बनाए रखता है और दबाव को कम करने में मदद करता है।

गद्दे के अनुसार भी करें तकिए का चुनाव
विशेषज्ञों का कहना है कि तकिया चुनते समय केवल सोने की आदत ही नहीं, बल्कि गद्दे की मजबूती को भी ध्यान में रखना चाहिए। यदि आपका गद्दा काफी सख्त है, तो थोड़ा ऊंचा तकिया बेहतर विकल्प हो सकता है क्योंकि शरीर ज्यादा नीचे नहीं धंसता। वहीं, यदि गद्दा मुलायम है और शरीर उसमें कुछ हद तक धंस जाता है, तो कम ऊंचाई वाला तकिया अधिक आरामदायक महसूस हो सकता है।
पुराने तकिए से बढ़ सकती है परेशानी
अक्सर लोग वर्षों तक एक ही तकिए का इस्तेमाल करते रहते हैं। लेकिन समय के साथ तकिए की बनावट और सपोर्ट देने की क्षमता कम हो जाती है। दब चुके या आकार खो चुके तकिए गर्दन को सही सहारा नहीं दे पाते, जिससे दर्द की समस्या बढ़ सकती है। इसलिए समय-समय पर तकिए को बदलना भी उतना ही जरूरी है जितना सही तकिया चुनना।
कौन-से तकिए माने जाते हैं बेहतर?
आजकल बाजार में मेमोरी फोम, लेटेक्स और कूलिंग तकनीक वाले कई आधुनिक तकिए उपलब्ध हैं। ये तकिए गर्दन और सिर के आकार के अनुसार खुद को ढाल लेते हैं और बेहतर सपोर्ट प्रदान करते हैं। विशेष रूप से मेमोरी फोम और लेटेक्स तकिए गर्दन दर्द से परेशान लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हैं, क्योंकि ये लंबे समय तक अपना आकार बनाए रखते हैं और आरामदायक नींद में मदद करते हैं।