नारी डेस्क: लखनऊ के अलीगंज स्थित पुरानिया इलाके में सोमवार दोपहर हुआ भीषण अग्निकांड पूरे देश को झकझोर गया। एक कोचिंग सेंटर में लगी आग ने कुछ ही मिनटों में विकराल रूप ले लिया और देखते ही देखते तीन मंजिला इमारत धुएं और आग की लपटों से घिर गई। हादसे के दौरान कई छात्र अंदर फंस गए, जबकि कुछ अपनी जान बचाने के लिए खिड़कियों और ऊपरी मंजिलों से कूदने को मजबूर हो गए। इस दर्दनाक हादसे में कई छात्रों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरातफरी और मातम का माहौल छा गया।
हादसे ने देशभर को किया भावुक
इस घटना ने न सिर्फ लखनऊ बल्कि पूरे देश को गहरे सदमे में डाल दिया है। सोशल मीडिया पर लोग मृतकों के प्रति शोक व्यक्त कर रहे हैं और हादसे को लेकर अपनी पीड़ा साझा कर रहे हैं। इसी बीच अभिनेता और समाजसेवी सोनू सूद ने भी इस त्रासदी पर गहरा दुख व्यक्त किया है।
'क्लासरूम सपनों के लिए होते हैं, अंतिम पड़ाव के लिए नहीं'
सोनू सूद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि क्लासरूम वह जगह होते हैं जहां बच्चे अपने भविष्य के सपने बुनते हैं, न कि जहां उनकी जिंदगी का अंत हो जाए। उन्होंने कहा कि लखनऊ अग्निकांड की खबर ने उनका दिल तोड़ दिया है। कितनी ही मासूम जिंदगियां और अनगिनत सपने इस हादसे में खत्म हो गए। वे बच्चे जो आगे चलकर अधिकारी, कलाकार, नेता और समाज में बदलाव लाने वाले नागरिक बन सकते थे, उनकी यात्रा शुरू होने से पहले ही थम गई।
'परिवारों के दर्द को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता'
अपने भावुक संदेश में सोनू सूद ने कहा कि जिन परिवारों ने अपने बच्चों को खोया है, उनके दुख को शब्दों में व्यक्त करना संभव नहीं है। उन्होंने शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी प्रार्थनाएं उन सभी लोगों के साथ हैं जो इस असहनीय दर्द और सदमे से गुजर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि समाज की जिम्मेदारी सिर्फ आंसू बहाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि बच्चों को सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण मिले और सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन किया जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
सोशल मीडिया पर लोगों ने भी जताया दुख
सोनू सूद की पोस्ट पर हजारों लोगों ने प्रतिक्रिया दी। कई यूजर्स ने लिखा कि लखनऊ से आई यह खबर दिल दहला देने वाली है। कुछ लोगों ने कहा कि इस हादसे ने न जाने कितने घरों के चिराग बुझा दिए और अनगिनत सपनों को अधूरा छोड़ दिया। लोगों ने मांग की कि कोचिंग सेंटरों और शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षा मानकों की गंभीरता से जांच होनी चाहिए और किसी भी तरह की लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
आग लगते ही मच गई थी भगदड़
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आग लगने के बाद कुछ ही मिनटों में पूरे भवन में धुआं फैल गया। छात्र इधर-उधर भागने लगे और बाहर निकलने के रास्ते तलाशने लगे। कई छात्र ऊपरी मंजिलों पर फंस गए, जहां से निकलना उनके लिए बेहद मुश्किल हो गया था। स्थिति इतनी भयावह थी कि कई छात्रों ने जान बचाने के लिए ऊंची मंजिलों से छलांग लगाने का जोखिम उठाया।
दमकल विभाग ने दी राहत, लेकिन नहीं बच सकीं कई जिंदगियां
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंच गईं। प्रशासन की ओर से आठ दमकल गाड़ियों को घटनास्थल पर भेजा गया। आग की तीव्रता को देखते हुए फायरमैनों ने इमारत की दीवार तोड़कर अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने का प्रयास किया। कड़ी मशक्कत के बाद 20 से अधिक छात्रों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, लेकिन कई छात्रों को बचाया नहीं जा सका।
भाई का आखिरी संदेश सुनकर टूट पड़ा परिवार
हादसे के दौरान कई परिवार अपने बच्चों से फोन पर संपर्क बनाए हुए थे। एक छात्र के बड़े भाई शकील अहमद ने बताया कि उनका छोटा भाई अंदर फंसा हुआ था। उन्होंने बताया कि भाई का आखिरी संदेश आया था कि वह आग और धुएं से बचने के लिए वॉशरूम की ओर भाग रहा है। इसके बाद उससे कोई संपर्क नहीं हो पाया। यह सुनाते हुए शकील की आंखें भर आईं।
जान बचाने के लिए तीसरी मंजिल से कूदे छात्र
बचाव अभियान के दौरान कई ऐसे दृश्य सामने आए जिन्होंने लोगों को झकझोर कर रख दिया। कुछ छात्र आग की लपटों और घने धुएं से बचने के लिए ऊपरी मंजिलों से कूदते हुए दिखाई दिए। एक युवक बिल्डिंग से छलांग लगाने के बाद नीचे लगी लोहे की रेलिंग पर जा गिरा। हादसा इतना गंभीर था कि रेलिंग की ग्रिल उसके पेट में कई जगह धंस गई। उसे गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया गया।
रोते-बिलखते नजर आए परिजन
घटनास्थल के बाहर अपने बच्चों की खबर का इंतजार कर रहे परिजनों का दर्द हर किसी को भावुक कर रहा था। कोई अपने बेटे का नाम पुकार रहा था तो कोई अस्पतालों के चक्कर लगा रहा था। कई माता-पिता बदहवास हालत में घटनास्थल पर पहुंचे और अपने बच्चों की सलामती की दुआ करते नजर आए। पूरे इलाके में चीख-पुकार, बेचैनी और गम का माहौल बना रहा।
सुरक्षा व्यवस्था पर खड़े हुए बड़े सवाल
इस हादसे ने एक बार फिर कोचिंग सेंटरों, हॉस्टलों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षा मानकों की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अग्नि सुरक्षा के नियमों का पूरी तरह पालन किया जाए और नियमित जांच हो, तो ऐसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।फिलहाल हादसे की जांच जारी है और प्रशासन आग लगने के कारणों का पता लगाने में जुटा हुआ है। वहीं पूरे शहर में इस त्रासदी को लेकर शोक और आक्रोश का माहौल बना हुआ है।