नारी डेस्क: अब तक विटामिन B2 को शरीर के लिए बेहद जरूरी पोषक तत्व माना जाता रहा है। यह शरीर में ऊर्जा बनाने, त्वचा और आंखों को स्वस्थ रखने के साथ-साथ तंत्रिका तंत्र को सही तरीके से काम करने में मदद करता है। लेकिन हाल ही में सामने आई एक नई रिसर्च ने वैज्ञानिकों को भी हैरान कर दिया है। जर्मनी के शोधकर्ताओं का दावा है कि यही विटामिन कैंसर कोशिकाओं को खत्म होने से बचाने में अहम भूमिका निभा सकता है। अध्ययन के अनुसार, कैंसर कोशिकाएं विटामिन B2 की मदद से अपने चारों ओर एक तरह की सुरक्षा ढाल बना लेती हैं, जिससे वे शरीर की प्राकृतिक ‘सेल डेथ’ प्रक्रिया से बच निकलती हैं।
जर्मनी के वैज्ञानिकों का बड़ा दावा
जर्मनी की जूलियस-मैक्सिमिलियंस यूनिवर्सिटी वुर्जबर्ग स्थित ‘रुडोल्फ विचो सेंटर’ के वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन में पाया कि विटामिन B2 कैंसर कोशिकाओं के लिए एक तरह का सुरक्षा कवच तैयार करने में सहायता करता है। यह शोध प्रतिष्ठित जर्नल नेचर सेल बायोलॉजी में प्रकाशित हुआ है। वैज्ञानिकों के अनुसार, कैंसर कोशिकाएं शरीर की प्राकृतिक मृत्यु प्रक्रिया से बचने के लिए विशेष सुरक्षा तंत्र विकसित कर लेती हैं। इस तंत्र को सक्रिय बनाए रखने में विटामिन B2 ईंधन की तरह काम करता है।

क्या है फेरोप्टोसिस?
शरीर में ‘प्रोग्राम्ड सेल डेथ’ यानी कोशिकाओं की सुनियोजित मृत्यु एक प्राकृतिक सुरक्षा प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य क्षतिग्रस्त या खतरनाक कोशिकाओं को नियंत्रित तरीके से समाप्त करना होता है ताकि शरीर सुरक्षित रह सके। फेरोप्टोसिस भी इसी प्रकार की एक प्रक्रिया है। इसमें आयरन से होने वाली क्षति कोशिका की एंटीऑक्सीडेंट सुरक्षा पर भारी पड़ती है और कोशिका नष्ट होने लगती है। लेकिन कैंसर कोशिकाएं अपनी सुरक्षा प्रणाली को मजबूत करके इस प्रक्रिया से खुद को बचा लेती हैं।
कैसे काम करता है कैंसर का ‘सुरक्षा कवच’?
अध्ययन में बताया गया कि कैंसर कोशिकाएं FSP1 नामक प्रोटीन की मदद से अपने चारों ओर सुरक्षा कवच बना लेती हैं। यह प्रोटीन कोशिकाओं को फेरोप्टोसिस से बचाने का काम करता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस सुरक्षा प्रणाली को सक्रिय रखने के लिए विटामिन B2 बेहद जरूरी होता है। यानी यदि किसी तरह विटामिन B2 की भूमिका को रोका जाए, तो कैंसर कोशिकाओं की यह सुरक्षा दीवार कमजोर पड़ सकती है और वे नष्ट होने लगेंगी।
‘रोजोफ्लेविन’ से टूटा कैंसर कोशिकाओं का बचाव
शोधकर्ताओं ने अपने प्रयोगों में ‘रोजोफ्लेविन’ नामक एक विशेष यौगिक का इस्तेमाल किया। यह संरचना में विटामिन B2 जैसा दिखाई देता है, इसलिए कैंसर कोशिकाएं इसे असली विटामिन समझ लेती हैं। लेकिन वास्तव में यह कोशिकाओं को सुरक्षा देने के बजाय उनकी रक्षा प्रणाली को कमजोर कर देता है। प्रयोगशाला में किए गए परीक्षणों में पाया गया कि कम मात्रा में भी रोजोफ्लेविन कैंसर कोशिकाओं में फेरोप्टोसिस की प्रक्रिया शुरू करने में सफल रहा। वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में यह खोज कैंसर के इलाज में नई दिशा दे सकती है।

खानपान से मिलता है विटामिन B2
विशेषज्ञों के अनुसार, विटामिन B2 शरीर खुद नहीं बना सकता। इसे भोजन के जरिए प्राप्त करना पड़ता है। डेयरी उत्पाद, अंडे, मांस, मछली और हरी पत्तेदार सब्जियां इसके प्रमुख स्रोत माने जाते हैं। हालांकि वैज्ञानिकों ने यह स्पष्ट किया है कि यह शोध अभी शुरुआती चरण में है और सामान्य लोगों को अपने खानपान में बदलाव करने की जरूरत नहीं है।
कैंसर से आगे भी हो सकता है उपयोग
शोध से जुड़े वैज्ञानिक फ्राइडमैन एंगेली का कहना है कि फेरोप्टोसिस केवल कैंसर तक सीमित विषय नहीं है। यह प्रक्रिया अल्जाइमर, पार्किंसंस जैसे न्यूरोडीजेनेरेटिव रोगों को समझने में भी मदद कर सकती है। इसके अलावा अंग प्रत्यारोपण, ऊतक क्षति और कई गंभीर बीमारियों के इलाज में भी इस शोध के परिणाम भविष्य में उपयोगी साबित हो सकते हैं।
आगे क्या करेंगे वैज्ञानिक?
शोधकर्ताओं की टीम अब ऐसे प्रभावी अवरोधक विकसित करने की तैयारी कर रही है जो विटामिन B2 आधारित सुरक्षा तंत्र को नियंत्रित कर सकें। इनका परीक्षण प्रीक्लिनिकल मॉडल में किया जाएगा ताकि यह समझा जा सके कि भविष्य में इन्हें कैंसर थेरेपी के रूप में कितनी सफलता मिल सकती है।