
नारी डेस्क: पति की लंबी आयु के लिए रखा जाने वाला वट सावित्री व्रत इस साल 16 मई के दिन रखा जाएगा। उदयातिथि होने की वजह से ज्येष्ठ मास की अमावस्या को यह व्रत रखा जाएगा। इस दिन सच्चे मन से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और महिलाओं को सदैव सौभाग्यवती रहने का आशीर्वाद मिलता है।इस दिन वैवाहिक जीवन में तनाव को दूर करने और पति को दूर करने और पति के दीर्घायु के लिए कच्चा सूत लेकर उसमें 7 गांठें लगाकर पति-पत्नी दोनों भगवान शिव और माता पार्वती को अर्पित करें।

वट सावित्री व्रत की मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन देवी सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस लेकर उन्हें जीवित किया था। इस दिन महिलाएं पूरे श्रद्धा भाव से व्रत करती हैं और वट वृक्ष (बरगद का पेड़) की पूजा करती हैं। वट वृक्ष को देवी सावित्री, ब्रह्मा, विष्णु और शिव का रूप माना गया है। जड़ में ब्रह्मा, तने में विष्णु, डालियों में शिव का वास होता है। वट वृक्ष की पूजा से इन तीनों देवताओं की कृपा मिलती है और साथ ही अखंड सौभाग्य और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है।

इस दिन इतने बार लपेटें कच्चा सूत
पूजा के समय वट वृक्ष पर कच्चा सूत लपेटना एक विशेष परंपरा है। परंपरा के अनुसार, महिलाएं पेड़ के चारों ओर सूत को 7, 21 या 108 बार लपेट सकती हैं। आमतौर पर 7 बार सूत लपेटने की परंपरा सबसे अधिक प्रचलित है। यह संख्या सात जन्मों के वैवाहिक बंधन का प्रतीक मानी जाती है। यह व्रत नारी के प्रेम, धैर्य, आस्था और त्याग का परिचायक है। देवी सावित्री ने जिस तरह अपने तप और संकल्प से अपने पति को यमराज से वापस पाया, उसी भावना से आज भी महिलाएं इस व्रत में निभाती हैं। यह दिन केवल धार्मिक महत्व का नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और पारिवारिक संबंधों को मजबूत करने वाला पर्व भी है।