
नारी डेस्क: हंटावायरस को लेकर आए दिन चौका देने वाली बातें सामने आ रही हें। एक नए अध्ययन में पाया गया है कि हंटावायरस का एंडीज़ स्ट्रेन, ठीक होने के लगभग छह साल बाद तक भी इंसान के सीमेन में मौजूद रह सकता है। इससे इस बात को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं कि लक्षण गायब होने के काफी समय बाद भी यौन संपर्क से यह वायरस फैल सकता है। "Viruses" जर्नल में प्रकाशित इन निष्कर्षों ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है कि क्या ठीक हो चुके लोगों को भी इबोला के मरीज़ों को दी जाने वाली सलाह की तरह ही।
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इस तरह फैलता है संक्रमण
हंटावायरस, जो सांस की बूंदों (रेस्पिरेटरी ड्रॉपलेट्स) के माध्यम से फैल सकता है और जिसके कुछ प्रकार (स्ट्रेन) एक इंसान से दूसरे इंसान में भी फैलने में सक्षम हैं एक बड़ी वैश्विक चिंता और गंभीर खतरा बनकर उभरा है। संक्रमण आमतौर पर संक्रमित कृंतकों, या उनके मूत्र, मल या लार के संपर्क में आने से होता है; जबकि एक इंसान से दूसरे इंसान में इसका संक्रमण होना दुर्लभ है। मनुष्यों में इस बीमारी के मामले सबसे अधिक ग्रामीण परिवेशों जैसे जंगलों, खेतों और फार्मों में सामने आते हैं, जहाँ कृंतक मौजूद होते हैं और लोगों के उनके संपर्क में आने की संभावना अधिक होती है।
सालों तक जिंदा रह सकता है वायरस
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक एंडीज हंतावायरस सिर्फ हवा या चूहों से नहीं, बल्कि इंसान के कई तरह के शरीर के तरल पदार्थों से भी फैल सकता है. इसमें लार, मां का दूध और स्पर्म शामिल हैं। रिसर्चर्स ने 55 साल के एक आदमी पर नज़र रखी, जिसे 2016 में दक्षिण अमेरिका की यात्रा के दौरान एंडीज़ हंटावायरस का इन्फेक्शन हो गया था। हालांकि, कुछ ही महीनों में उसके खून, पेशाब और सांस के सैंपल से यह वायरस खत्म हो गया था, लेकिन 71 महीने बाद भी उसके सीमेन के सैंपल में वायरल RNA के निशान पाए गए। वैज्ञानिकों का कहना है कि अंडकोष एक सुरक्षित जगह की तरह काम कर सकते हैं, जहाँ शरीर के बाकी हिस्सों से इन्फेक्शन खत्म हो जाने के बाद भी कुछ वायरस ज़िंदा रह सकते हैं।
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पुरुषों को ज्यादा खतरा
शोधकर्ताओं ने इस बात पर ज़ोर दिया कि एंडीज़ हंटावायरस के यौन संपर्क से फैलने का कोई भी पुष्ट मामला अभी तक दर्ज नहीं किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि इस अध्ययन में केवल एक ही मरीज़ शामिल था, जिसका मतलब है कि कोई भी पक्का निष्कर्ष निकालने से पहले और ज़्यादा शोध की ज़रूरत है। वैज्ञानिक वीर्य के नमूनों से जीवित वायरस को अलग नहीं कर पाए, हालांकि वायरल जेनेटिक सामग्री की लगातार मौजूदगी से यह संकेत मिलता है कि यह वायरस पुरुषों के प्रजनन तंत्र में सालों तक बना रह सकता है।