नारी डेस्क: गिलोय जिसे गुडूची के नाम से भी जाना जाता है सेहत के लिए कई तरह से फायदेमंद होने के कारण पारंपरिक आयुर्वेदिक चिकित्सा में बहुत महत्वपूर्ण है। इसके कई औषधीय गुण हैं अक्सर इसे डायबिटीज के लिए एक प्राकृतिक उपाय के तौर पर बताया जाता है। कई लोग इस उम्मीद में गिलोय का जूस पीते हैं कि इससे उनका ब्लड शुगर लेवल कम हो जाएगा या बीमारी ठीक भी हो सकती है। क्या गिलोय सच में डायबिटीज को खत्म कर देती है? आज जानिए पूरी बात

डॉक्टरों ने समझाई पूरी बात
पारंपरिक चिकित्सा में गिलोय का लंबे समय से महत्व रहा है, लेकिन डॉक्टरों का मानना है कि डायबिटीज के प्रबंधन में इसकी भूमिका के समर्थन में वैज्ञानिक प्रमाण अभी भी सीमित हैं। HT Lifestyle को दिए एक इंटरव्यू में डॉक्टर ने समझाया कि " टाइप 2 डायबिटीज़ गिलोय की कमी से नहीं होती। यह इंसुलिन रेजिस्टेंस की वजह से होती है, जो सालों तक रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और चीनी के सेवन से शरीर की ग्लूकोज़ को साफ़ करने की क्षमता पर बुरा असर पड़ने से बनता है। एक चम्मच जड़ी-बूटी भी उस नुकसान को ठीक नहीं कर सकती जो बाकी खाने की चीज़ें लगातार करती रहती हैं।"
क्या रोज ले सकते हैं गिलोय?
डॉक्टर कहते हैं कि किसी एक चमत्कारी भोजन या जड़ी-बूटी को खोजने के बजाय, ध्यान जीवनशैली में ऐसे बदलाव करने पर होना चाहिए जो लंबे समय तक अपनाए जा सकें और जिनसे इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या को दूर किया जा सके। वह कहते हैं कि हालांकि गिलोय को रोज़मर्रा की दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है, लेकिन इसे डॉक्टरी सलाह से होने वाले इलाज और जीवनशैली में बदलाव का विकल्प न माना जाए। इसलिए, अगर गिलोय से आपको आराम मिलता है, तो ज़रूर लें। बस इसके चलते अपने रोजमर्रा की दवाइयों पर ना असर आने दें।

गिलोयसे होते हैं ये फायदे
लंबे समय तक रहने वाली सूजन (क्रोनिक इन्फ्लेमेशन) का संबंध इंसुलिन रेजिस्टेंस से है, जो डायबिटीज का एक मुख्य कारण है। गिलोय में सूजन कम करने वाले ज़बरदस्त गुण होते हैं, जो सूजन को कम करने, इंसुलिन सेंसिटिविटी को बेहतर बनाने और ओवरऑल मेटाबोलिक हेल्थ को सपोर्ट करने में मदद कर सकते हैं। डायबिटीज इम्यून सिस्टम को कमज़ोर कर सकती है, जिससे लोगों को इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। गिलोय अपने इम्यूनोमॉड्यूलेटरी असर के लिए जानी जाती है, जो इम्यून सिस्टम को मज़बूत करती है और सेहत को बेहतर बनाती है।
लिवर की सुरक्षा
ग्लूकोज़ मेटाबोलिज्म में लिवर अहम भूमिका निभाता है। माना जाता है कि गिलोय लिवर की सुरक्षा करती है और उसे सही ढंग से काम करने में मदद करती है। स्वस्थ लिवर ब्लड शुगर को बेहतर ढंग से कंट्रोल करने में मदद करता है। स्ट्रेस का ब्लड शुगर लेवल पर बुरा असर पड़ सकता है। गिलोय में एडाप्टोजेनिक गुण होते हैं, जो शरीर को स्ट्रेस से निपटने में मदद करते हैं और स्ट्रेस के कारण ब्लड ग्लूकोज़ लेवल में होने वाली अचानक बढ़ोतरी को रोक सकते हैं।
गिलोय को कैसे शामिल करें
अगर आप भी अपनी डायबिटीज केयर प्लान में गिलोय को शामिल करना चाहते हैं, तो कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। डायबिटीज मैनेजमेंट प्लान में गिलोय को शामिल करने से पहले, हेल्थकेयर प्रोवाइडर से सलाह लेना ज़रूरी है। वे आपकी सेहत और दवाओं के आधार पर आपको सही सलाह दे सकते हैं। गिलोय कई रूपों में मिलती है, जैसे पाउडर, कैप्सूल और एक्सट्रैक्ट। आयुर्वेदिक डॉक्टर अक्सर व्यक्ति की ज़रूरतों के हिसाब से खास फ़ॉर्मूलेशन की सलाह देते हैं। कुछ लोग गिलोय तैयार करने के पारंपरिक तरीकों को पसंद करते हैं, जैसे काढ़ा या इन्फ्यूजन। इन्हें गिलोय के तनों को पानी में उबालकर और उससे बने लिक्विड को पीकर तैयार किया जा सकता है।
नोट: किसी भी मेडिकल कंडीशन का खुद से इलाज करने की बजाय अपने डॉक्टर की सलाह लें।