नारी डेस्क: महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (WCD) देश भर में 1 से 7 अगस्त तक 'विश्व स्तनपान सप्ताह 2026' मनाएगा। इसका उद्देश्य परिवारों, समुदायों और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के बीच बच्चे और मां के स्वास्थ्य के लिए स्तनपान के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। मंत्रालय ने कहा कि बच्चों के जीवित रहने, उनके स्वस्थ विकास और मानसिक विकास के लिए स्तनपान सबसे असरदार उपायों में से एक है। मंत्रालय ने परिवारों से आग्रह किया कि वे यह सुनिश्चित करें कि हर नवजात शिशु को जन्म के पहले घंटे के भीतर मां का दूध मिले, जिसे "गोल्डन आवर" भी कहा जाता है।

मंत्रालय ने बताए कोलोस्ट्रम के फायदे
मंत्रालय ने बताया कि कोलोस्ट्रम (बच्चे के जन्म के बाद बनने वाला पहला दूध) एंटीबॉडी और जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर होता है और इसे फेंकना नहीं चाहिए। मंत्रालय ने कोलोस्ट्रम को बच्चे का पहला प्राकृतिक टीका (वैक्सीन) बताया। कोलोस्ट्रम में प्रोटीन ज़्यादा होता है और फ़ैट और शुगर कम होती है। इसमें व्हाइट ब्लड सेल्स (सफ़ेद रक्त कोशिकाएं) होती हैं जो एंटीबॉडी बनाती हैं। ये एंटीबॉडी आपके बच्चे के इम्यून सिस्टम (रोग प्रतिरोधक क्षमता) को मज़बूत करती हैं और उसे इन्फेक्शन से बचाती हैं। कोलोस्ट्रम बहुत गाढ़ा और पोषक तत्वों से भरपूर होता है, इसलिए इसके फ़ायदे पाने के लिए आपके बच्चे के पेट को इसकी बहुत ज़्यादा मात्रा की ज़रूरत नहीं होती।
कोलोस्ट्रम में किस तरह के पोषक तत्व होते हैं?
कोलोस्ट्रम ऐसे पोषक तत्वों से भरपूर होता है जो आपके बच्चे की सुरक्षा और पोषण करते हैं, जैसा कोई और चीज़ नहीं कर सकती। यह इन चीज़ों से बना होता है:
-इम्युनोग्लोबुलिन A (एक एंटीबॉडी)।
-लैक्टोफेरिन (एक प्रोटीन जो इन्फेक्शन को रोकने में मदद करता है)।
-ल्यूकोसाइट्स (व्हाइट ब्लड सेल्स)।
-एपिडर्मल ग्रोथ फ़ैक्टर (एक प्रोटीन जो सेल की ग्रोथ को बढ़ावा देता है)।
इसका रंग कैरोटीनॉयड (एक एंटीऑक्सीडेंट) और विटामिन A से आता है। विटामिन A आपके बच्चे की नज़र, त्वचा और इम्यून सिस्टम में अहम भूमिका निभाता है। कोलोस्ट्रम में मैग्नीशियम भरपूर मात्रा में होता है, जो आपके बच्चे के दिल और हड्डियों को सहारा देता है, और कॉपर व ज़िंक भी होते हैं, जो इम्यूनिटी को मज़बूत करते हैं।

मां का दूध बच्चे के लिए कितना जरूरी?
शुरुआती छह महीनों तक केवल स्तनपान कराने का मतलब है शिशु को सिर्फ़ मां का दूध देना बिना पानी, शहद, घुट्टी, ग्लूकोज़ या फ़ॉर्मूला के क्योंकि इस दौरान मां का दूध ही बच्चे की सभी पोषण और पानी की ज़रूरतों को पूरा करता है। मंत्रालय ने आगे कहा कि छह महीने के बाद पूरक आहार (ऊपर का खाना) शुरू करना चाहिए, साथ ही दो साल या उससे ज़्यादा समय तक स्तनपान जारी रखना चाहिए। मंत्रालय ने माताओं को जन्म के बाद 'स्किन-टू-स्किन कॉन्टैक्ट' (त्वचा से त्वचा का संपर्क) बनाए रखने, बार-बार स्तनपान कराने और ज़रूरत पड़ने पर आशा कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं या स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं से सलाह लेने के लिए प्रोत्साहित किया।
स्तनपान से माताओं को भी फायदे
मंत्रालय ने यह भी कहा कि कामकाजी माताएं स्तन का दूध निकालकर सुरक्षित रूप से स्टोर कर सकती हैं। स्तनपान से माताओं को भी फ़ायदा होता है; इससे प्रसव के बाद रिकवरी में मदद मिलती है और ब्रेस्ट कैंसर, ओवेरियन कैंसर, टाइप-2 डायबिटीज़ और प्रसव के बाद होने वाले डिप्रेशन (पोस्टपार्टम डिप्रेशन) का ख़तरा कम होता है।मंत्रालय ने स्वास्थ्य पेशेवरों, सामुदायिक कार्यकर्ताओं, परिवारों और नागरिकों से एक ऐसा माहौल बनाने का आह्वान किया जो हर माँ को स्तनपान कराने में सक्षम बनाए और यह सुनिश्चित करे कि हर बच्चे को जीवन की सबसे अच्छी शुरुआत मिले।