
नारी डेस्क : असम इन दिनों भीषण बाढ़ की त्रासदी से जूझ रहा है। कई जिलों में हजारों घर जलमग्न हो गए हैं और बड़ी संख्या में लोगों को अपना आशियाना छोड़कर राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी है। कई परिवारों के सामने भोजन, पीने के पानी और सिर छिपाने तक का संकट खड़ा हो गया है। ऐसे मुश्किल समय में कई सामाजिक संगठन और समाजसेवी मदद के लिए आगे आए हैं। इन्हीं में उद्योगपति और समाजसेवी अनन्या बिड़ला भी शामिल हैं, जिन्होंने बाढ़ प्रभावित जोरहाट का दौरा कर राहत कार्यों में हिस्सा लिया। उन्होंने प्रभावित परिवारों से मुलाकात की, उनकी समस्याएं सुनीं और जरूरत का सामान वितरित किया। इस दौरान अनन्या ने कहा कि आपदा के समय केवल राहत सामग्री पहुंचाना ही नहीं, बल्कि लोगों के साथ खड़े होकर उनका हौसला बढ़ाना भी उतना ही जरूरी है।
मुश्किल समय में लोगों के साथ खड़ा होना भी उतना ही जरूरी
अपने दौरे के अनुभव साझा करते हुए अनन्या बिड़ला ने कहा कि राहत सामग्री पहुंचाना महत्वपूर्ण है, लेकिन कठिन समय में लोगों के साथ खड़े रहना, उनकी बात सुनना और उन्हें भावनात्मक सहारा देना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि आपदा से प्रभावित परिवारों को यह एहसास होना चाहिए कि वे इस संघर्ष में अकेले नहीं हैं।

बाढ़ से हजारों परिवार अब भी प्रभावित
असम के कई इलाकों, खासकर अपर असम के जिलों में आई बाढ़ ने व्यापक तबाही मचाई है। हजारों परिवार अभी भी भोजन, स्वच्छ पेयजल, आश्रय और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं। प्रशासन के साथ-साथ कई सामाजिक संगठन और स्वयंसेवी संस्थाएं राहत एवं पुनर्वास कार्यों में जुटी हुई हैं।

सामूहिक प्रयासों से ही मिलेगी राहत
अनन्या बिड़ला ने राहत अभियान में सहयोग करने वाले सभी लोगों और स्वयंसेवकों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि ऐसे कठिन समय में हर छोटी मदद भी किसी जरूरतमंद परिवार के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है। उनका मानना है कि सामूहिक प्रयासों से ही बाढ़ प्रभावित लोगों को जल्द सामान्य जीवन की ओर लौटने में मदद मिल सकती है।