
नारी डेस्क: मानसून का मौसम बहुत ज़्यादा गर्मी से राहत तो देता है, लेकिन यह फेफड़ों में फंगल इन्फेक्शन के पनपने और फैलने के लिए भी सही हालात बनाता है। जब आस-पास का माहौल नमी वाला और सीलन भरा हो और आप लंबे समय तक घर के अंदर रहते हैं, तो फेफड़ों में फंगल इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। इस मौसम में हवा में नमी ज़्यादा होती है, जिससे फेफड़ों में इन्फेक्शन फैलाने वाले फंगल स्पोर्स तेजी से बढ़ते हैं।

इन्फेक्शन होने का कारण
HT लाइफस्टाइल में छपे एक आर्टिकल के अनुसार फंगस को नमी वाली जगहों पर पनपना पसंद होता है। सीलन वाली दीवारें, हवा-पानी की सही आवाजाही न होने वाले कमरों में पानी का आना, गीले कारपेट और लकड़ी का फ़र्नीचर ये सभी ऐसी जगहें हो सकती हैं जहां अंदर की तरफ़ मोल्ड (फफूंदी) पनप सकती है। बारिश के समय, पत्तियां, मिट्टी और दूसरी ऑर्गेनिक चीज़ें टूटती हैं, जिससे हवा में बहुत सारे सूक्ष्म फंगल स्पोर्स (बीजाणु) फैल जाते हैं। ये फंगल स्पोर्स हवा में मिल जाते हैं और सांस के ज़रिए आसानी से शरीर के अंदर जा सकते हैं। ज़्यादातर स्वस्थ लोग बिना किसी परेशानी के इनसे निपट लेते हैं। हालांकि कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों को फेफड़ों में गंभीर फंगल इन्फेक्शन हो सकता है।
इन लोगों को संक्रमण का ज्यादा खतरा
जब बहुत ज़्यादा बारिश होती है, तो लोग आम तौर पर घर के अंदर ही समय बिताते हैं। अगर घर के अंदर की जगहों पर फफूंद (mould) लगी हो या हवा का आवागमन (ventilation) ठीक न हो, तो हवा में फंगल स्पोर्स की मात्रा काफ़ी बढ़ सकती है, जिससे लोग इनके संपर्क में आ सकते हैं। जिन लोगों को अस्थमा, ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीजया एलर्जिक राइनाइटिस है, उन्हें फेफड़ों में फंगल संक्रमण होने की संभावना ज़्यादा होती है। फंगल स्पोर्स के सांस के जरिए अंदर जाने से सांस की नलियों में सूजन बढ़ सकती है। कभी-कभी इससे एलर्जिक ब्रोंको-पल्मोनरी एस्परगिलोसिस जैसी स्थिति भी पैदा हो सकती है, जिससे जोरदार खांसी, सांस लेते समय घरघराहट और सांस लेने में तकलीफ होती है।

इन लोगों को ज्यादा खतरा
फेफड़ों में फंगल संक्रमण का ख़तरा उन लोगों को भी ज़्यादा होता है जिन्हें अनियंत्रित डायबिटीज है, जो कीमोथेरेपी करवा रहे हैं जो लंबे समय से स्टेरॉयड ले रहे हैं और जिनका अंग प्रत्यारोपण (organ transplant) हुआ है। मानसून के दौरान होने वाले वायरल रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन (सांस की नली के वायरल इन्फेक्शन) सांस की नली की अंदरूनी परत को कुछ समय के लिए कमजोर कर सकते हैं, जिससे फेफड़ों में फंगल इन्फेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है। फेफड़ों की बीमारी का कारण बनने वाले आम फंगल इन्फेक्शन में से एक है एस्परगिलस (Aspergillus), जो नमी वाली दीवारों, पुराने पौधों और घर के अंदर फफूंद लगी सतहों पर पनपता है। म्यूकोरेल्स (Mucorales) जैसे अन्य फंगल इन्फेक्शन मिट्टी में पाए जाते हैं। कमज़ोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों में सड़ने-गलने वाली चीज़ों से गंभीर इन्फेक्शन हो सकता है।