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सावन में शिवलिंग पर काले तिल चढ़ाने का क्या है महत्व? जानिए इससे मिलने वाले धार्मिक लाभ

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 22 Jul, 2026 04:34 PM
सावन में शिवलिंग पर काले तिल चढ़ाने का क्या है महत्व? जानिए इससे मिलने वाले धार्मिक लाभ

नारी डेस्क:  हिंदू धर्म में सावन (श्रावण) का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र और शुभ माना जाता है। पूरे वर्ष शिवभक्त इस महीने का इंतजार करते हैं, क्योंकि मान्यता है कि इस दौरान सच्चे मन से की गई शिव भक्ति का विशेष फल मिलता है। देवों के देव महादेव अपने भोले स्वभाव और शीघ्र प्रसन्न होने के कारण आशुतोष कहलाते हैं। ऐसा विश्वास है कि श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई पूजा से भगवान शिव अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं और जीवन की कठिनाइयों को दूर करने का आशीर्वाद देते हैं।

सावन के सोमवार का क्या है विशेष महत्व

सावन के सोमवार का व्रत भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि सोमवार का व्रत श्रावण मास से शुरू किया जाए तो इसका पुण्य कई गुना बढ़ जाता है।  इस दिन शिवलिंग पर जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक, बेलपत्र अर्पित करना और 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। कई महिलाएं अखंड सौभाग्य, सुखी वैवाहिक जीवन और संतान की मंगलकामना के लिए सावन के सोमवार का व्रत रखती हैं।

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शिव मंदिर में पूजा का क्यों बताया गया है विशेष महत्व

धर्मग्रंथों में बताया गया है कि भगवान शिव की पूजा घर में भी पूरी श्रद्धा के साथ की जा सकती है। हालांकि, तीर्थस्थलों, पवित्र नदियों के तट, गौशालाओं और विशेष रूप से शिव मंदिर में की गई पूजा का महत्व अधिक माना गया है। इसी वजह से सावन के प्रत्येक सोमवार को देशभर के शिवालयों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक और दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

सावन में शिवलिंग पर काले तिल चढ़ाने की क्या है मान्यता

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति की जन्मकुंडली में शनि या राहु की महादशा, अंतर्दशा या प्रतिकूल गोचर चल रहा हो, तो सावन के दौरान प्रतिदिन शिवलिंग पर काले तिल अर्पित करना शुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव की कृपा से ग्रहों के अशुभ प्रभाव कम हो सकते हैं और जीवन में आने वाली बाधाओं से राहत मिलने का मार्ग प्रशस्त होता है। हालांकि, यह धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यता है, जिसका आधार आस्था है।

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भगवान शिव की कृपा पाने के लिए क्या करें

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन के महीने में भगवान शिव की विशेष कृपा पाने के लिए कुछ सरल उपाय किए जा सकते हैं सावन के प्रत्येक सोमवार का व्रत रखें। प्रतिदिन शिवलिंग पर जल या दूध से अभिषेक करें। बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल और अन्य पूजन सामग्री श्रद्धापूर्वक अर्पित करें। 'ॐ नमः शिवाय' या महामृत्युंजय मंत्र का नियमित जाप करें। सात्विक भोजन करें और संयमित जीवनशैली अपनाएं। संभव हो तो सावन में रुद्राभिषेक कराएं, जिसे अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।

रुद्राभिषेक का धार्मिक महत्व

सावन के महीने में रुद्राभिषेक कराने की भी विशेष मान्यता है। माना जाता है कि रुद्राभिषेक से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्त के जीवन में सुख, शांति तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। कई श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति और परिवार की खुशहाली के लिए इस अनुष्ठान का आयोजन करवाते हैं।

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ज्योतिषीय दृष्टि से क्या माना जाता है

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति पर शनि या राहु का प्रतिकूल प्रभाव हो, तो सावन में शिव उपासना लाभकारी मानी जाती है। साथ ही योग्य ज्योतिषीय सलाह के अनुसार, जन्मकुंडली में शुभ फल देने वाले ग्रह से संबंधित रत्न धारण करना भी शुभ माना जाता है। हालांकि, किसी भी रत्न को धारण करने से पहले अनुभवी ज्योतिषी से परामर्श लेना आवश्यक माना जाता है।

श्रद्धा और संयम का पर्व है सावन

सावन केवल व्रत और पूजा का महीना नहीं, बल्कि आत्मसंयम, सात्विक जीवन और ईश्वर के प्रति समर्पण का भी प्रतीक माना जाता है। इस दौरान श्रद्धा और नियमों के साथ भगवान शिव की आराधना करने से मन को शांति मिलती है और भक्त आध्यात्मिक रूप से स्वयं को अधिक सशक्त महसूस करते हैं।

नोट: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है। विभिन्न परंपराओं और मान्यताओं में इसके अलग-अलग मत हो सकते हैं।
  
 
 

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