नारी डेस्क: पेट दर्द कई तरह की स्थितियों से जुड़ा हो सकता है, जैसे एसिडिटी और गैस से लेकर पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द तक। लेकिन जब दर्द की जगह बदलती है यानी पेट के एक हिस्से से शुरू होकर धीरे-धीरे दूसरे हिस्से में चली जाती है तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय इसकी जांच करवानी चाहिए। पेट के निचले दाहिने हिस्से की ओर बढ़ने वाला और नाभि के आसपास शुरू होने वाला तेज दर्द एक ऐसी स्थिति का संकेत हो सकता है, जिसमें अगर इलाज में देरी की जाए या डॉक्टर को न दिखाया जाए, तो गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं।
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क्यों जगह बदलता है दर्द
HT लाइफ़स्टाइल को दिए एक इंटरव्यू में डॉक्टर ने बतााय कि इस तरह के दर्द को अक्सर गैस का दर्द समझ लिया जाता है, जबकि असल में यह अपेंडिसाइटिस का संकेत हो सकता है। आमतौर पर, पेट का दर्द एक ही जगह पर रहता है, लेकिन इस मामले मे यह धीरे-धीरे अपनी जगह बदल सकता है। उनके अनुसार अपेंडिक्स बड़ी आंत से जुड़ी उंगली जैसी एक छोटी थैली होती है। जब अपेंडिक्स में रुकावट आती है, तो उसमें सूजन और इन्फेक्शन हो सकता है, जिससे अपेंडिसाइटिस की समस्या होती है।
हिलने-डुलने से भी बढ़ता है दर्द
डॉक्टर ने समझाया कि जांच के दौरान डॉक्टर दर्द की जगह में होने वाले इस बदलाव को ध्यान में रखते हैं। एक और ज़रूरी बात यह है कि हिलने-डुलने, खांसने, हंसने या ऊबड़-खाबड़ रास्ते पर सफ़र करने से दर्द बढ़ सकता है। शुरुआती चरण में, पेट के आस-पास सूजन होने पर दिमाग पूरे पेट में दर्द का संकेत देता है। जैसे-जैसे सूजन बढ़ती है और पेट के चारों ओर की झिल्ली तक पहुंचती है, बेचैनी बढ़ जाती है और दर्द पेट के निचले दाहिने हिस्से में केंद्रित हो जाता है, जहां अपेंडिक्स होता है।
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गैस और अपेंडिसाइटिस के दर्द में अंतर
गैस से जुड़ी समस्याओं के कारण भी पेट में दर्द हो सकता है, इसलिए दोनों के बीच फ़र्क समझना ज़रूरी है। डॉक्टर ने इस फ़र्क को आसान शब्दों में समझाया: गैस का दर्द गैस निकलने या मल त्यागने के बाद कम हो सकता है, जबकि अपेंडिसाइटिस का दर्द असल में अगले कुछ घंटों में और बढ़ जाता है। इससे बचने के लिए दर्द की जगह, दर्द या सूजन, बुखार और इससे जुड़े किसी भी लक्षण पर ध्यान से नज़र रखनी चाहिए। ब्लड टेस्ट से यह पता लगाने में मदद मिलती है कि संक्रमण है या नहीं। पेट की तकलीफ़ के अन्य कारणों को हटाने और अपेंडिक्स में सूजन की पुष्टि करने के लिए मुख्य रूप से अल्ट्रासाउंड या CT स्कैन का इस्तेमाल किया जाता है। सही बीमारी का पता लगाना ज़रूरी है क्योंकि किडनी की पथरी, यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन और गायनेकोलॉजिकल समस्याओं जैसी बीमारियों में भी ऐसे ही लक्षण हो सकते हैं।