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भारत में हर 5 में से 1 महिला को यह  PMOS, छोटी उम्र में ही नजर आ जाते हैं इसके लक्षण

  • Edited By vasudha,
  • Updated: 20 Jul, 2026 11:03 AM
भारत में हर 5 में से 1 महिला को यह  PMOS, छोटी उम्र में ही नजर आ जाते हैं इसके लक्षण

नारी डेस्क: 'द लैंसेट' के अनुसार दुनिया भर में हर आठ में से एक महिला Polyendocrine Metabolic Ovarian Syndrome (PMOS) से प्रभावित है। हालांकि भारत में यह समस्या कहीं ज़्यादा है हाल की स्टडीज़ से पता चलता है कि यहां हर पांच में से एक महिला को यह स्थिति हो सकती है। डॉक्टरों का कहना है कि 25 साल से कम उम्र की लगभग हर पांच में से एक महिला पर PMOS का कुछ न कुछ असर होता है, जबकि दुनिया भर में यह औसत लगभग 8-13 प्रतिशत है। इसकी एक वजह यह है कि भारत में पहले से ही डायबिटीज़ और इंसुलिन रेजिस्टेंस की दर बहुत ज़्यादा है। इसके साथ ही तेजी से हो रहा शहरीकरण, प्रोसेस्ड फ़ूड का आसानी से मिलना, सुस्त जीवनशैली और बढ़ता तनाव भी इसके कारण हैं।

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पीएमओएस क्या है?

पॉलीएंडोक्राइन मेटाबोलिक ओवेरियन सिंड्रोम (पीएमओएस) एक हार्मोनल और मेटाबोलिक विकार है जो अंडाशय, अंतःस्रावी तंत्र और समग्र चयापचय स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। पहले पीसीओएस शब्द का प्रयोग मुख्य रूप से अंडाशय में सिस्ट बनने पर केंद्रित था। हालांकि, डॉक्टरों ने पाया कि इस स्थिति से पीड़ित कई महिलाओं में वास्तव में सिस्ट विकसित नहीं होते हैं। इससे भ्रम की स्थिति पैदा हुई और अक्सर सही निदान में देरी हुई। नया शब्द "पीएमओएस" इस स्थिति के व्यापक स्वास्थ्य प्रभावों पर ध्यान केंद्रित करता है, जिनमें शामिल हैं: हार्मोनल असंतुलन, इंसुलिन प्रतिरोध, वजन बढ़ना, प्रजनन संबंधी समस्याएं, अनियमित मासिक धर्म चक्र, चयापचय संबंधी विकार, मधुमेह का बढ़ता जोखिम। 


अब महिलाएं हो रही हैं जागरुक

डॉक्टरों का कहना है कि बीमारी का पता चलने के मामलों में बढ़ोतरी की एक वजह यह भी है कि अब ज़्यादा महिलाएं माहवारी से जुड़ी समस्याओं के लिए मदद ले रही हैं। अब महिलाओं के लि गायनेकोलॉजिस्ट के पास जाना कोई शर्म की बात नहीं रही, लेकिन जागरूकता हर जगह एक जैसी नहीं है। ग्रामीण इलाकों में महिलाओं की बीमारी का पता अक्सर सालों तक नहीं चल पाता, जबकि किशोर लड़कियों के लिए मदद का पहला ज़रिया अक्सर उनकी मां ही होती हैं, जिन्हें खुद ही इस स्थिति के बारे में बहुत कम जानकारी होती है। भारत में महिलाओं का मेटाबोलिक प्रोफ़ाइल भी उन्हें ज़्यादा जोखिम में डालता है। परिवार में डायबिटीज़ और इंसुलिन रेजिस्टेंस की हिस्ट्री होने से PMOS का खतरा बढ़ जाता है। 

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PMOS के बढ़ते मामलों का कारण 

डॉक्टरों का  मानना ​​है कि कम उम्र में इस बीमारी का पता चलना कोई इत्तेफ़ाक नहीं है। आजकल के टीनएजर्स ज़्यादा समय स्क्रीन के सामने बिताते हैं, ज़्यादा अनहेल्दी खाना खाते हैं और अक्सर रेगुलर एक्सरसाइज़ नहीं करते। जिन लोगों में पहले से ही जेनेटिक झुकाव होता है, उनमें पीरियड्स शुरू होने के कुछ समय बाद ही लक्षण दिखने लगते हैं। इसके अलावा, 20 की उम्र वाली महिलाओं में स्मोकिंग आम है। इससे खून में फ्री टेस्टोस्टेरोन का लेवल बढ़ जाता है, जिससे मुंहासे, चेहरे पर ज़्यादा बाल और बाल झड़ने जैसी समस्याएं होती हैं। स्मोकिंग से फास्टिंग इंसुलिन लेवल बढ़ता है, जिससे इंसुलिन रेजिस्टेंस और खराब हो जाता है। इससे तेज़ी से वज़न बढ़ सकता है और टाइप 2 डायबिटीज़ का खतरा भी बढ़ सकता है। स्मोकिंग से शरीर में सूजन (inflammation) भी बढ़ती है और ओवेरियन रिज़र्व (आपके अंडों की संख्या और क्वालिटी) लगभग 20% तक कम हो जाती है।


PMOS के आम लक्षण जिन्हें महिलाओं को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए

PMOS के साथ सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक यह है कि इसके लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। PMOS के सबसे आम लक्षण:

अनियमित पीरियड्स: पीरियड्स का न आना, साइकिल में देरी होना या बहुत ज़्यादा ब्लीडिंग होना आम चेतावनी के संकेत हैं।

वज़न बढ़ना और वज़न कम करने में मुश्किल: PMOS से पीड़ित कई महिलाओं को आसानी से न घटने वाले वज़न (खासकर पेट के आसपास) की समस्या का सामना करना पड़ता है।

हार्मोनल मुंहासे (Acne): जबड़े की रेखा, ठुड्डी और गालों के आसपास लगातार मुंहासे होना हार्मोनल असंतुलन का संकेत हो सकता है।

चेहरे पर ज़्यादा बाल: एंड्रोजन का बढ़ा हुआ स्तर अक्सर चेहरे, छाती या शरीर पर बालों की ज़्यादा ग्रोथ का कारण बनता है।

बालों का पतला होना: सिर के बालों का झड़ना या पतला होना हार्मोनल बदलावों से जुड़ा एक और आम लक्षण है।

फर्टिलिटी (प्रजनन क्षमता) से जुड़ी समस्याएं: PMOS ओव्यूलेशन में बाधा डाल सकता है, जिससे कुछ महिलाओं के लिए गर्भवती होना मुश्किल हो जाता है।

थकान और मूड में बदलाव: महिलाएँ ये भी महसूस कर सकती हैं:

थकान,
बेचैनी (anxiety),
डिप्रेशन,
ब्रेन फॉग (सोचने-समझने में स्पष्टता की कमी),
और नींद की खराब गुणवत्ता।
 

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