नारी डेस्क: बॉलीवुड अभिनेत्री दीया मिर्जा ने हाल ही में महिलाओं की सेहत से जुड़े एक अहम विषय पेरिमेनोपॉज (Perimenopause) पर खुलकर बात की। एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने बताया कि वह इस दौर से गुजर रही हैं और इसकी वजह से उन्हें कई तरह की शारीरिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। 44 वर्षीय दीया ने कहा कि इस साल उनके लिए यह अनुभव काफी चुनौतीपूर्ण रहा है। उन्होंने बताया कि उन्हें हॉट फ्लैशेज की समस्या हो रही है, जिसमें अचानक तेज गर्मी महसूस होती है, पसीना आने लगता है और शरीर में असहजता महसूस होती है।
'अब समझ आता है कि दादी-नानी ऐसा क्यों कहती थीं'
दीया मिर्जा ने इंटरव्यू में यह भी कहा कि जब वह 39 साल की उम्र में मां बनीं, तब उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि कुछ वर्षों बाद शरीर में इतने बड़े बदलाव आने लगेंगे। उन्होंने कहा कि अब उन्हें समझ आता है कि पहले की पीढ़ियां महिलाओं से कम उम्र में परिवार शुरू करने की सलाह क्यों देती थीं। उनके मुताबिक, हर महिला को पेरिमेनोपॉज के बारे में जानकारी होनी चाहिए क्योंकि यह सिर्फ शरीर ही नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक रूप से भी काफी थका देने वाला दौर होता है।

क्या होता है पेरिमेनोपॉज
पेरिमेनोपॉज वह अवस्था होती है, जब महिला का शरीर धीरे-धीरे मेनोपॉज की ओर बढ़ने लगता है। इस दौरान शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन का स्तर लगातार बदलता रहता है, जिसकी वजह से कई तरह के बदलाव और लक्षण दिखाई देने लगते हैं। आमतौर पर यह अवस्था 40 से 45 वर्ष की उम्र के बीच शुरू होती है, हालांकि कुछ महिलाओं में यह 38 या 39 वर्ष की उम्र में भी शुरू हो सकती है। यह चरण कुछ महीनों से लेकर 4 से 8 साल तक रह सकता है। जब लगातार 12 महीने तक मासिक धर्म नहीं आता, तब माना जाता है कि महिला मेनोपॉज में प्रवेश कर चुकी है।
पेरिमेनोपॉज के सामान्य लक्षण
अनियमित पीरियड्स
इस दौरान मासिक धर्म का चक्र अनियमित हो सकता है। पीरियड्स कभी जल्दी आते हैं, कभी देर से और कई बार महीनों तक नहीं आते। ब्लीडिंग कम या ज्यादा भी हो सकती है।
हॉट फ्लैशेज और ज्यादा पसीना आना
पेरिमेनोपॉज का सबसे आम लक्षण हॉट फ्लैशेज माना जाता है। इसमें अचानक शरीर, खासकर चेहरा, गर्दन और छाती में तेज गर्मी महसूस होती है। कई महिलाओं को रात में ज्यादा पसीना आने की समस्या भी होती है।
नींद में परेशानी
हार्मोनल बदलाव के कारण रात में बार-बार नींद खुलना, अच्छी नींद न आना और बेचैनी महसूस होना आम बात है।
मूड स्विंग्स और चिड़चिड़ापन
इस चरण में कई महिलाओं को मूड जल्दी बदलने, तनाव, घबराहट और चिड़चिड़ापन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
वजन बढ़ना
हार्मोन में बदलाव और मेटाबॉलिज्म धीमा होने के कारण वजन बढ़ने लगता है। खासतौर पर पेट के आसपास चर्बी जमा होने की संभावना बढ़ जाती है।

लगातार थकान महसूस होना
शरीर में ऊर्जा की कमी, कमजोरी और बिना ज्यादा काम किए भी थकान महसूस होना पेरिमेनोपॉज के सामान्य लक्षणों में शामिल है।
पेरिमेनोपॉज के दौरान कैसे रखें खुद का ख्याल?
इस दौरान स्वस्थ जीवनशैली अपनाना काफी जरूरी माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार संतुलित और पौष्टिक आहार लें। कैल्शियम, विटामिन D और फाइबर से भरपूर चीजों को डाइट में शामिल करें। रोजाना वॉक, योग या हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करें। तनाव कम करने के लिए मेडिटेशन और गहरी सांस लेने जैसी तकनीकों का अभ्यास करें। पर्याप्त नींद लेने की कोशिश करें। अगर लक्षण बहुत ज्यादा परेशान कर रहे हों, तो बिना देर किए डॉक्टर से सलाह लें।
महिलाओं के लिए जरूरी है जागरूकता
दीया मिर्जा का मानना है कि पेरिमेनोपॉज पर खुलकर बात होना जरूरी है। आज भी कई महिलाएं इस अवस्था के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं रखतीं और शरीर में होने वाले बदलावों को सामान्य उम्र बढ़ने का हिस्सा मानकर नजरअंदाज कर देती हैं। सही जानकारी और समय पर विशेषज्ञ की सलाह इस दौर को काफी हद तक आसान बना सकती है।
नोट: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के लिए है। यदि आपको बताए गए लक्षण लगातार महसूस हो रहे हैं तो डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।