नारी डेस्क: डायबिटीज को अक्सर "साइलेंट डिजीज" (खामोश बीमारी) कहा जाता है क्योंकि यह बिना किसी साफ लक्षण के धीरे-धीरे पनप सकती है और समय के साथ शरीर के जरूरी अंगों को चुपचाप नुकसान पहुंचा सकती है। कई लोगों को तब तक इस बीमारी के बारे में पता नहीं चलता जब तक कि दिल, किडनी, आंखों या नसों से जुड़ी परेशानियां शुरू न हो जाएं। कई बीमारियों के लक्षण साफ तौर पर दिखाई देते हैं, लेकिन डायबिटीज कई सालों तक चुपचाप शरीर को नुकसान पहुंचाती रहती है।
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शुरुआती जांच जरूरी
HT लाइफ़स्टाइल को दिए एक इंटरव्यू में डॉक्टर ने बताया कि शुरुआती जांच क्यों जरूरी है। उन्होंने कहा- डायबिटीज को 'साइलेंट बीमारी' (चुपचाप पनपने वाली बीमारी) यूं ही नहीं कहा जाता। जब तक कई लोग डॉक्टर के पास जाते हैं, तब तक यह बीमारी दिल, किडनी, आंखों, नसों और रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा चुकी होती है। लोग सबसे आम गलती यह करते हैं कि वे नियमित हेल्थ स्क्रीनिंग के जरिए बीमारी का जल्दी पता लगाने के बजाय लक्षणों के दिखने का इंतजार करते हैं। शुरुआती लक्षण अक्सर बहुत हल्के होते हैं और उन पर आसानी से ध्यान नहीं जाता।
इन संकेतों पर रखें नजर
डॉक्टर ने बताया- "शुरुआती संकेत आमतौर पर हल्के होते हैं और आसानी से नजरअंदाज हो जाते हैं। लगातार थकान, बहुत ज़्यादा प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, धुंधला दिखना, चोट या घाव का धीरे-धीरे भरना, बार-बार इन्फेक्शन होना और बिना किसी साफ़ वजह के वजन में बदलाव जैसी चीज़ों को अक्सर तनाव, काम के लंबे घंटे, नींद की कमी या उम्र बढ़ने का नतीजा मान लिया जाता है। डॉक्टर ने जोर दिया कि प्री-डायबिटीज वह सही समय है जब डायबिटीज को होने से रोका जा सकता है या उसे कुछ समय के लिए टाला जा सकता है। आमतौर पर इसके कोई साफ़ लक्षण दिखाई नहीं देते, लेकिन हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाकर डायबिटीज को रोकने का यह सबसे अच्छा मौका होता है।"
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भारतीयों को ज़्यादा सावधान रहने की जरूरत
डॉक्टर ने बताया कि भारत में डायबिटीज एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है। भारत में डायबिटीज का बढ़ता बोझ इसकी जल्दी पहचान को पहले से कहीं ज़्यादा ज़रूरी बनाता है। HbA1c और फास्टिंग ब्लड शुगर जैसे शुरुआती संकेतों के आधार पर लगभग हर तीन में से एक व्यक्ति को डायबिटीज का खतरा है। डायबिटीज सिर्फ़ चीनी खाने से नहीं होती। यह मेटाबॉलिज़्म से जुड़ी एक ऐसी स्थिति है जिस पर जेनेटिक्स, खराब खान-पान की आदतें, शारीरिक गतिविधि की कमी, मोटापा, नींद की कमी और बहुत ज़्यादा तनाव का असर पड़ता है। HbA1c, फास्टिंग ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर और शरीर के वजन की नियमित जांच से किसी व्यक्ति की मेटाबॉलिक हेल्थ और भविष्य के जोखिम के बारे में साफ़ जानकारी मिलती है।
क्या डायबिटीज को रोका जा सकता है?
डायबिटीज शायद ही कभी रातों-रात होती है, इसलिए लोगों के पास इसे शुरू में ही रोकने का मौका होता है। डायबिटीज का पता चलने से बहुत पहले ही शरीर अक्सर हल्के चेतावनी संकेत देता है, लेकिन अक्सर लोग उन पर ध्यान नहीं देते। नियमित हेल्थ स्क्रीनिंग से इन शुरुआती बदलावों का पता लगाने में मदद मिलती है, जिससे लोग जीवनशैली में आसान बदलाव अपना सकते हैं। इन बदलावों से डायबिटीज की शुरुआत में देरी हो सकती है या इसे पूरी तरह रोका भी जा सकता है।"
नोट: किसी भी मेडिकल कंडीशन का खुद से इलाज करने की बजाय अपने डॉक्टर की सलाह लें।