नारी डेस्क : एक समय था जब डायबिटीज (शुगर) को बढ़ती उम्र की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। आजकल कम उम्र के बच्चे भी टाइप 2 डायबिटीज की चपेट में आ रहे हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसके पीछे सबसे बड़ी वजह बदलती लाइफस्टाइल, गलत खानपान और बढ़ता स्क्रीन टाइम है। ऐसे में माता-पिता की छोटी-छोटी लापरवाहियां भी बच्चों की सेहत पर भारी पड़ सकती हैं। डॉक्टर ने बताया कि अगर बचपन से ही बच्चों की लाइफस्टाइल पर ध्यान न दिया जाए, तो 10 साल की उम्र में भी टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है।
क्या 10 साल के बच्चे को डायबिटीज हो सकती है?
डॉक्टर के अनुसार, बच्चों में मुख्य रूप से दो तरह की डायबिटीज देखने को मिलती है।
टाइप 1 डायबिटीज: यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं पर हमला कर देती है। यह लाइफस्टाइल से सीधे जुड़ी नहीं होती।
टाइप 2 डायबिटीज: पहले यह बीमारी ज्यादातर वयस्कों में देखी जाती थी, लेकिन अब मोटापा, जंक फूड, शारीरिक गतिविधियों की कमी और लंबे स्क्रीन टाइम के कारण बच्चों में भी इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

बच्चों में डायबिटीज के शुरुआती लक्षण
अगर बच्चे में ये लक्षण लगातार दिखाई दें तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
बार-बार प्यास लगना और बार-बार पेशाब आना
अचानक वजन कम होना और बहुत ज्यादा भूख लगना
जल्दी थक जाना और धुंधला दिखाई देना
घाव का देर से भरना और बार-बार संक्रमण होना।
पेरेंट्स की कौन-सी गलतियां बढ़ा रही हैं खतरा?
बच्चों को जंक फूड की आदत लगाना
अगर बच्चे रोजाना चिप्स, बर्गर, पिज्जा, चॉकलेट, कैंडी और कोल्ड ड्रिंक जैसी हाई शुगर और हाई फैट वाली चीजें खाते हैं, तो उनका वजन तेजी से बढ़ सकता है। मोटापा टाइप 2 डायबिटीज का सबसे बड़ा जोखिम कारक माना जाता है।

स्क्रीन टाइम पर कंट्रोल न रखना
मोबाइल, टीवी और वीडियो गेम में घंटों बिताने से बच्चों की शारीरिक गतिविधियां कम हो जाती हैं। इससे कैलोरी बर्न नहीं होती, वजन बढ़ता है और इंसुलिन रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ सकता है।
नियमित हेल्थ चेकअप न कराना
अगर परिवार में डायबिटीज का इतिहास है या बच्चा अधिक वजन का है, तो समय-समय पर डॉक्टर की सलाह से ब्लड शुगर और अन्य जरूरी जांच कराना फायदेमंद हो सकता है।
नींद पूरी न होना
कम या अनियमित नींद लेने से शरीर के हार्मोन प्रभावित होते हैं। इससे भूख बढ़ सकती है, वजन बढ़ सकता है और लंबे समय में डायबिटीज का खतरा भी बढ़ सकता है।

बच्चों को डायबिटीज से बचाने के आसान उपाय
रोज कम से कम 60 मिनट तक आउटडोर खेल या फिजिकल एक्टिविटी कराएं।
जंक फूड और शुगर वाले ड्रिंक्स की जगह घर का पौष्टिक खाना दें।
स्क्रीन टाइम सीमित रखें।
बच्चे की उम्र के अनुसार पर्याप्त नींद सुनिश्चित करें।
बच्चे का वजन और हेल्थ नियमित रूप से मॉनिटर करें।
परिवार में डायबिटीज का इतिहास होने पर डॉक्टर की सलाह के अनुसार समय-समय पर जांच कराएं।
ध्यान रखें इन बातों पर
हर बच्चे में डायबिटीज होने की वजह एक जैसी नहीं होती। टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज के कारण अलग-अलग होते हैं। अगर बच्चे में बार-बार प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, अचानक वजन कम होना या लगातार थकान जैसे लक्षण दिखाई दें, तो बिना देर किए बाल रोग विशेषज्ञ या एंडोक्राइनोलॉजिस्ट से सलाह लें। समय पर पहचान और सही लाइफस्टाइल अपनाकर बच्चों में डायबिटीज के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।