नारी डेस्क : डायबिटीज सिर्फ ब्लड शुगर बढ़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि समय के साथ यह नसों को भी नुकसान पहुंचा सकती है। लंबे समय तक अनियंत्रित शुगर रहने पर डायबिटिक न्यूरोपैथी का खतरा बढ़ जाता है, जिससे पैरों और हाथों में झुनझुनी, सुन्नपन, जलन और घाव देर से भरने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अच्छी बात यह है कि सही देखभाल, ब्लड शुगर कंट्रोल और लाइफस्टाइल में बदलाव करके इस जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
डायबिटिक न्यूरोपैथी (Diabetic Neuropathy) क्या है?
डायबिटिक न्यूरोपैथी (Diabetic Neuropathy) डायबिटीज की एक आम जटिलता है, जिसमें लंबे समय तक हाई ब्लड शुगर रहने के कारण नसें और उन्हें पोषण देने वाली छोटी रक्त वाहिकाएं प्रभावित हो जाती हैं। इसका असर सबसे ज्यादा पैरों और हाथों की नसों पर देखने को मिलता है।

डायबिटीज में नसें क्यों डैमेज होती हैं?
जब लंबे समय तक ब्लड शुगर का स्तर सामान्य से अधिक रहता है, तो यह नसों और छोटी रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाने लगता है। इससे नसों तक ऑक्सीजन और पोषण सही मात्रा में नहीं पहुंच पाता, जिसके कारण उनकी कार्यक्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है।
नसें डैमेज होने के शुरुआती लक्षण
पैरों या हाथों में झुनझुनी या सुन्नपन
तलवों में जलन या चुभन
रात के समय पैरों में दर्द बढ़ना
गर्म या ठंडे तापमान का सही अहसास न होना
मांसपेशियों में कमजोरी
पैरों के घाव का देर से भरना।

नसों को डैमेज होने से बचाने के 5 असरदार तरीके
कभी भी नंगे पैर न चलें: घर हो या बाहर, नंगे पैर चलने से बचें। डायबिटीज में छोटी-सी चोट भी गंभीर घाव का रूप ले सकती है।
आरामदायक जूते पहनें: टाइट जूते, ऊंची हील या फिटिंग वाले फुटवियर से बचें। हमेशा ऐसे जूते चुनें जो पैरों पर दबाव न डालें।
बहुत गर्म पानी से बचें: अगर नसों की संवेदना कम हो गई है, तो गर्म पानी का तापमान महसूस नहीं हो सकता और पैर जल सकते हैं। पैर धोने से पहले पानी का तापमान हाथ या थर्मामीटर से जांच लें।
रोज पैरों की जांच करें: हर दिन अपने पैरों को ध्यान से देखें। कट, छाले, सूजन, लालपन या किसी भी तरह के घाव को नजरअंदाज न करें।
छोटे घाव को भी हल्के में न लें: अगर पैर में चोट या घाव हो जाए और वह जल्दी ठीक न हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। समय पर इलाज गंभीर संक्रमण और अन्य जटिलताओं से बचा सकता है।

डायबिटीज में नसों को स्वस्थ रखने के लिए ये भी करें
ब्लड शुगर को नियमित रूप से मॉनिटर करें।
डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं समय पर लें।
रोजाना 30 मिनट वॉक या हल्की एक्सरसाइज करें।
धूम्रपान और शराब से दूरी बनाएं।
संतुलित और फाइबर युक्त आहार लें।
HbA1c की नियमित जांच कराते रहें।
साल में कम से कम एक बार डायबिटिक फुट एग्जाम जरूर कराएं।
कब तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए?
अगर पैरों में लगातार सुन्नपन, तेज दर्द, घाव, पस, त्वचा का रंग बदलना, सूजन या चलने में दिक्कत हो रही है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। समय पर इलाज से गंभीर जटिलताओं और अंग कटने जैसी स्थिति से बचाव संभव है।