नारी डेस्क: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और बदलती जीवनशैली का असर सिर्फ दिल, डायबिटीज या मोटापे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव हड्डियों की सेहत पर भी पड़ रहा है। पहले जहां बढ़ती उम्र के साथ हड्डियां कमजोर होना सामान्य माना जाता था, वहीं अब कम उम्र के युवा भी बोन डेंसिटी कम होने, जोड़ों में दर्द और बार-बार फ्रैक्चर जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि हमारी रोजमर्रा की कुछ आदतें धीरे-धीरे हड्डियों को नुकसान पहुंचाती हैं। शुरुआत में इनके लक्षण नजर नहीं आते, लेकिन समय के साथ हड्डियां इतनी कमजोर हो सकती हैं कि मामूली चोट भी फ्रैक्चर का कारण बन जाती है।
आखिर क्यों कमजोर होने लगती हैं हड्डियां
हड्डियां शरीर का एक जीवित ऊतक (Living Tissue) होती हैं, जो लगातार टूटने और दोबारा बनने की प्रक्रिया से गुजरती रहती हैं। इस प्रक्रिया को सही तरीके से चलाने के लिए शरीर को पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम, विटामिन D और अन्य जरूरी पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। यदि शरीर को ये पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में नहीं मिलते या फिर जीवनशैली ऐसी हो जाती है जो हड्डियों के निर्माण में बाधा डालती है, तो धीरे-धीरे बोन डेंसिटी कम होने लगती है। यही वजह है कि समय के साथ हड्डियां कमजोर होकर फ्रैक्चर का जोखिम बढ़ा देती हैं।

कैल्शियम की कमी से घटने लगती है हड्डियों की मजबूती
कैल्शियम हड्डियों का सबसे महत्वपूर्ण निर्माण तत्व माना जाता है। शरीर में इसकी पर्याप्त मात्रा होने से हड्डियां मजबूत और स्वस्थ बनी रहती हैं। यदि लंबे समय तक कैल्शियम की कमी बनी रहे तो हड्डियों की मजबूती कम होने लगती है और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है। ऐसे में अपने खानपान में दूध, दही, पनीर, तिल, सोया, हरी पत्तेदार सब्जियां और अन्य कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थों को शामिल करना चाहिए। यदि जरूरत हो तो डॉक्टर की सलाह पर कैल्शियम सप्लीमेंट भी लिया जा सकता है।
विटामिन D की कमी से कैल्शियम का पूरा फायदा नहीं मिल पाता
सिर्फ कैल्शियम लेना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि शरीर में उसका सही अवशोषण भी जरूरी है। इस काम में विटामिन D अहम भूमिका निभाता है। अगर शरीर में विटामिन D की कमी है, तो पर्याप्त कैल्शियम लेने के बावजूद हड्डियां कमजोर हो सकती हैं। इसलिए रोजाना कुछ समय धूप में बैठना, विटामिन D से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन करना और आवश्यकता पड़ने पर डॉक्टर की सलाह के अनुसार सप्लीमेंट लेना फायदेमंद हो सकता है।
शारीरिक गतिविधि और एक्सरसाइज की कमी
आजकल बड़ी संख्या में लोग घंटों तक ऑफिस या घर में एक ही जगह बैठकर काम करते हैं। लंबे समय तक बैठे रहने और नियमित व्यायाम न करने का असर हड्डियों की मजबूती पर भी पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार, वॉकिंग, जॉगिंग, सीढ़ियां चढ़ना, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और वेट-बेयरिंग एक्सरसाइज हड्डियों को मजबूत बनाए रखने में मदद करती हैं। नियमित शारीरिक गतिविधि से बोन डेंसिटी बेहतर बनी रहती है और उम्र के साथ होने वाला नुकसान भी कम हो सकता है।
ज्यादा नमक और सॉफ्ट ड्रिंक का सेवन
जरूरत से ज्यादा नमक खाने की आदत शरीर से कैल्शियम की मात्रा को कम कर सकती है, जिससे हड्डियां धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं। इसके अलावा सॉफ्ट ड्रिंक और कार्बोनेटेड पेय पदार्थों का अधिक सेवन भी हड्डियों की सेहत के लिए नुकसानदायक माना जाता है। अगर आप अपनी हड्डियों को लंबे समय तक मजबूत रखना चाहते हैं, तो प्रोसेस्ड फूड, अधिक नमक और सॉफ्ट ड्रिंक का सेवन सीमित करना बेहतर विकल्प हो सकता है।

धूम्रपान और शराब की आदत बढ़ा सकती है फ्रैक्चर का खतरा
धूम्रपान और अत्यधिक शराब का सेवन न केवल फेफड़ों और हृदय के लिए हानिकारक है, बल्कि यह हड्डियों के निर्माण की प्राकृतिक प्रक्रिया को भी प्रभावित करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इन आदतों की वजह से बोन डेंसिटी कम हो सकती है और हड्डियां पहले की तुलना में अधिक कमजोर हो जाती हैं। इससे मामूली चोट लगने पर भी फ्रैक्चर होने का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा धूम्रपान और शराब कई गंभीर बीमारियों, विशेषकर कैंसर के जोखिम को भी बढ़ा सकते हैं।
हड्डियों को मजबूत रखने के लिए क्या करें
हड्डियों की अच्छी सेहत बनाए रखने के लिए संतुलित आहार लेना, पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम और विटामिन D का सेवन करना, रोजाना नियमित व्यायाम करना, धूप में कुछ समय बिताना और धूम्रपान व शराब जैसी आदतों से दूरी बनाना जरूरी है। साथ ही नमक और सॉफ्ट ड्रिंक का सीमित सेवन भी हड्डियों को लंबे समय तक स्वस्थ रखने में मदद कर सकता है।
डिस्क्लेमर - यह लेख सामान्य जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। कोई भी दवा या सप्लीमेंट शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह लें।