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'मुझे दूसरों को इंप्रेस करने की जरूरत नहीं',  अनुपम खेर बोले - शोहरत और पैसा नहीं आते काम

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 25 Aug, 2026 03:40 PM
'मुझे दूसरों को इंप्रेस करने की जरूरत नहीं',  अनुपम खेर बोले - शोहरत और पैसा नहीं आते काम

 नारी डेस्क:  अभिनेता अनुपम खेर ने अपने लंबे फिल्मी करियर में कई ऐसे किरदार निभाए हैं, जिन्हें आज भी याद किया जाता है। करीब चार दशक से ज्यादा समय से अभिनय की दुनिया में सक्रिय अनुपम खेर ने अब एक कलाकार की असली ताकत और अपने अब तक के सफर को लेकर खुलकर बात की है। हाल ही में उन्होंने इंस्टाग्राम पर अपने कुछ यादगार किरदारों की तस्वीरें साझा कीं। इन तस्वीरों के साथ अभिनेता ने बताया कि एक्टिंग सिर्फ कैमरे के सामने संवाद बोलने या किसी किरदार का हुलिया बदलने का नाम नहीं है। एक कलाकार को अपने भीतर छिपी भावनाओं को तलाशना पड़ता है और उन्हें पर्दे पर ईमानदारी से उतारना होता है।

एक्टर को अपनी छिपी भावनाओं को बाहर लाना पड़ता है

अनुपम खेर के मुताबिक, अभिनेता ऐसे लोग होते हैं जो उन भावनाओं को भी सामने लाने की हिम्मत रखते हैं, जिन्हें आम लोग अक्सर पूरी जिंदगी अपने अंदर दबाकर रखते हैं। उनके लिए एक कलाकार का संवेदनशील होना उसकी कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि एक अभिनेता को अपने अंदर गम, डर, जलन, प्यार, खुशी और असुरक्षा जैसी तमाम भावनाओं को तलाशना पड़ता है। इन्हीं भावनाओं के जरिए वह किसी किरदार को पर्दे पर असली और भरोसेमंद बना पाता है।

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'कभी-कभी टूटा हुआ दिल भी चाहिए होता है'

अनुपम खेर ने यह भी बताया कि एक्टिंग में सिर्फ हुनर ही काफी नहीं है। एक कलाकार को अपने अनुभवों और भावनाओं से भी गुजरना पड़ता है। उन्होंने कहा कि अभिनय करते समय कैमरा जब चेहरे के सामने आता है, तब शोहरत, पैसा या आराम किसी काम नहीं आता। उस पल सिर्फ कलाकार का हुनर और उसका दिल काम करता है। अनुपम खेर के मुताबिक, कई बार किसी किरदार की गहराई को समझने और उसे सही तरह से निभाने के लिए एक कलाकार के पास जिंदगी के कुछ कड़वे अनुभव भी होने चाहिए। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि कभी-कभी एक अभिनेता को 'टूटा हुआ दिल' भी चाहिए होता है।

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करियर की शुरुआत में खुद को साबित करने की थी जल्दी

अपने करियर के शुरुआती दिनों को याद करते हुए अनुपम खेर ने बताया कि उस समय उनके अंदर खुद को साबित करने की काफी जल्दी थी। वह मनोरंजन की दुनिया में बिना किसी फिल्मी गॉडफादर के आए थे और उनके पास नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा की ट्रेनिंग और अपना आत्मविश्वास था। उन्होंने बताया कि शुरुआती दौर में उनके मन में लगातार यही रहता था कि लोगों को दिखाना है कि वह क्या कर सकते हैं और बाकी कलाकारों से कितने अलग हैं। उस समय खुद को साबित करने की कोशिश उनके अभिनय के सफर का एक बड़ा हिस्सा थी।

अब किरदार की अनिश्चितता में आता है मजा

अनुपम खेर ने कहा कि उम्र और अनुभव के साथ उनके अंदर काफी बदलाव आया है। अब उन्हें हर किसी को प्रभावित करने या यह साबित करने की जरूरत महसूस नहीं होती कि वह कितना जानते हैं। आज वह किरदार की छोटी-छोटी बातों में ज्यादा दिलचस्पी लेने लगे हैं। किरदार की खामोशी, उसकी कमजोरियां, विरोधाभास और यहां तक कि उसकी बेवकूफियां भी उन्हें आकर्षित करती हैं। उनका कहना है कि अब वह खुद को पहले से ज्यादा चुनौती देते हैं, लेकिन इसके बावजूद पहले की तुलना में घबराहट काफी कम हो गई है।

उम्र बढ़ने के साथ एक्टिंग को लेकर बदली सोच

अनुपम खेर के मुताबिक, एक अभिनेता के तौर पर उम्र बढ़ने की सबसे अच्छी बात यह है कि इंसान धीरे-धीरे दूसरों को यह बताने की कोशिश छोड़ देता है कि उसे कितना कुछ आता है। अनुभव के साथ कलाकार खुद को साबित करने के बजाय किरदार को समझने और उसके साथ ईमानदारी बरतने पर ज्यादा ध्यान देने लगता है। उन्होंने अपने पोस्ट में अपने करियर के अलग-अलग किरदारों की तस्वीरें साझा करते हुए कहा कि उनके सफर का हर चेहरा उन्हें अभिनय और खुद के बारे में कुछ नया सिखाकर गया है।

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अनुपम खेर की यह बात उनके चार दशक से ज्यादा लंबे अभिनय सफर की एक अलग तस्वीर सामने रखती है। जिस मुकाम पर पहुंचने के बाद भी एक कलाकार खुद को सीखने और चुनौती देने के लिए तैयार रहे, शायद यही अभिनय के प्रति उसकी सबसे बड़ी ईमानदारी होती है।  

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