
विश्व भर में पूजनीय संत नीम करोली बाबा के जीवन पर आधारित बायोपिक 29 मई को सिनेमाघरों में रिलीज हो जाएगी। नीम करोली बाबा के जीवन, शिक्षाओं, सादगी और मानवतावादी संदेश से प्रेरित इस बहुप्रतीक्षित फिल्म ने, जब से इसकी घोषणा हुई है, तब से ही भक्तों और दर्शकों के बीच काफी उत्सुकता जगाई है। नीम करोली बाबा (महाराज जी) को कलयुग में हनुमान जी का अवतार माना जाता है। स्टीव जॉब्स और मार्क जुकरबर्ग जैसे दिग्गज भी उनके भक्त हैं।बाबा के जीवन से जुड़े कई ऐसे चमत्कार हैं, जिन्हें सुनकर लोग हैरान रह जाते हैं।

अचानक बुजुर्ग दंपति के घर पहुंचे बाबा
नीम करोली बाबा हमेशा ही कंबल ओढ़ा करते थे। रिचर्ड एलपर्ट (रामदास) ने अपनी किताब ‘मिरेकल ऑफ लव’ पर बुलेटप्रूफ कंबल से जुड़ी घटना का जिक्र किया है। किताब में बताया गया कि बाबा के कई भक्तों में एक बुजुर्ग दंपति भी थे, जोकि फतेहगढ़ में रहते थे। यह 1943 की बात है जब बाबा अचानक बुजुर्ग दंपति के घर पर पहुंच गए और उन्होंने कहा कि वह रात यहीं रुकेंगे। गरीब होने के कारण बुजुर्ग दंपति को यह चिंता सताने लगी कि बाबा की सत्कार और सेवा के लिए उनके पास कुछ नहीं है। दंपति के पास उस समय जो कुछ भी पर्याप्त था, उन्होंने बाबा को दिया और उनका सत्कार किया। भोजन के बाद उन्होंने बाबा को सोने के लिए एक चारपाई और ओढ़ने के लिए कंबल दिया जिस ओढ़कर बाबा सो गए।
कंबल को गंगा में प्रवाहित करने को दिया निर्देश
सोते वक्त बाबा ऐसे कराह रहे थे जैसे उन्हें कोई मार रहा है। दंपति सोचने लगे कि बाबा को आखिर क्या हो गया। जैसे-तैसे रात बीती और सुबह हुई तो बाबा ने कंबल लपेटकर बजुर्ग दंपति को दे दी और कहा कि इसे गंगा में प्रवाहित कर देना। इसके साथ ही उन्हें सख्त निर्देश दिए कि इसे खोलकर नहीं देखना वरना मुसीबत में फंस सकते हो। बाबा ने यह भी कहा कि, आप चिंता न करें आपका बेटा महीने भर के भीतर लौट आएगा। दंपति भी बाबा की कही बातों का पालन करते कंबल को गंगा में प्रवाहित करने के लिए चल दिए। कंबल बहुत भारी थी ऐसा लग रहा था जैसे इसके अंदर लोहा, लेकिन बाबा की बात मानते हुए बुजुर्ग दंपति ने इसे खोलकर नहीं देखा और इसे वैसे ही नदी में प्रवाहित कर दिया।

बुजुर्ग दंपति के बेटे की बचाई जान
बाबा के कहेनुसार एक महीने बाद बुजुर्ग दंपति का बेटा भी बर्मा फ्रंट से घर लौट आया। यह दंपति का इकलौता बेटा था, जोकि ब्रिटिश फौज में सैनिक था और दूसरे विश्वयुद्ध के समय बर्मा फ्रंट पर तैनात था। बेटे ने लौटकर अपने माता- पिता को बताय कि लगभग महीने भर पहले एक दिन वह दुश्मन फौजों के बीच घिर गया और रातभर गोलीबारी होती रही। इस युद्ध में उसके सारे साथी भी मारे गए लेकिन वह अकेला बच गया। उसपर खूब गोलीबारी हुई लेकिन एक भी गोली उसे नहीं लगी। यह वही रात थी जब बाबा उनके घर आए थे। बुजुर्ग दंपति समझ गए यह बाबा का चमत्कार है और उस कंबल में गोलियां थी जो उनके बेटे को छू भी नहीं पाई। यही कारण है कि अपनी किताब ‘मिरेकल ऑफ लव’ में रिचर्ड एलपर्ट ने इस कंबल को बुलेटप्रूफ कंबल कहा है
नोट: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है।