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Periods के रंग बताते हैं आपकी सेहत का हाल! 40 के बाद इन बदलावों को भूलकर भी न करें Ignore

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 16 May, 2026 05:13 PM
Periods के रंग बताते हैं आपकी सेहत का हाल! 40 के बाद इन बदलावों को भूलकर भी न करें Ignore

नारी डेस्क:  महिलाओं के शरीर में 40 की उम्र के बाद कई नेचुरल बदलाव शुरू होने लगते हैं और इसका असर सबसे ज्यादा पीरियड्स पर दिखाई देता है। कभी पीरियड्स जल्दी आना, कभी देर से होना, ब्लीडिंग कम या ज्यादा होना या फिर Periods का रंग बदलना ये सभी बदलाव कई महिलाओं को परेशान कर देते हैं। हालांकि हर बदलाव बीमारी का संकेत नहीं होता, लेकिन शरीर के कुछ संकेतों को समझना बेहद जरूरी हो जाता है। डॉक्टर्स के मुताबिक 40 के बाद शरीर धीरे-धीरे मेनोपॉज की ओर बढ़ने लगता है। इस दौरान हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिनकी वजह से पीरियड्स का पैटर्न और रंग दोनों बदल सकते हैं। अगर समय रहते इन संकेतों को समझ लिया जाए, तो कई गंभीर बीमारियों से बचाव संभव हो सकता है।

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40 के बाद क्यों बदलने लगते हैं पीरियड्स?

40 की उम्र के बाद महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन का स्तर धीरे-धीरे कम होने लगता है। इस स्थिति को पेरिमेनोपॉज कहा जाता है, यानी वह समय जब शरीर मेनोपॉज की तैयारी कर रहा होता है। इस दौरान ओव्यूलेशन नियमित नहीं रहता, जिसकी वजह से पीरियड्स का समय और फ्लो बदलने लगता है। कई बार पीरियड्स लंबे समय तक नहीं आते, तो कभी अचानक ज्यादा ब्लीडिंग होने लगती है।

पेरिमेनोपॉज में दिख सकते हैं ये बदलाव

इस दौर में महिलाओं को सिर्फ पीरियड्स में ही नहीं बल्कि शरीर और मूड में भी कई बदलाव महसूस हो सकते हैं। जैसे-

पीरियड्स साइकिल का छोटा या लंबा होना

एक या कई महीनों तक पीरियड्स न आना

ज्यादा ब्लीडिंग या ब्लड क्लॉट्स

कम ब्लीडिंग

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अचानक गर्मी लगना

रात में ज्यादा पसीना आना

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ये बदलाव आम हो सकते हैं, लेकिन अगर परेशानी लगातार बढ़ रही हो तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

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पीरियड्स का रंग क्या बताता है?

पीरियड्स के दौरान ब्लड का रंग भी शरीर की स्थिति के बारे में संकेत देता है। हर रंग का मतलब अलग हो सकता है।

ब्राइट रेड ब्लड

अगर पीरियड्स का रंग चमकदार लाल है, तो इसे सामान्य माना जाता है। यह ताजे रक्त के बहाव का संकेत होता है और आमतौर पर पीरियड्स के भारी दिनों में दिखाई देता है।

डार्क रेड या ब्राउन ब्लड

भूरे या गहरे लाल रंग का ब्लड पुराना रक्त होता है, जिसे बाहर निकलने में समय लगा हो। यह अक्सर पीरियड्स की शुरुआत या आखिरी दिनों में दिखता है और ज्यादातर मामलों में सामान्य माना जाता है।

पिंक कलर

हल्का गुलाबी रंग कम एस्ट्रोजन लेवल का संकेत हो सकता है। यह मेनोपॉज के आसपास की महिलाओं में ज्यादा देखा जाता है।

ऑरेंज कलर

अगर ब्लड ऑरेंज दिखाई दे और साथ में खुजली, जलन या बदबू भी हो, तो यह इन्फेक्शन का संकेत हो सकता है।

ग्रे कलर

ग्रे रंग का डिस्चार्ज सामान्य नहीं माना जाता। यह किसी गंभीर इन्फेक्शन की ओर इशारा कर सकता है, इसलिए तुरंत जांच करवानी चाहिए।

इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें

हालांकि पेरिमेनोपॉज के दौरान बदलाव सामान्य हो सकते हैं, लेकिन कुछ संकेत गंभीर बीमारियों की तरफ भी इशारा कर सकते हैं।

अगर आपको ये समस्याएं दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें

हर घंटे पैड पूरी तरह भीग जाना

7 दिनों से ज्यादा ब्लीडिंग होना

बहुत बड़े ब्लड क्लॉट्स आना

तेज पेल्विक पेन

रिलेशन के बाद ब्लीडिंग

कई महीनों तक पीरियड्स न आने के बाद अचानक रक्तस्राव

अत्यधिक कमजोरी या चक्कर आना

विशेषज्ञों के अनुसार, ये लक्षण फाइब्रॉएड, थायराइड, एंडोमेट्रियोसिस या कुछ मामलों में कैंसर जैसी गंभीर समस्याओं का संकेत भी हो सकते हैं।

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कैसे रखें खुद का ध्यान?

40 के बाद शरीर में होने वाले बदलावों को समझना और खुद की देखभाल करना बेहद जरूरी हो जाता है। आयरन से भरपूर चीजें खाएं, रोजाना हल्की एक्सरसाइज या योग करें। तनाव कम रखने की कोशिश करें। पर्याप्त पानी पिएं, पीरियड्स साइकिल ट्रैक करें। नियमित हेल्थ चेकअप करवाएं।

शरीर के संकेतों को समझना है जरूरी

मेनोपॉज महिलाओं के जीवन का एक सामान्य चरण है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर बदलाव को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर दिया जाए। शरीर समय-समय पर कई संकेत देता है और उन्हें समझना जरूरी होता है। अगर महिलाएं 40 के बाद अपने शरीर में होने वाले बदलावों पर ध्यान दें और समय पर जांच करवाएं, तो भविष्य में होने वाली कई गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है।   

 
 

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