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रोज-रोज की डांट बच्चों की सेहत पर डाल रही बुरा असर, रिसर्च में हुआ बड़ा खुलासा

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 12 May, 2026 10:40 AM
रोज-रोज की डांट बच्चों की सेहत पर डाल रही बुरा असर, रिसर्च में हुआ बड़ा खुलासा

 नारी डेस्क:  बच्चों को अनुशासन सिखाने के लिए माता-पिता अक्सर डांट-फटकार का सहारा लेते हैं, लेकिन यही आदत उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है। हाल ही में सामने आए एक अध्ययन में पता चला है कि लगातार डांटने और चिल्लाने से बच्चों के दिमाग और शरीर दोनों पर नकारात्मक असर पड़ता है। अमेरिका की Stanford University में किए गए अध्ययन के अनुसार, बार-बार डांट खाने वाले बच्चों के मस्तिष्क की बनावट तक प्रभावित हो सकती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि जब छोटे बच्चों पर लगातार चिल्लाया जाता है, तो उनका शरीर “फाइट या फ्लाइट” मोड में चला जाता है। यानी बच्चा हर समय डर और तनाव महसूस करने लगता है।

तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन का स्तर बढ़ता है

विशेषज्ञों के मुताबिक जब बच्चे लगातार डर या दबाव में रहते हैं, तो उनके शरीर में कोर्टिसोल जैसे तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। लंबे समय तक ऐसा होने पर उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ने लगती है। यही वजह है कि ऐसे बच्चे जल्दी-जल्दी बीमार पड़ सकते हैं। शोध में यह भी सामने आया कि लगातार डांट का असर बच्चों की मानसिक स्थिति पर गहराई से पड़ता है। वे अंदर ही अंदर डरने लगते हैं और उनका आत्मविश्वास कमजोर हो जाता है।

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याददाश्त और सीखने की क्षमता पर भी असर

अध्ययन के अनुसार ज्यादा डांट खाने वाले बच्चों के दिमाग का वह हिस्सा प्रभावित होता है, जो सीखने, समझने और याद रखने की क्षमता को नियंत्रित करता है। ऐसे बच्चों को पढ़ाई में ध्यान लगाने में परेशानी हो सकती है। कई बार वे भावनाओं को समझने और व्यक्त करने में भी कमजोर हो जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार तनाव में रहने वाले बच्चे अक्सर चिड़चिड़े, गुस्सैल या फिर बेहद शांत और सुस्त हो सकते हैं।

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MRI स्कैन में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य

शोधकर्ताओं ने उन बच्चों के दिमाग का MRI स्कैन किया, जिन्हें बचपन में ज्यादा डांट-फटकार या अपमान का सामना करना पड़ा था। जांच में पाया गया कि उनके दिमाग के कुछ हिस्से सामान्य बच्चों की तुलना में छोटे रह गए थे। यही हिस्से भावनाओं को नियंत्रित करने, याददाश्त और सीखने की क्षमता से जुड़े होते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक तनाव में रहने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता भी धीरे-धीरे कमजोर होने लगती है। इससे बच्चों को बार-बार बुखार, सिरदर्द, पाचन संबंधी दिक्कतें और थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

बच्चों को डांटने के बजाय अपनाएं ये तरीके

आवाज धीमी रखें, लेकिन बात स्पष्ट करें

माता-पिता को कोशिश करनी चाहिए कि वे गुस्से में चिल्लाने के बजाय शांत आवाज में बच्चे को समझाएं। इससे बच्चा डरेगा नहीं और बात को बेहतर तरीके से समझ पाएगा। बच्चे से बात करें डांटने की बजाय बच्चे से पूछें कि उसने ऐसा क्यों किया। बातचीत करने से बच्चा अपनी गलती समझने लगता है और उसका आत्मविश्वास भी बना रहता है। गुस्से में तुरंत प्रतिक्रिया देने से बचें अगर बहुत गुस्सा आ रहा हो तो उसी समय बच्चे पर चिल्लाने से बचना चाहिए। पहले खुद शांत हों, फिर बच्चे को प्यार से समझाएं। बच्चे को गलत नहीं, उसके व्यवहार को गलत कहें विशेषज्ञों के अनुसार बच्चे से यह कहना कि “तुम बुरे हो” उसकी भावनाओं को ठेस पहुंचा सकता है। इसकी बजाय यह कहना बेहतर है कि “तुम्हारा यह काम गलत था।” इससे बच्चा खुद को गलत महसूस नहीं करता और सुधार की संभावना बढ़ती है। 

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