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गलत दिन व्रत रखने से पड़ सकता है भारी असर! पुरुषोत्तमी एकादशी पर न करें ये गलती

  • Edited By Monika,
  • Updated: 26 May, 2026 02:40 PM
गलत दिन व्रत रखने से पड़ सकता है भारी असर! पुरुषोत्तमी एकादशी पर न करें ये गलती

नारी डेस्क : पुरुषोत्तमी एकादशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना गया है। इस दिन विधि-विधान से व्रत और पूजा करने पर भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। लेकिन शास्त्रों में यह भी बताया गया है कि गलत तिथि पर किया गया व्रत शुभ फल देने के बजाय नुकसानदायक भी हो सकता है, इसलिए सही नियमों का पालन बेहद जरूरी है।

पुरुषोत्तमी एकादशी का महत्व

पुरुषोत्तम मास में आने वाली एकादशी को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से पापों का नाश होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। इस वर्ष यह व्रत 27 मई 2026 को रखा जाएगा।

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क्यों खास है पुरुषोत्तम मास?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने मलमास को “पुरुषोत्तम मास” का नाम दिया था। इसी कारण इस महीने में किए गए दान, तप, यज्ञ और व्रत का फल कई गुना अधिक माना जाता है। इस अवधि में किए गए शुभ कार्य विशेष फल देने वाले माने जाते हैं। धार्मिक ग्रंथों में बताया गया है कि यदि दशमी तिथि का प्रभाव मध्यरात्रि तक रहता है, तो अगली एकादशी “वेधयुक्त” मानी जाती है। ऐसी स्थिति में उस दिन व्रत करने से बचने की सलाह दी जाती है और अगले दिन द्वादशी युक्त एकादशी को श्रेष्ठ माना जाता है।

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मध्यरात्रि वेध क्या होता है?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यदि दशमी तिथि रात 12 बजे के बाद तक रहती है, तो एकादशी तिथि वेधग्रस्त मानी जाती है। ऐसी स्थिति में अगले दिन व्रत रखना अधिक शुभ माना जाता है। इसलिए पंचांग देखकर ही व्रत का सही समय तय किया जाता है। एकादशी व्रत को मन और इंद्रियों पर नियंत्रण का प्रतीक माना जाता है। यह व्रत व्यक्ति को भक्ति, संयम और आत्मशुद्धि की ओर ले जाता है। मान्यता है कि श्रद्धा और नियम के साथ किया गया व्रत धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष, चारों फलों को देने वाला होता है।

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अगर कोई व्यक्ति पूर्ण उपवास नहीं कर सकता, तो वह फलाहार करके भी व्रत रख सकता है। धार्मिक दृष्टि से भावना और श्रद्धा को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है।
 

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