
नारी डेस्कः मौसम बदलने के साथ वायरल बीमारियों की दस्तक आम ही सुनने को मिलती है। फ्लू, सर्दी खांसी जुकाम और वायरल फीवर इससे कई लोग तेजी से चपेट में आते हैं क्योंकि ये इंफेक्शन एक से दूसरे व्यक्ति में तेजी से फैलती है। खासकर इसकी चपेट में बच्चे और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग रहते हैं। जिद्दी खांसी अगर लग जाए तो रात की नींद तक खराब कर देती है। बच्चे को जिद्दी खांसी से अगर आराम ना मिले तो कुछ घर के नुस्खे भी अपनाए जा सकते हैं लेकिन किसी एक्सपर्ट की निगरानी में। चलिए उन्हीं के बारे में आपको बताते हैं। बच्चे को जिद्दी खांसी (कफ या सूखी) से राहत दिलाने के लिए यहाँ कुछ सबसे असरदार और सुरक्षित देसी उपाय दिए गए हैं:
1. शहद और अदरकः (1 साल से बड़े बच्चों के लिए) अदरक और शहद का मिश्रण कफ को बाहर निकालने में मदद करता है। 1 चम्मच अदरक के रस को 1 चम्मच शुद्ध शहद के साथ मिलाएं और बच्चे को 2 से 3 बार चटाएं ऐसा करने से खांसी से आराम मिलेगा।
2. अजवाइन की पोटली और भापः बच्चे की छाती में जमा बलगम ढीला करने का काम करती है अजवाइन की भाप। गर्म पानी में अजवाइन और
और थोड़ा सा नीलगिरी का तेल डालकर बच्चे को 5 से 10 मिनट तक भाप दें। आप सूखी अजवाइन को तवे पर भूनकर मलमल के कपड़े में बांध लें और इससे बच्चे की छाती और पीठ पर हलके हाथों से सिकाई करें।
3. हल्दी वाला दूधः हल्दी में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो गले की खराश दूर करते हैं। रात को सोने से पहले 1 कप गुनगुने दूध में थोड़ी सी जरूरत अनुसार, एक दो चुटकी हल्दी मिलाकर बच्चे को पिलाएं।

4. तुलसी और शहद का रसः तुलसी खांसी के लिए एक रामबाण औषधि है। 4 से 5 पत्तों का रस निकालें और इसे शहद से मिलाकर बच्चे को दें। आप तुलसी वाली चाय बनाकर भी बच्चे को दे सकते हैं।
5. गुनगुने पानी के गरारेः (बड़े बच्चों के लिए) अगर बच्चा गरारे कर सकता है तो गुनगुने पानी में थोड़ा सा नमक डालकर गरारे करवाएं। यह गले की सूजन और जलन को कम करता है।
ध्यान देने वाली बात
एक साल से छोटे बच्चे को शहद ना दें। इससे बोटुलिज़्म (गंभीर फूड पॉइजनिंग) का खतरा होता है। बच्चे को लिक्विड ज्यादा दें। बच्चे को ज्यादा से ज्यादा गुनगुना पानी, सूप या तरल पदार्थ दें ताकि बलगम आसानी से पिघल सके। रात में सोने से पहले कमरे की हवा को नम रखने के लिए आप ह्यूमिडिफायर का उपयोग कर सकते हैं।
डॉक्टर की सलाह कब लें
अगर बच्चे को खांसी 5 दिनों से अधिक समय तक बनी रहे और सांस लेने में घरघराहट की आवाज भी आए और साथ में 100 डिग्री से अधिक बुखार हो तो बाल बाल रोग विशेषज्ञ (pediatrician) से संपर्क करें।