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Liver Infection होने पर सबसे पहले Skin देती चेतावनी, ये लक्षण सामने आते

  • Edited By Vandana,
  • Updated: 19 May, 2026 06:58 PM
Liver Infection होने पर सबसे पहले Skin देती चेतावनी, ये लक्षण सामने आते

नारी डेस्कः लिवर हमारे शरीर का एक बहुत ही महत्वपूर्ण अंग है जो शरीर से विषैले पदार्थ (toxins) बाहर निकालने, खून को साफ रखने और पाचन क्रिया को संतुलित करने का काम करता है। एक बार लिवर में दिक्कत आनी शुरू हो जाए तो पाचन तंत्र और शरीर का सारा बेलेंस बिगड़ जाता है। जब लिवर ही सही तरीके से काम नहीं करता तो उसका असर सबसे पहले त्वचा पर दिखाई देने लगता है। कई बार त्वचा पर होने वाले बदलाव गंभीर लिवर रोगों के शुरुआती संकेत हो सकते हैं, जिन्हें लोग सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। 

लिवर खराब होने पर त्वचा और आंखों का पीला पड़ना यानी पीलिया (Jaundice) सबसे आम संकेत माना जाता है। इसके अलावा बिना किसी दाने या रैश के शरीर में तेज खुजली होना, खासकर रात के समय, लिवर में पित्त लवण जमा होने का संकेत हो सकता है। त्वचा पर मकड़ी के जाले जैसी लाल नसें दिखाई देना, हथेलियों का असामान्य रूप से लाल होना और चेहरे या गर्दन की त्वचा का काला पड़ना भी लिवर की गड़बड़ी से जुड़ा हो सकता है। चलिए इसे थोड़ा विस्तार से बताते हैं।
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पीलिया (Jaundice)

लिवर खराब होने का सबसे सामान्य और शुरुआती संकेत पीलिया होता है। इसमें त्वचा, आंखों के सफेद हिस्से और नाखून पीले दिखाई देने लगते हैं। यह स्थिति तब होती है जब शरीर में बिलीरुबिन नामक पदार्थ की मात्रा बढ़ जाती है और लिवर उसे सही तरीके से बाहर नहीं निकाल पाता। पीलिया के साथ कमजोरी, भूख कम लगना और थकान जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।

बिना रैशेज के खुजली होना

यदि शरीर में बिना किसी दाने या एलर्जी के लगातार खुजली हो रही है, खासकर रात के समय, तो यह लिवर की समस्या का संकेत हो सकता है। ऐसा पित्त लवण (Bile Salts) के शरीर में जमा होने से होता है। कई लोगों को हाथों और पैरों में अधिक खुजली महसूस होती है, जो धीरे-धीरे पूरे शरीर में फैल सकती है।
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मकड़ी जैसी नसें (Spider Angiomas)

त्वचा पर लाल रंग के छोटे-छोटे धब्बे या मकड़ी के जाले जैसी नसें दिखाई देना भी लिवर खराब होने का संकेत माना जाता है। ये अधिकतर चेहरे, गर्दन, छाती और हाथों पर दिखाई देते हैं। इनके बीच में लाल बिंदु होता है, जहां से पतली नसें बाहर की ओर फैली रहती हैं। यह शरीर में हार्मोनल बदलाव और लिवर की कमजोरी के कारण होता है।

आसानी से चोट लगना या नील पड़ना

स्वस्थ लिवर शरीर में खून जमाने वाले प्रोटीन बनाता है। जब लिवर सही तरीके से काम नहीं करता, तो शरीर में क्लॉटिंग प्रोटीन की कमी होने लगती है। इसके कारण हल्की चोट या दबाव से भी त्वचा पर नीले-काले निशान पड़ जाते हैं। कई बार बिना चोट के भी शरीर पर ब्रूज़ दिखाई देने लगते हैं।

त्वचा का काला पड़ना (Hyperpigmentation)

लिवर की गड़बड़ी के कारण शरीर में हार्मोन असंतुलित होने लगते हैं, जिससे चेहरे, गर्दन, बगल या शरीर के अन्य हिस्सों की त्वचा का रंग गहरा हो सकता है। यह काला या भूरा रंग धीरे-धीरे बढ़ सकता है। कई लोग इसे सामान्य धूप या स्किन प्रॉब्लम समझ लेते हैं, लेकिन यह लिवर रोग का संकेत भी हो सकता है।

हथेलियों का लाल होना (Liver Palms)

लिवर खराब होने पर हथेलियों के किनारों और उंगलियों के पास लालिमा दिखाई देने लगती है। इसे “लिवर पाम्स” कहा जाता है। कई बार यह लालपन जलन या गर्माहट के साथ भी महसूस हो सकता है। यह स्थिति शरीर में रक्त प्रवाह और हार्मोनल बदलाव के कारण होती है।

आंखों के नीचे पीले धब्बे (Xanthomas)

आंखों के आसपास या पलकों पर पीले रंग की छोटी गांठें या धब्बे बनना शरीर में फैट और कोलेस्ट्रॉल के असंतुलन का संकेत हो सकता है। यह समस्या कई बार लिवर रोगों से जुड़ी होती है, क्योंकि लिवर शरीर में फैट को नियंत्रित करने का काम करता है।

त्वचा का सूखापन और रूखापन

लिवर की कमजोरी के कारण त्वचा अपनी प्राकृतिक नमी खोने लगती है। इससे त्वचा सूखी, बेजान और खुरदरी दिखाई देने लगती है। कई लोगों में त्वचा फटने या जलन की समस्या भी देखने को मिलती है।

सूजन और पानी भरना

गंभीर लिवर रोगों में शरीर, पैरों और पेट में सूजन आने लगती है। त्वचा खिंची हुई और चमकदार दिखाई दे सकती है। यह शरीर में तरल पदार्थ जमा होने के कारण होता है और सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है।

ध्यान देने योग्य महत्वपूर्ण बात

उम्र बढ़ने या धूप में ज्यादा रहने से होने वाले सामान्य “लिवर स्पॉट” अक्सर हानिरहित होते हैं, लेकिन यदि ऊपर बताए गए अन्य लक्षण लगातार दिखाई दें, तो उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ये फैटी लिवर, हेपेटाइटिस, लिवर इंफेक्शन या सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारियों के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। ऐसे में तुरंत डॉक्टर या गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से संपर्क करके LFT, अल्ट्रासाउंड और अन्य जरूरी जांच करवानी चाहिए, ताकि बीमारी का समय रहते इलाज हो सके।


 

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