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मलमास की पहली एकादशी कब है? और क्यों है इतनी खास?

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 20 May, 2026 01:50 PM
मलमास की पहली एकादशी कब है? और क्यों है इतनी खास?

नारी डेस्क:  अधिक मास या मलमास में आने वाली एकादशी को धार्मिक दृष्टि से बेहद खास माना जाता है। इस अवधि में पड़ने वाली एकादशी को Padmani (Kamla) Ekadashi कहा जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि के साथ आर्थिक स्थिति भी मजबूत होती है। धार्मिक ग्रंथों में इस एकादशी को बहुत ही दुर्लभ और फलदायी बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि जो भी श्रद्धा के साथ इस व्रत को करता है, उसके जीवन में धीरे-धीरे सकारात्मक बदलाव आने लगते हैं।

कमला एकादशी 2026 की तारीख और शुभ समय

पंचांग के अनुसार, अधिक मास में आने वाली कमला एकादशी की तिथि की शुरुआत 27 मई 2026 को सुबह 6 बजकर 22 मिनट पर होगी। यह तिथि अगले दिन 28 मई 2026 को सुबह 7 बजकर 22 मिनट तक रहेगी। उदय तिथि के अनुसार व्रत 27 मई 2026 को ही रखा जाएगा। इसी दिन भक्त पूरे नियम और श्रद्धा के साथ उपवास रखकर भगवान विष्णु की पूजा करेंगे।

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पद्म पुराण में क्या बताया गया है इस एकादशी का महत्व?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पद्म पुराण में इस एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है। कहा जाता है कि इस व्रत को करने वाले स्त्री और पुरुष दोनों को कई गुना पुण्य की प्राप्ति होती है। मान्यता यह भी है कि इस व्रत से न केवल आध्यात्मिक लाभ मिलता है, बल्कि जीवन में धन और समृद्धि भी बढ़ती है। भगवान विष्णु की आराधना इस दिन विशेष फलदायी मानी जाती है।

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जप और पूजा का महत्व और भी बढ़ जाता है

शास्त्रों में बताया गया है कि इस दिन भगवान विष्णु के मंत्रों का जप करने से अत्यधिक पुण्य प्राप्त होता है। ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पूजा करना विशेष रूप से शुभ माना गया है। घर में जप करने से सामान्य फल मिलता है, जबकि नदी तट या गौशाला में जप करने से इसका फल कई गुना बढ़ जाता है। तीर्थ स्थान या तुलसी के पास जप करने का महत्व और भी अधिक बताया गया है। वहीं मंदिर में भगवान विष्णु के सामने जप करने से अनंत फल की प्राप्ति होती है।

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कमला एकादशी की पूजा विधि

इस दिन भक्त सुबह जल्दी उठकर भगवान विष्णु का ध्यान करते हैं और स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं। इसके बाद व्रत का संकल्प लेकर पूजा की तैयारी की जाती है। पूजा के लिए घर के मंदिर में एक चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित की जाती है। फिर दीपक और धूप जलाकर फल और मिठाई का भोग लगाया जाता है। इसके बाद भगवान विष्णु के मंत्रों का जप किया जाता है और एकादशी व्रत कथा का पाठ किया जाता है। अंत में आरती कर प्रसाद सभी में वितरित किया जाता है।

श्रद्धा और नियम से मिलता है व्रत का पूर्ण फल

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को पूरी श्रद्धा और नियम के साथ करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है। यह एकादशी न केवल आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग मानी जाती है, बल्कि जीवन में स्थिरता और समृद्धि लाने वाली भी कही गई है।
 

 

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