नारी डेस्क : “बेटी पराया धन होती है…” “अब उसी घर से तुम्हारी अर्थी उठनी चाहिए…” भारतीय समाज में विदाई के समय कही जाने वाली ये बातें कई बार एक बेटी के मन में ऐसा दबाव बना देती हैं कि वह शादी के बाद अपने दुख, तकलीफ और उत्पीड़न तक को छिपाने लगती है। माता-पिता भी अक्सर यह मान लेते हैं कि कन्यादान के साथ उनकी जिम्मेदारी खत्म हो गई। लेकिन सच यह है कि शादी के बाद बेटी को सबसे ज्यादा जरूरत अपने माता-पिता के भरोसे और साथ की होती है।

आज भी भारत में महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा, मानसिक प्रताड़ना और दहेज उत्पीड़न के मामले चिंता का विषय बने हुए हैं। ऐसे में माता-पिता का यह फर्ज बनता है कि वे शादी के बाद भी अपनी बेटी के लिए खड़े रहें। अगर समय रहते कुछ संकेत पहचान लिए जाएं, तो बेटी को बड़े मानसिक और शारीरिक संकट से बचाया जा सकता है। शादी के बाद दिखने वाले इन 4 ‘रेड फ्लैग्स’ को कभी नजरअंदाज न करें।
व्यवहार में अचानक बदलाव और खामोशी
अगर आपकी बेटी पहले खुलकर बातें करती थी, हंसमुख थी, लेकिन शादी के बाद अचानक चुप-चुप रहने लगी है, फोन पर बहुत संभलकर बात करती है या हर सवाल पर सिर्फ “सब ठीक है” कहकर बात खत्म कर देती है, तो यह सामान्य नहीं है। कई बार मानसिक दबाव में रहने वाली लड़कियां मायके आने से भी कतराने लगती हैं। यह संकेत हो सकता है कि वह अंदर ही अंदर किसी परेशानी से जूझ रही है।
हर बात के लिए खुद को दोष देना
लगातार मानसिक प्रताड़ना या गैसलाइटिंग का असर सबसे पहले लड़की के आत्मविश्वास पर पड़ता है। अगर आपकी बेटी हर छोटी बात के लिए खुद को दोषी ठहराने लगे, अपनी पसंद-नापसंद को दबाने लगे या बार-बार खुद को “गलत” साबित करने लगे, तो यह एक बड़ा चेतावनी संकेत है। ऐसी स्थिति में उसे डांटने या समझाने के बजाय प्यार और धैर्य से सुनना जरूरी है।

आर्थिक पर पाबंदियां लगाना
अगर बेटी की नौकरी छुड़वा दी गई हो, उसके खर्चों पर सख्त निगरानी रखी जा रही हो या उसे पैसों के लिए हर छोटी जरूरत पर दूसरों पर निर्भर रहना पड़ रहा हो, तो यह कंट्रोलिंग व्यवहार का संकेत हो सकता है। आर्थिक रूप से कमजोर बनाना कई बार घरेलू हिंसा की शुरुआत माना जाता है। आर्थिक स्वतंत्रता छीन लेना किसी भी महिला के आत्मसम्मान पर गहरी चोट करता है।
मायके से दूरी बनाने की कोशिश
अगर आपकी बेटी पहले की तरह खुलकर बात नहीं कर पा रही, हर फोन कॉल के दौरान कोई उसके आसपास मौजूद रहता है या उसे मायके वालों से कम संपर्क रखने के लिए कहा जाता है, तो यह बेहद गंभीर संकेत हो सकता है। शोषण करने वाले लोग अक्सर सबसे पहले लड़की को उसके सपोर्ट सिस्टम यानी उसके माता-पिता और करीबी लोगों से अलग करने की कोशिश करते हैं।
ऐसे समय में माता-पिता क्या करें?
बेटी को भरोसा दें, उसे हमेशा यह महसूस कराएं कि उसका मायका आज भी उसका अपना घर है। उसे यह कहने में कभी हिचकिचाएं नहीं: “तुम्हारी खुशी और सम्मान हमारे लिए सबसे ज्यादा जरूरी है। अगर कभी तुम्हें लगे कि तुम अकेली हो, तो हमारा घर और हमारा साथ हमेशा तुम्हारे लिए खुला है।

जज करने के बजाय सुनें
अक्सर लड़कियां इसलिए चुप रहती हैं क्योंकि उन्हें डर होता है कि लोग क्या कहेंगे या माता-पिता उन्हें “समझौता करो” कह देंगे। जब बेटी अपनी परेशानी बताए, तो तुरंत सलाह देने या दोष निकालने के बजाय पहले उसकी बात शांत मन से सुनें।
कानूनी और हेल्पलाइन की जानकारी रखें
अगर मामला गंभीर हो, तो मदद लेने में बिल्कुल देर न करें।
राष्ट्रीय महिला हेल्पलाइन: 181
आपातकालीन सहायता नंबर: 112