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पेशाब में खून आना हो सकता है Kidney Cancer का शुरुआती संकेत, कभी न करें नजरअंदाज

  • Edited By Monika,
  • Updated: 28 Jun, 2026 11:17 AM
पेशाब में खून आना हो सकता है Kidney Cancer का शुरुआती संकेत, कभी न करें नजरअंदाज

नारी डेस्क :  पेशाब में खून आना (हेमेच्यूरिया) एक ऐसा लक्षण है, जिसे अक्सर लोग मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह किडनी कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का शुरुआती संकेत भी हो सकता है। समय पर जांच, सही डायग्नोसिस और उचित इलाज से इस बीमारी को शुरुआती स्टेज में ही पकड़ा जा सकता है और गंभीर जोखिम से बचा जा सकता है।

साइलेंट बीमारी है किडनी कैंसर

किडनी कैंसर को अक्सर 'साइलेंट डिजीज' कहा जाता है, क्योंकि यह कई महीनों या वर्षों तक बिना किसी स्पष्ट लक्षण के शरीर में बढ़ता रहता है। कई बार मरीज को यह पता ही नहीं चलता कि उसकी किडनी में ट्यूमर विकसित हो रहा है। जब तक इसके लक्षण स्पष्ट रूप से सामने आते हैं, तब तक बीमारी एडवांस स्टेज में पहुंच चुकी होती है, जिससे इलाज मुश्किल हो सकता है। इसी वजह से डॉक्टर शरीर में होने वाले छोटे-छोटे बदलावों को भी नजरअंदाज न करने की सलाह देते हैं।

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पेशाब में खून आना क्यों है चिंता का विषय?

किडनी कैंसर के शुरुआती और महत्वपूर्ण लक्षणों में से एक है पेशाब में खून आना, जिसे मेडिकल भाषा में हेमेच्यूरिया (Hematuria) कहा जाता है। हालांकि, हर बार पेशाब में खून आने का मतलब कैंसर नहीं होता, लेकिन इसे कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। कई बार खून आना खुद-ब-खुद बंद हो जाता है या इसके साथ दर्द भी नहीं होता, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि समस्या खत्म हो गई है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से जांच करवाना बेहद जरूरी है।

बिना दर्द के भी हो सकता है कैंसर का संकेत

ज्यादातर लोगों को लगता है कि यदि पेशाब में खून के साथ दर्द नहीं है तो चिंता की कोई बात नहीं है। जबकि हकीकत यह है कि किडनी कैंसर में अक्सर बिना दर्द के ही ब्लीडिंग होती है। कुछ मामलों में पेशाब का रंग गुलाबी, लाल या गहरा भूरा दिखाई देने लगता है। वहीं, कई बार खून की मात्रा इतनी कम होती है कि यह केवल रूटीन यूरिन टेस्ट के दौरान ही पता चलती है। इसे माइक्रोस्कोपिक हेमेच्यूरिया कहा जाता है।

किन लोगों में अधिक होता है किडनी कैंसर का खतरा?

कुछ लोगों में किडनी कैंसर होने का जोखिम दूसरों की तुलना में ज्यादा होता है। इनमें शामिल हैं
50 वर्ष से अधिक उम्र के लोग
धूम्रपान करने वाले लोग
मोटापे से पीड़ित व्यक्ति
हाई ब्लड प्रेशर के मरीज
परिवार में किडनी कैंसर का इतिहास रखने वाले लोग
लंबे समय से किडनी की बीमारी से जूझ रहे मरीज
यदि इन लोगों को एक बार भी पेशाब में खून दिखाई दे, तो उन्हें तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

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पेशाब में खून आने के अन्य कारण

हर बार पेशाब में खून आना किडनी कैंसर का संकेत नहीं होता। इसके पीछे कई अन्य कारण भी हो सकते हैं।
 जैसे- यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI)
किडनी स्टोन
ब्लैडर इंफेक्शन
प्रोस्टेट संबंधी समस्याएं
कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट
हालांकि, इसका सही कारण केवल मेडिकल जांच के बाद ही पता चल सकता है।

कैसे की जाती है जांच?

यदि किसी व्यक्ति को पेशाब में खून आने की शिकायत होती है, तो डॉक्टर सबसे पहले यूरिन टेस्ट करवाते हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि पेशाब में खून की मात्रा कितनी है और उसके पीछे क्या कारण हो सकता है। इसके बाद जरूरत पड़ने पर ब्लड टेस्ट, अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन (CT Scan), एमआरआई (MRI) और अन्य इमेजिंग टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है। इन जांचों की मदद से डॉक्टर यह पता लगाते हैं कि ब्लीडिंग किसी संक्रमण, किडनी स्टोन या किडनी कैंसर जैसी किसी गंभीर बीमारी की वजह से तो नहीं हो रही है। समय पर जांच कराने से बीमारी का शुरुआती चरण में पता लगाया जा सकता है, जिससे इलाज आसान और अधिक प्रभावी हो जाता है।

समय पर पहचान से संभव है इलाज

विशेषज्ञों के अनुसार, अगर किडनी कैंसर शुरुआती स्टेज में पकड़ में आ जाए, तो इसका सफलतापूर्वक इलाज किया जा सकता है। लेकिन अधिकतर मरीज तब डॉक्टर के पास पहुंचते हैं, जब बीमारी काफी बढ़ चुकी होती है। इसलिए यदि आपको एक बार भी बिना किसी स्पष्ट कारण के पेशाब में खून दिखाई दे, तो इसे नजरअंदाज करने की गलती न करें।

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इन लक्षणों को भी न करें नजरअंदाज

पेशाब में खून आने के साथ यदि ये लक्षण भी दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें
लगातार कमर या पीठ में दर्द
बिना कारण वजन कम होना
लगातार थकान महसूस होना
भूख कम लगना
बार-बार बुखार आना।

पेशाब में खून आना एक सामान्य समस्या नहीं है। यह कई बार किसी गंभीर बीमारी, खासकर किडनी कैंसर, का शुरुआती संकेत हो सकता है। इसलिए डरने की बजाय समय पर जांच करवाना और डॉक्टर की सलाह लेना सबसे बेहतर कदम है। शुरुआती पहचान न केवल इलाज को आसान बनाती है, बल्कि मरीज की जान बचाने में भी अहम भूमिका निभाती है।

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