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गणगौर पर्व की अनोखी परंपरा, जहां पत्नियों के हाथों डंडे से मार खाते हैं पति

  • Edited By Monika,
  • Updated: 13 Mar, 2026 06:15 PM
गणगौर पर्व की अनोखी परंपरा, जहां पत्नियों के हाथों डंडे से मार खाते हैं पति

नारी डेस्क : भारत में हर त्योहार की अपनी अलग परंपरा और मान्यता होती है। ऐसा ही एक अनोखा और दिलचस्प रिवाज गणगौर पर्व से जुड़ा हुआ है, जहां एक तरफ पत्नियां अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं, वहीं दूसरी ओर एक खास रस्म में उन्हें डंडे से मारती भी हैं। यह परंपरा मध्य प्रदेश के कुछ आदिवासी इलाकों में आज भी निभाई जाती है।

कब मनाया जाएगा गणगौर पर्व 2026

गणगौर पर्व की शुरुआत होली के अगले दिन से ही हो जाती है और यह उत्सव करीब 16 दिनों तक चलता है। इस साल गणगौर पूजा शनिवार, 21 मार्च 2026 को मनाई जाएगी। गणगौर शब्द 'गण' (भगवान शिव) और 'गौर' (माता पार्वती) से मिलकर बना है। यह पर्व पति-पत्नी के प्रेम, समर्पण और सुखी वैवाहिक जीवन का प्रतीक माना जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं, जबकि कुंवारी कन्याएं अच्छे जीवनसाथी की कामना से पूजा करती हैं।

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गणगौर पूजा का शुभ मुहूर्त

उत्तम मुहूर्त: सुबह 07:17 से 09:26 बजे
लाभ मुहूर्त: दोपहर 02:00 से 03:31 बजे
अमृत मुहूर्त: दोपहर 03:31 से शाम 05:02 बजे
लाभ मुहूर्त: शाम 06:33 से रात 08:02 बजे।

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मध्य प्रदेश में निभाई जाती है अनोखी रस्म

गणगौर पूजा देश के कई राज्यों में मनाई जाती है, लेकिन मध्य प्रदेश के देवास जिले के बागली क्षेत्र में इससे जुड़ी एक अनोखी परंपरा देखने को मिलती है। यहां विवाहित महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए पूजा करती हैं, लेकिन इसी दौरान एक खास रस्म भी निभाई जाती है।

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पति को डंडे से पीटती हैं पत्नियां

इस परंपरा में “गुड़ तोड़ने की रस्म” निभाई जाती है। इसके लिए एक ऊंची लकड़ी के सिरे पर नारियल या गुड़ की पोटली बांधी जाती है। पुरुषों की टोली को इस पोटली को हासिल करना होता है। वहीं महिलाएं उन्हें ऐसा करने से रोकती हैं और इमली की लकड़ी से पुरुषों को मारती हैं। पुरुष अपने बचाव के लिए ढाल का इस्तेमाल करते हैं। यह खेलनुमा प्रक्रिया सात बार दोहराई जाती है और इसमें कई बार पुरुषों को हल्की चोट भी लग जाती है।

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क्या है इस परंपरा के पीछे की मान्यता

स्थानीय लोगों का मानना है कि इस रस्म में लगी चोट माता गणगौर का आशीर्वाद मानी जाती है। पुरुष इसे बुरा नहीं मानते, बल्कि इसे शुभ समझते हैं।
इसके पीछे यह भी मान्यता है कि पूरे साल पति घर में पत्नी पर हुकुम चलाता है या गुस्सा करता है। इसलिए साल में एक दिन ऐसा भी होता है जब पत्नियां प्रतीकात्मक रूप से पति को मारकर सालभर की नाराजगी दूर कर देती हैं और फिर दोनों के रिश्ते में प्यार और सामंजस्य बना रहता है।
 

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