23 APRTHURSDAY2026 12:50:16 PM
Nari

पुश्तैनी संपत्ति में बेटियों को बराबरी का हक: सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 23 Apr, 2026 11:14 AM
पुश्तैनी संपत्ति में बेटियों को बराबरी का हक: सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

नारी डेस्क: भारत के Supreme Court of India ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि बेटियां अब पुश्तैनी संपत्ति में बेटों के बराबर अधिकार रखती हैं। यह फैसला सिर्फ एक कानूनी व्याख्या नहीं, बल्कि सामाजिक सोच में बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे यह संदेश भी जाता है कि संपत्ति के अधिकार लिंग के आधार पर तय नहीं किए जा सकते।

परिवारों में संपत्ति विवाद बनते हैं बड़ी समस्या

भारतीय परिवारों में पुश्तैनी संपत्ति को लेकर विवाद कोई नई बात नहीं है। अक्सर यह देखा गया है कि संपत्ति बंटवारे को लेकर रिश्तों में तनाव पैदा हो जाता है। कई बार ये मामले इतने बढ़ जाते हैं कि परिवार के सदस्य एक-दूसरे के खिलाफ अदालत तक पहुंच जाते हैं। ऐसी स्थिति में रिश्तों में कड़वाहट बढ़ती है और वर्षों तक चलने वाले कानूनी विवाद परिवार को भावनात्मक और आर्थिक दोनों तरह से प्रभावित करते हैं।

वसीयत और बंटवारे को लेकर बढ़ते मामले

कई मामलों में पिता अपनी इच्छा से पूरी संपत्ति किसी एक वारिस के नाम कर देते हैं या वसीयत के जरिए बंटवारा तय कर देते हैं। कुछ परिस्थितियों में यह निर्णय सभी बच्चों को समान हिस्सेदारी देकर भी किया जाता है, लेकिन कई बार किसी एक बेटे को प्राथमिकता मिल जाती है। ऐसे फैसलों के बाद अन्य भाई-बहन या परिवार के सदस्य अपने अधिकारों को लेकर सवाल उठाते हैं और मामला कानूनी लड़ाई में बदल जाता है।

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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कानूनी नजरिया क्या कहता है

कानून के अनुसार, यदि संपत्ति वसीयत के माध्यम से सही तरीके से किसी एक व्यक्ति के नाम की गई है, तो वह वैध मानी जा सकती है। हालांकि, यदि इसमें किसी तरह की अनियमितता, दबाव या अधिकारों के उल्लंघन का संदेह होता है, तो अन्य वारिस इसे अदालत में चुनौती दे सकते हैं। यही वजह है कि ऐसे मामलों में Supreme Court of India के निर्णय बेहद महत्वपूर्ण हो जाते हैं, क्योंकि वे न केवल कानूनी स्थिति स्पष्ट करते हैं, बल्कि आगे के मामलों के लिए दिशा भी तय करते हैं।

इस फैसले को एक बड़े बदलाव की तरह देखा जा रहा है। अब बेटियों को भी बेटों के बराबर हक मिलना उनके अधिकार की पुष्टि करता है। यह दिखाता है कि आज की न्याय व्यवस्था में सभी के लिए बराबरी और इंसाफ को सबसे ज्यादा महत्व दिया जा रहा है।
  

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