
नारी डेस्क: पहलगाम आतंकी हमले को एक साल बीत चुका है। ठीक एक साल पहले पहलगाम की खूबसूरती देखने आए 26 लोगों की बीना किसी गलती के खौफनाक सजा दी गई। इन 26 लोगों को आतंकियों ने अपनी गोली का शिकार बनाया था, परिवार वालों के सामने पीड़ितों पर गोलियां चला दी गई। इस हादसे में किसी ने अपना सुहाग खो दिया तो किसी के सिर से पिता का साया उठ गया। भले ही इस घटना को साल हो गया हो लेकिन इससे जुड़ी कड़वी यादें लाख कोशिश के बाद भी भुलाई नही जा सकती। जब पहलगाम घाटी में आंतकी लोगों की जान के दुश्मन बन रहे थे तो वहीं कुछ फरिश्ते ऐसे भी थे जिन्होंने सबसे बड़े संकट के समय मदद का हाथ बढ़ाया था। चलिए जानते हैं उन बहादुरों के बारे में जिन्होंने कई लोगों की जिंदगी गचाई।

सैयद आदिल हुसैन शाह ने दे दी कुर्बानी
जब आतंकी हमले के पीड़ितों की प्रारंभिक सूची सार्वजनिक की गई, तो सैयद आदिल हुसैन शाह का नाम ही स्थानीय लोगों में से एक था। जब कौस्तुभ गनबोटे और संतोष जगदाले नामक दो पीड़ितों के परिवार हथियारबंद आतंकवादियों के सामने खड़े थे, तो 30 वर्षीय खच्चर वाला शाह ने उनसे पूछा कि वे निर्दोष लोगों को क्यों मार रहे हैं। पर्यटकों की रक्षा करने के साहसी प्रयास में, शाह ने हथियार छीनने की कोशिश की। आतंकियों ने शाह की छाती में तीन गोलियां मारीं, जिससे उनकी मौत हो गयी।
कैब चालक और खच्चर वालों ने नहीं छोड़ा साथ
पुणे से पहलगाम गईं असावरी ने हमले के बाद बताया था- ‘‘मैंने हिम्मत जुटाई और अपनी मां और अन्य रिश्तेदार के साथ भागने में कामयाब रही। नीचे उतरते समय मेरी मां के पैर में चोट लग गई। एक खच्चर वाले ने हमें सहारा दिया और उम्मीद जगाई। वह हमें खच्चर पर बैठाकर हमारे चालक के पास तक ले गया।'' उन्होंने बताया कि उनके कैब चालक और खच्चर वाला ‘‘ईश्वर के भेजे गए फरिश्तों की तरह थे जो हमले के समय उनके साथ खड़े रहे। खच्चर वाले ने हमारा साथ नहीं छोड़ा, वह हमारे साथ था। उसने मेरी मां, एक रिश्तेदार और मुझे मौके से बचाया।''

नजाकत अहमद पूरे परिवार के लिए बना फरिश्ता
सैयद आदिल हुसैन शाह के चचेरे भाई नजाकत अहमद शाह भी घटनास्थल पर मौजूद थे और उन्होंने तीन बच्चों सहित 11 पर्यटकों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। नजाकत (28) चार जोड़ों और तीन बच्चों को कश्मीर यात्रा के अंतिम चरण में बैसरन ले गए थे। समूह के उस स्थान से निकलने से ठीक पहले, गोलियों की आवाज सुनकर नजाकत सचेत हो गए और वह दो बच्चों के साथ जमीन पर लेट गये। नजाकत ने बताया- ‘‘मेरी पहली चिंता पर्यटक परिवारों की सुरक्षा थी। मैंने दोनों बच्चों को लिया और जमीन पर लेट गया। मैंने एक छोटा सा रास्ता देखा और परिवारों से उस रास्ते से बाहर निकलने को कहा। मैं दोनों बच्चों को लेकर उस रास्ते से निकल गया और पहलगाम शहर की ओर भागा।'' बच्चों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के बाद वह वापस मौके पर पहुंचे और बाकी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला।

बच्चे को लेकर भागा था गाइड
इसी तरह टूरिस्ट गाइड साजद अहमद भट ने भी पर्यटकों को बचाने के लिए अपनी जान की परवाह नहीं की थी। एक बच्चे को अपनी पीठ पर लेकर पहाड़ से नीचे उतरते हुए उनके वीडियो काफी प्रसारित हुए थे और पूरे देश ने इस बहादुर और मददगार व्यक्ति की खूब तारीफ की थी। भट ने कहा था- ‘‘मानवता सबसे ऊपर है... आतंकी हमला मानवता की हत्या है।''