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पोलो खेलने की शौकीन, बेलबॉटम पैंट पहनने वाली रानी, जिसे कहा जाता था “Beauty with Brain”

  • Edited By Vandana,
  • Updated: 02 May, 2026 05:18 PM
पोलो खेलने की शौकीन, बेलबॉटम पैंट पहनने वाली रानी, जिसे कहा जाता था “Beauty with Brain”

नारी डेस्क: जयपुर की महारानी गायत्री देवी, लोग उन्हें जयपुर की राजमाता भी कहते थे। अपनी मां इंदिरा देवी की तरह वह भी जितनी खूबसूरत थी उतनी ही फैशनेबल भी। फैशन के चर्चे भारत ही नहीं बल्कि यूरोप और यूएस तक होते थे। राज माता अपनी रॉयल अट्रेक्टिव ड्रेसिंग सेंस और ज्वैलरी सिलेक्शन के लिए फेमस थी। उनके पास एक से बढ़ एक रॉयल नेकपीस थे। उनकी साड़ियां और ज्वैलरी खासतौर पर यूरोप से मंगवाई जाती थीं। इस वजह से उनकी तुलना उस समय की अमेरिका की फर्स्ट लेडी Jacqueline Kennedy से भी की जाती थी।

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 शिकार और पोलो खेलने का शौंक रखती थी

शाही परिवार की राजकुमारी का पालन-पोषण शाही तरीके से हुआ था, हर समय 500 से ज्यादा नौकर उनके आगे-पीछे काम करते थे। फैशन के साथ-साथ लग्जरी कार, शिकार और पोलो खेलने  का भी शौंक रखती थी। बेल बॉटम और फ्रेंच शिफॉन साड़ियों का फैशन भी वो ही लाई थी। शादी से पहले वो बेल बॉटम स्टाइल पैंट शर्ट पहना करती थी और शादी के बाद फ्रेंच शिफॉन साड़ी, रानी की खास पहचान बन गई।

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साड़ी की थी अच्छी खासी कलैक्शन 

शिफॉन के अलावा भी रानी गायत्री देवी के पास साड़ी की अच्छी खासी कलैक्शन थी। पेस्टल, क्रीम और व्हाइट साड़ी पर फ्लोरल, लहरिया और बांदिनी प्रिंट होता था। साथ में उन्हें जरी वर्क, गोटा पट्टी और इम्बॉइडरी वर्क काफी अच्छा लगता था। साड़ी के साथ यूनिक नेकलेस पहन वह अपने रॉयल लुक को कंप्लीट करती थी। नवरत्न नेकलेस उनका फेवरेट था, जो उनके पति महाराजा सवई मानसिंह ने गिफ्ट किया था। इस नेकलेस की गिनती आज भी महंगे ज्वैलरी पीसेस में होती हैं क्योंकि इसमें रुबी, पन्ना, सफायर, मोती, हीरे और गार्नेट्स जड़े हुए थे।


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गायत्री देवी का फैशन इंटरनेशनल लेवल पर इतना फेमस था कि उसे पेरिस के लग्जरी ब्रांड Chanel ने भी अपने inspiration board में शामिल किया गया था। फेमस डिजाइनर सब्यसाची मुखर्जी का एक पूरा साड़ी और ज्वैलरी कलेक्शन ही गायत्री देवी के फैशन से इंस्पायर्ड है।गायत्री देवी की सोच भी काफी मॉडर्न थी। अपने पति सवाई मान सिंह की पहली 2 पत्नियों की तरह गायत्री देवी पर्दे में नहीं रही। वह पर्दा सिस्टम के खिलाफ थी। शादी के बाद कुछ समय तक उन्होंने अपने पति के साथ कोई इवेंट अटेंड नहीं किया क्योंकि वह पर्दे में नहीं रहना चाहती थी। 

फिर उन्होंने गर्ल्स स्कूल की स्थापना की और राजपूत लड़कियों को सिखाया कि पर्दा करना सही नहीं।

  

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