
नारी डेस्क: हिंदू धर्म में मां बगलामुखी का स्थान दस महाविद्याओं में अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। इन्हें शक्ति की ऐसी स्वरूपा कहा जाता है, जो शत्रु बाधाओं को रोकने और नष्ट करने की क्षमता रखती हैं। तंत्र साधना में मां को “स्तंभन शक्ति” की देवी माना गया है। हर साल वैशाख शुक्ल अष्टमी के दिन बगलामुखी जयंती मनाई जाती है। वर्ष 2026 में यह पर्व 24 अप्रैल को श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाएगा।
मां बगलामुखी: शक्ति और तंत्र साधना की अधिष्ठात्री देवी
मां बगलामुखी को पीतांबरा और ब्रह्मास्त्र विद्या की देवी भी कहा जाता है। मान्यता है कि उनकी आराधना से जीवन में आने वाली बाधाएं शांत होती हैं और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। यही कारण है कि साधक और भक्त विशेष रूप से इस दिन व्रत, पूजा और तांत्रिक अनुष्ठान करते हैं।
नलखेड़ा बगलामुखी मंदिर: महाभारत काल से जुड़ी आस्था
मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले में स्थित नलखेड़ा का बगलामुखी मंदिर अपनी प्राचीनता के लिए प्रसिद्ध है। मान्यता है कि इस मंदिर की स्थापना महाभारत काल में पांडवों ने भगवान श्रीकृष्ण के निर्देश पर की थी। लसुंदर नदी के किनारे स्थित इस मंदिर में मां की स्वयंभू प्रतिमा विराजमान है। यहां पूजा में पीले रंग की सामग्री का विशेष महत्व होता है और इसे अत्यंत शुभ माना जाता है।
दतिया का पीतांबरा पीठ: सत्ता और आस्था का केंद्र
मध्य प्रदेश के दतिया में स्थित पीतांबरा पीठ को मां बगलामुखी की सबसे प्रमुख शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। इसे अक्सर “सत्ता की देवी” के रूप में भी पूजा जाता है। वर्ष 1935 में स्थापित यह स्थान आज भी राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों की आस्था का बड़ा केंद्र है। यहां मां बगलामुखी के साथ-साथ धूमावती देवी के दर्शन का भी विशेष महत्व है। लोग यहां अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए दूर-दूर से आते हैं।
हिमाचल का कांगड़ा मंदिर: संकटों से मुक्ति का स्थान
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित बगलामुखी मंदिर अपनी चमत्कारी मान्यताओं के लिए जाना जाता है। कहा जाता है कि यहां विशेष साधना करने से कोर्ट-कचहरी और कानूनी विवादों में सफलता मिलती है। भक्त यहां दीये जलाकर और विशेष अनुष्ठान करके मां की कृपा प्राप्त करने की प्रार्थना करते हैं। यह स्थान संकटों से मुक्ति का प्रतीक माना जाता है।
पीले रंग का महत्व और जयंती की परंपरा
मां बगलामुखी को पीतांबरा कहा जाता है क्योंकि उन्हें पीला रंग अत्यंत प्रिय है। उनकी पूजा में पीले वस्त्र, पीले फूल, हल्दी और बेसन से बने प्रसाद का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि बगलामुखी जयंती के दिन पीले वस्त्र या वस्तुओं का दान करने से जीवन की परेशानियां कम होती हैं और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।
बगलामुखी जयंती केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आस्था, शक्ति और विश्वास का प्रतीक है, जो भक्तों को आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।