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गर्मी में चक्कर और थकावट से बेहाल हो गया हैं बच्चा? तो समझो उसे हो गया Heat Stroke

  • Edited By vasudha,
  • Updated: 20 Apr, 2026 04:08 PM
गर्मी में चक्कर और थकावट से बेहाल हो गया हैं बच्चा? तो समझो उसे हो गया Heat Stroke

नारी डेस्क: गर्मी के मौसम में यह जानना ज़रूरी है कि बच्चों को सुरक्षित कैसे रखा जाए। हर साल जून के आखिर और जुलाई की शुरुआत में हीट स्ट्रोक के मामले तेज़ी से बढ़ते हैं और अगस्त तक जारी रहते हैं, इसकी चपेट में सबसे ज्यादा बच्चे ही आते हैं।  ऐसे में आज हम आपको बच्चों में दिखने वाले हीट एग्जॉस्टशन और हीट स्ट्रोक के लक्षणों के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्हें पहचान कर माता- पिता अपने बच्चे का ख्याल रख सकते हैं। 

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बच्चों में हीट एग्जॉस्टशन के लक्षण

हीट स्ट्रोक के लक्षण दिखने से पहले, बच्चों में अक्सर गर्मी से होने वाली हल्की बीमारियों जैसे कि ऐंठन और हीट एग्जॉस्टशन के लक्षण दिखाई देते हैं। ऐसा अक्सर तब होता है जब बच्चा गर्मी में व्यायाम या खेल रहा होता है और पसीने से अत्यधिक तरल पदार्थ और नमक निकलने के कारण डिहाइड्रेटेड हो जाता है।

बच्चों में हीट एग्जॉस्टशन के लक्षणों में शामिल हो सकते हैं:

-शरीर का तापमान बढ़ना, आमतौर पर 100˚ से 104˚ फ़ारेनहाइट के बीच

-गर्मी के बावजूद ठंडी, चिपचिपी त्वचा

-रोंगटे खड़े होना

-बेहोशी, चक्कर आना या कमज़ोरी

-सिरदर्द, ज़्यादा पसीना आना

-ज़्यादा प्यास लगना

-चिड़चिड़ापन

-मांसपेशियों में ऐंठन

-जी मिचलाना और/या उल्टी होना


इस तरह रखें बच्चे का ख्याल

बच्चों को हीट एग्ज़ॉशन (गर्मी से होने वाली थकावट) का ज़्यादा खतरा हो सकता है अगर वे ज़्यादा वज़न वाले या मोटे हों, कुछ खास दवाएं ले रहे हों, धूप से झुलस गए हों (सनबर्न) या  बीमार हों। अगर आपके बच्चे में हीट एग्ज़ॉशन के लक्षण दिखें, तो उसे किसी ठंडी, छायादार जगह पर ले जाएं। उसे नमक वाले ठंडे तरल पदार्थ (जैसे स्पोर्ट्स ड्रिंक्स) पीने के लिए कहें। त्वचा पर ठंडा, गीला तौलिया या स्पंज लगाएं। अगर आपका बच्चा पैरों, हाथों या पेट में मांसपेशियों में दर्दनाक ऐंठन की शिकायत करे, तो धीरे से मांसपेशियों को स्ट्रेच करें या मालिश करें। अगर आपका बच्चा कुछ पी नहीं पा रहा है या उसकी होश-हवास कम होती दिख रही है, तो अपने डॉक्टर को बुलाएँ या तुरंत मेडिकल मदद लें।
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बच्चों में हीट स्ट्रोक के लक्षण

हीट स्ट्रोक गर्मी से होने वाली एक गंभीर बीमारी है। यह तब होती है जब बच्चे का शरीर जितनी गर्मी बाहर निकाल सकता है, उससे ज़्यादा गर्मी पैदा करता है। इसका नतीजा यह होता है कि शरीर का अंदरूनी तापमान तेज़ी से बढ़ जाता है। अगर तुरंत इलाज न किया जाए, तो इससे दिमाग को नुकसान पहुँच सकता है या मौत भी हो सकती है।

बच्चों में हीट स्ट्रोक के लक्षणों में ये शामिल हो सकते हैं:

-शरीर का तापमान खतरनाक हद तक बढ़ जाना – 104˚ फ़ारेनहाइट से ऊपर

-पसीना न आना

-उलझन, दिशा का ज्ञान न रहना

-त्वचा का लाल, गर्म और सूखा होना (त्वचा गीली भी हो सकती है)

-बेहोशी, जी मिचलाना, उल्टी, दस्त

-दिल की धड़कन और सांस का तेज़ होना

-तेज़ सिरदर्द, दौरे पड़ना

-कमज़ोरी और/या चक्कर आना

 

हीट स्ट्रोक से बचाने का तरीका

हीट स्ट्रोक एक मेडिकल इमरजेंसी है। अगर आपका बच्चा बाहर या किसी भी गर्म माहौल में रहा है और उसमें हीट स्ट्रोक के लक्षण दिख रहे हैं, तो तुरंत इमरजेंसी मेडिकल इलाज लें। जितनी जल्दी हो सके, अपने बच्चे को घर के अंदर या छाया में ले जाएं और उसके कपड़े उतार दें।उसे ठंडे पानी से भरे बाथटब में लिटाकर तेज़ी से ठंडा करना शुरू करें। अगर बाथटब उपलब्ध न हो, तो शरीर के ज़्यादातर हिस्सों पर ठंडे तौलिए रखें और उन्हें बार-बार बदलते रहें। जब तक आपका बच्चा होश में और सचेत न हो, तब तक उसे ज़बरदस्ती कोई तरल पदार्थ न पिलाएं।

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