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बच्चे के पैर में रहता है हमेशा दर्द तो ये है खतरे की घंटी, इसे बिल्कुल ना करें इग्नोर

  • Edited By vasudha,
  • Updated: 05 May, 2026 04:39 PM
बच्चे के पैर में रहता है हमेशा दर्द तो ये है खतरे की घंटी, इसे बिल्कुल ना करें इग्नोर

नारी डेस्क: क्या आपका बच्चा पैर में दर्द की शिकायत करता है? स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी है कि इसे "बढ़ने के दर्द" (growing up pain) के तौर पर नजरअंदाज न करें, बल्कि इसे भविष्य में हड्डियों या घुटनों से जुड़ी बीमारियों का संकेत मानें।  छोटे बच्चों को घुटनों से जुड़ी कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं, जैसे कि जेनु डिस्कोइड मेनिस्कस (घुटने में मेनिस्कस का असामान्य आकार), लिगामेंट फटना, जुवेनाइल रूमेटॉइड आर्थराइटिस और मोटापे से जुड़ा घुटने का दर्द। हालांकि बच्चों में घुटनों से जुड़ी बीमारियां और आर्थराइटिस बहुत आम नहीं हैं, लेकिन जुवेनाइल रूमेटॉइड आर्थराइटिस (JVA) बच्चों को कम उम्र में ही अपनी चपेट में ले सकता है और शरीर के कई जोड़ों को प्रभावित कर सकता है।


बच्चों के दर्द को ना करें नजरअंदाज


कभी-कभी 3 साल से ज़्यादा उम्र के बच्चों के पैरों में जो दर्द और टीस महसूस होती है, खासकर रात में उसे आमतौर पर 'बढ़ने का दर्द' (growing up pain) माना जाता है। हालांकि, इसे ज़्यादा समय तक नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, क्योंकि इससे बच्चे को बाद में ऑस्टियोआर्थराइटिस होने का खतरा है। डॉक्टर कहते हैं कि  'जुवेनाइल आर्थराइटिस' में छोटे बच्चों के जोड़ों पर 'रूमेटॉइड आर्थराइटिस' का असर पड़ता है - यह एक ऐसी स्थिति है जिससे जोड़ों में सूजन और दर्द होता है इस बीमारी का कोई सटीक कारण पता नहीं है। शोधकर्ताओं का मानना ​​है कि कुछ बच्चों में ऐसे जीन होते हैं जिनकी वजह से उन्हें यह बीमारी होने की संभावना ज़्यादा होती है। पर्यावरण में मौजूद किसी चीज़ (जैसे कोई वायरस) के संपर्क में आने से इन बच्चों में जुवेनाइल आर्थराइटिस शुरू हो जाता है।


लड़कियों को ज्यादा है दर्द की समस्या

 जो बच्चे सुस्त जीवनशैली जीते हैं, मोटे होते हैं और अस्वस्थ खाना खाते हैं, उनके बड़े होने पर उनके जोड़ों में घिसाव (wear and tear) तेज़ी से शुरू होने की संभावना ज़्यादा होती है । डॉक्टर कहते हैं- "लड़कियों में यह समस्या लड़कों के मुकाबले ज़्यादा आम है। जिन बच्चों के घुटने आपस में टकराते हैं (knock knees), जिनके पैर धनुषाकार होते हैं (bow legs) और जो मोटे होते हैं, उनमें जोड़ों की समस्या होने का खतरा ज़्यादा होता है।  जहां JRA (जुवेनाइल रूमेटॉइड आर्थराइटिस) 8 से 18 साल के बच्चों में ज़्यादा आम है, वहीं 'सेप्टिक आर्थराइटिस' (बैक्टीरिया या फंगस के संक्रमण के कारण जोड़ों में सूजन) 5 साल से कम उम्र के बच्चों में होता है।


दर्द से बचने के उपाय

ऐसे में  बच्चों को हेल्दी खाने की आदतें डालने और जंक फूड से बचने के लिए जागरूक किया जाना चाहिए। प्रोटीन, सिंपल कार्बोहाइड्रेट, ताज़े फल और सब्ज़ियों, खूब सारे तरल पदार्थों और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर डाइट बचपन के मोटापे की घटनाओं को कम कर सकती है। इसके अलावा, रेगुलर एरोबिक एक्सरसाइज़ और स्विमिंग शरीर के वज़न को कंट्रोल में रखने और हेल्दी जोड़ों के लिए ज़रूरी मांसपेशियों का अच्छा संतुलन बनाए रखने में मदद कर सकती है। इसलिए  अगली बार जब बच्चे पैर में दर्द की शिकायत करें तो इसे नजरअंदाज ना करें। 

नोट: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है और पेशेवर चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है। 
 

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