नारी डेस्क: आज के डिजिटल दौर में मोबाइल और टीवी बच्चों की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं, लेकिन यही आदत धीरे-धीरे उनके विकास के लिए खतरा बनती जा रही है। एम्स के विशेषज्ञों ने छोटे बच्चों में बढ़ते स्क्रीन टाइम को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। डॉक्टरों का कहना है कि जन्म से लेकर 18 महीने तक की उम्र बच्चे के दिमाग के तेजी से विकास की होती है और इस दौरान ज्यादा स्क्रीन एक्सपोजर उनके Mental और Physical विकास को प्रभावित कर सकता है। एक्सपर्ट यह भी सलाह देते हैं कि इस उम्र के बच्चों को मोबाइल, टीवी और डिजिटल स्क्रीन से पूरी तरह दूर रखना चाहिए, क्योंकि लगातार स्क्रीन देखने की आदत आगे चलकर ध्यान की कमी, विकास में रुकावट जैसी दिक्कतें पैदा कर सकती है। ऐसे में बच्चों को फोन से कैसे दूर रखा जाए और किन तरीकों से उन्हें स्क्रीन टाइम से बचाया जा सकता है, इन सभी बातों के बारे में हम आपको इस आर्टिकल में विस्तार से बताएंगे। तो चलिए जानते हैं।
जन्म के शुरुआती महीनों में स्क्रीन से दूरी जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि जन्म से लेकर 18 महीने तक के बच्चों को मोबाइल, टीवी या किसी भी तरह की स्क्रीन से पूरी तरह दूर रखना चाहिए। इस उम्र में बच्चों का दिमाग बहुत तेजी से विकसित होता है, और ज्यादा स्क्रीन एक्सपोजर उनके प्राकृतिक विकास में रुकावट डाल सकता है। डॉक्टरों के अनुसार, जिन बच्चों का स्क्रीन टाइम ज्यादा होता है, उनमें भाषा सीखने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसके साथ ही उनका सामाजिक व्यवहार भी कमजोर हो जाता है। कई बार ऐसे लक्षण भी दिखते हैं जो ऑटिज्म जैसे लगते हैं, हालांकि इसे सीधा कारण नहीं माना जाता। 18 महीने से लेकर 6 साल तक के बच्चों के लिए स्क्रीन टाइम को सीमित रखना बेहद जरूरी है। इस उम्र में बच्चों को खेलने, बातचीत करने और रचनात्मक गतिविधियों में शामिल करना उनके बेहतर विकास के लिए जरूरी है।

डिजिटल एडिक्शन नशे जैसा असर
एम्स की एक स्टडी में सामने आया है कि बच्चों में डिजिटल एडिक्शन का असर नशे की लत जैसा हो सकता है। कुछ मामलों में छोटे बच्चे कार्टून किरदारों की नकल करने लगते हैं और धीरे-धीरे असल दुनिया से कटने लगते हैं। हरियाणा के ग्रामीण क्षेत्रों में किए गए अध्ययन में पाया गया कि करीब 50% छोटे बच्चे सुरक्षित सीमा से कहीं ज्यादा स्क्रीन देख रहे हैं। इनमें ज्यादातर बच्चों में एक जैसी समस्याएं देखने को मिलीं, जैसे ध्यान की कमी और व्यवहार में बदलाव। बता दे कि दुनिया में हर 100 में से 1 बच्चा ऑटिज्म पीड़ित विश्व स्वास्थ्य संगठन कहता है कि दुनिया में करीब हर 100 में से एक बच्चा अभी ऑटिज्म से पीड़ित है। यूएस सीडीसी के मुताबिक अब हर 31 में से 1 बच्चा इससे डायग्रोज हो रहा। ज्यादा स्क्रीन-टाइम वाले बच्चों में दोस्तों से दूरी देखी गई।
खान-पान और वजन पर असर
आजकल कई माता-पिता बच्चों को खाना खिलाने के लिए मोबाइल का सहारा लेते हैं। इससे बच्चों की खान-पान की आदतें खराब हो रही हैं। इसके अलावा ज्यादा स्क्रीन टाइम मोटापे और डायबिटीज जैसी समस्याओं का खतरा भी बढ़ा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ज्यादा स्क्रीन टाइम वाले बच्चों में डिप्रेशन और अन्य मानसिक समस्याओं के लक्षण ज्यादा देखे जा रहे हैं। जहां 4 घंटे से ज्यादा स्क्रीन देखने वाले बच्चों में समस्याएं ज्यादा हैं, वहीं कम स्क्रीन टाइम वाले बच्चों में यह खतरा कम पाया गया है।

ऑटिज्म क्या है?
ऑटिज्म एक न्यूरो-डेवलपमेंटल स्थिति है, जो मस्तिष्क के विकास को प्रभावित करती है। इससे बच्चे के व्यवहार, संवाद और सीखने के तरीके में बदलाव आता है। एम्स के आंकड़ों के मुताबिक, ऑटिज्म से जूझ रहे लगभग 80% बच्चों में दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी देखने को मिलती हैं। इनमें मिर्गी, ध्यान की कमी, व्यवहार से जुड़ी परेशानियां और नींद की समस्या शामिल हैं। ये दिक्कतें न सिर्फ बच्चों की सेहत को प्रभावित करती हैं, बल्कि पूरे परिवार की जिंदगी पर असर डालती हैं।
शुरुआती पहचान है बेहद जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि ऑटिज्म के लक्षण 12 से 18 महीने की उम्र में ही पहचाने जा सकते हैं। अगर समय रहते पहचान हो जाए और सही इलाज शुरू किया जाए, तो बच्चे के विकास में काफी सुधार संभव है। बच्चों के जीवन के पहले 1000 दिन, यानी गर्भावस्था से लेकर 3 साल तक का समय, उनके दिमागी विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान सही देखभाल और स्क्रीन से दूरी बेहद जरूरी है।
बच्चों को स्क्रीन से दूर रखने के आसान तरीके
बच्चों को स्क्रीन से दूर रखना मुश्किल जरूर है, लेकिन नामुमकिन नहीं। इसके लिए कुछ आसान आदतें अपनाई जा सकती हैं सोने से कम से कम एक घंटा पहले सभी डिजिटल डिवाइस बंद कर दें। घर में कुछ जगहों को मोबाइल-फ्री ज़ोन बनाएं, जैसे बेडरूम और डाइनिंग एरिया। बच्चों के साथ समय बिताएं, उनसे बात करें और उनके साथ खेलें। उन्हें कहानियां सुनाएं और किताबें पढ़ने की आदत डालें। बच्चों को बाहर खेलने और एक्टिव रहने के लिए प्रेरित करें।

स्क्रीन टाइम कितना होना चाहिए?
विशेषज्ञों के अनुसार, 0 से 18 महीने तक के बच्चों के लिए स्क्रीन टाइम बिल्कुल नहीं होना चाहिए। वहीं 6 साल से बड़े बच्चों के लिए भी इसे 2 घंटे तक सीमित रखना बेहतर माना जाता है।