
नारी डेस्क: घर में अक्सर ऐसा होता है कि कोई दवा बच जाती है और जरूरत पड़ने पर हम उसी को दोबारा इस्तेमाल कर लेते हैं। खासकर बच्चों के सिरप के मामले में, कई पेरेंट्स यही सोचते हैं कि अगर दवा पहले दी थी और ठीक काम किया था तो अब भी दोबारा इस्तेमाल सेफ होगा। लेकिन यह आदत कभी-कभी गंभीर खतरे में बदल सकती है। ऐसे में पुरानी दवाई का इस्तेमाल करना चाहिए या नहीं आइए आपको बताते हैं इस आर्टिकल में ...
एक छोटी सी गलती, बड़ा जोखिम
एक महिला के बच्चे को बुखार हुआ। घर में पिछले महीने का रखा हुआ सिरप मिल गया, और उसने बिना ज्यादा सोचे वही दवा बच्चे को दे दी। वह वही कर रही थी जो आमतौर पर कई माता-पिता करते हैं। लेकिन कुछ ही मिनटों में बच्चे की हालत बिगड़ने लगी। शरीर में झटके आने लगे और वह बेहोश हो गया। जो दवा राहत देने के लिए दी गई थी, वही अचानक खतरा बन गई। सवाल यही उठता है आखिर ऐसा कैसे हुआ? अक्सर हम दवाइयों की एक्सपायरी डेट देखकर निश्चिंत हो जाते हैं, लेकिन सिरप के मामले में असली कहानी बोतल खोलने के बाद शुरू होती है। जैसे ही आप सिरप की बोतल खोलते हैं, हवा, रोशनी और तापमान उसके अंदर के तत्वों को प्रभावित करने लगते हैं। धीरे-धीरे दवा के active ingredients टूटने लगते हैं।
दवा असरहीन ही नहीं, खतरनाक भी बन सकती है
दवा के टूटने से सिर्फ उसका असर कम नहीं होता, बल्कि कई बार ऐसे तत्व बन सकते हैं जो शरीर के लिए नुकसानदेह होते हैं, खासकर छोटे बच्चों के लिए। कुछ मामलों में दवा की मात्रा असंतुलित हो सकती है कभी बहुत ज्यादा, जो शरीर के लिए टॉक्सिक हो सकती है, और कभी इतनी कम कि बीमारी पर कोई असर ही न पड़े। दोनों ही स्थितियां जोखिम भरी हैं।

हर सिरप की अलग होती है “ओपनिंग एक्सपायरी”
यह जानना बहुत जरूरी है कि हर सिरप की एक तय समय सीमा होती है, जो बोतल खोलने के बाद लागू होती है। रेडी-टू-यूज़ सिरप ये पहले से तरल रूप में होते हैं। बोतल खोलने के बाद इन्हें अधिकतम 30 दिनों तक ही इस्तेमाल करना सुरक्षित माना जाता है। पाउडर सिरप (ड्राई सिरप) इनमें पानी मिलाकर तैयार किया जाता है। जैसे ही आप इसमें पानी मिलाते हैं, इसकी समय सीमा शुरू हो जाती है। आमतौर पर ये 7 से 14 दिनों तक ही सुरक्षित रहते हैं।

कुछ आसान आदतें अपनाकर आप इस जोखिम से बच सकते हैं
दवा खोलते या घोलते समय उस पर तारीख जरूर लिखें। तय समय सीमा के बाद दवा को बिना सोचे फेंक दें। अगर दवा का रंग, गंध या बनावट बदल जाए तो तुरंत इस्तेमाल बंद करें। पुरानी बीमारी की दवा नई समस्या में बिना डॉक्टर की सलाह के न दें। लापरवाही नहीं, जानकारी की कमी होती है वजह अक्सर ऐसे मामलों में माता-पिता की मंशा गलत नहीं होती, बल्कि उन्हें सही जानकारी नहीं होती। लेकिन छोटी सी अनजानी गलती भी बड़ी समस्या बन सकती है। इसलिए जरूरी है कि हम दवाइयों को लेकर सतर्क रहें और दूसरों को भी इसके बारे में जागरूक करें, ताकि किसी और को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।