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पेरेंट्स अलर्ट: इंडोनेशिया के डेकेयर में छोटे बच्चों के बंधे हाथ-पैर, देख कर दहल जाएंगे आप

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 29 Apr, 2026 12:09 PM
पेरेंट्स अलर्ट: इंडोनेशिया के डेकेयर में छोटे बच्चों के बंधे हाथ-पैर, देख कर दहल जाएंगे आप

नारी डेस्क :  डेकेयर सेंटर… एक ऐसी जगह जहां माता-पिता अपने नन्हे बच्चों को इस भरोसे के साथ छोड़कर जाते हैं कि उन्हें वहां सुरक्षित माहौल, देखभाल और प्यार मिलेगा। हर पेरेंट यही सोचता है कि उनका बच्चा घर से दूर भी एक अच्छे और सुरक्षित वातावरण में है। लेकिन अगर वही जगह, जिस पर सबसे ज्यादा भरोसा किया जाता है, बच्चों के लिए असुरक्षित साबित हो जाए तो यह सोचकर ही रूह कांप जाती है। कुछ ऐसा ही दिल दहला देने वाला मामला हाल ही में इंडोनेशिया से सामने आया है, जिसने हर किसी को हैरान और परेशान कर दिया है। एक निजी डेकेयर सेंटर में मासूम बच्चों के साथ कथित तौर पर जो व्यवहार किया गया, उसने Parents के भरोसे को गहरी चोट पहुंचाई है। यह मामला तब उजागर हुआ जब “Little Aresha” नाम के डेकेयर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। आखिर उस वीडियो में ऐसा क्या था जिसने पूरे मामले को उजागर कर दिया और क्या है इस घटना की पूरी सच्चाई चालिए आपको बताते इस आर्टिकल में....... 

वायरल वीडियो में सामने आई सच्चाई

वायरल वीडियो में छोटे-छोटे बच्चों की बेहद खराब हालत दिखी। कई बच्चे रो रहे थे, उनके हाथ-पैर बंधे हुए थे और वे फर्श पर पड़े हुए थे। कुछ बच्चों को काफी देर तक उसी हालत में छोड़ दिया गया, जिससे उनकी स्थिति और बिगड़ती नजर आई। वीडियो देखकर साफ समझ आया कि बच्चों की देखभाल में भारी लापरवाही की जा रही थी। मामला सामने आते ही पुलिस ने तुरंत डेकेयर सेंटर पर छापा मारा। अब तक 13 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें मैनेजमेंट और स्टाफ दोनों शामिल हैं। करीब 30 लोगों से पूछताछ की गई है और जांच अभी जारी है।

कितने बच्चे प्रभावित हुए

जांच में पता चला कि इस डेकेयर में 103 बच्चे दर्ज थे। इनमें से करीब 53 बच्चों के साथ गलत व्यवहार या लापरवाही होने की आशंका है। चिंता की बात यह है कि ज्यादातर बच्चे 2 साल से भी छोटे थे, जो अपनी बात ठीक से बता भी नहीं सकते। लापरवाही की हद पार रिपोर्ट्स के अनुसार, बच्चों को सिर्फ चुप कराने के लिए ही नहीं, बल्कि सोते समय भी बांधकर रखा जाता था। इस तरह का व्यवहार बच्चों के लिए बेहद गलत है और इससे उनके शरीर और दिमाग दोनों पर बुरा असर पड़ सकता है।

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इलाज और देखभाल की शुरुआत

घटना के बाद सभी बच्चों की मेडिकल जांच करवाई जा रही है। डॉक्टर उनकी सेहत पर नजर रख रहे हैं, वहीं विशेषज्ञ बच्चों को इस डर और सदमे से बाहर निकालने के लिए काउंसलिंग दे रहे हैं। प्रशासन भी बच्चों के परिवारों से लगातार संपर्क में है। इस घटना के बाद डेकेयर सेंटरों की सुरक्षा को लेकर फिर से सवाल उठने लगे हैं। लोग मांग कर रहे हैं कि ऐसे सेंटरों की नियमित जांच हो और स्टाफ रखने से पहले उनकी अच्छी तरह जांच-पड़ताल की जाए।

विशेषज्ञों का कहना है कि डेकेयर सेंटरों में CCTV कैमरे लगाना जरूरी होना चाहिए और उनकी नियमित निगरानी भी की जानी चाहिए। इसके साथ ही बच्चों की सुरक्षा के लिए सख्त नियम बनाए जाएं और यह भी तय हो कि उन नियमों का सही से पालन कौन करेगा, ताकि आगे ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
 

 

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