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तानों से भरी दुनिया, लेकिन हिम्मत नहीं टूटी! ऐसे बनी भारत की रिहाना- रेनू

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 28 Apr, 2026 05:27 PM
तानों से भरी दुनिया, लेकिन हिम्मत नहीं टूटी! ऐसे बनी भारत की रिहाना- रेनू

नारी डेस्क: हॉलीवुड की पॉप स्टार रिहाना काफी चर्चा में है जिन्होंने भारत में अपना फेंटी ब्यूटी ब्रांड लॉन्च किया। मगर आज हम बात हॉलीवुड रिहाना नहीं बल्कि भारत की रिहाना की करेंगे जिनकी जिंदगी हॉलीवुड रिहाना से ज्यादा स्ट्रगलिंग रही। जी हां, हम बात रेने कुजूर की कर रहे हैं जिनका असली नाम रेनू था। छत्तीसगढ़ के बगीचा की रहने वाली रेने देश की पहली आदिवासी मॉडल है। अगर आप इनकी तस्वीरें देखे तो रिहाना ही समझ बैठेंगे, हुबहू वहीं नैन-नक्श, होंठ और रंग... जिस वजह से इन्हें इंडियन रिहाना कहा जाने लगा। रेने के लिए इंडियन रिहाना बनकर फेमस होना इतना भी आसान नहीं था। पेट भरने के लिए मंदिरों के बाहर लाइन में लगी, तंग ढ़कने के लिए डोनेट किए कपड़े पहने, पैसे कमाने के लिए वेट्रस बनी। आइए आपको बताते है एक गरीब परिवार की लड़की रेनू  कैसे बनी भारत की रिहाना...! 

छोटे शहर से बड़े सपनों तक का सफर

रेने कुजूर, जिनका असली नाम रेनू है, एक साधारण परिवार में जन्मी थीं। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं थी कि आराम से जीवन चल सके महुआ और तेंदूपत्ता इकट्ठा करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था। बाद में परिवार दिल्ली आ गया, जहां संघर्ष और भी बढ़ गया, लेकिन रेने के सपनों की उड़ान यहीं से शुरू हुई।

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‘काली परी’ कहकर उड़ाया गया मजाक

बचपन से ही रेने को मॉडलिंग का शौक था। लेकिन जब उन्होंने स्कूल के एक फैंसी ड्रेस कॉम्पिटिशन में परी बनकर स्टेज पर कदम रखा, तो तालियों की जगह उन्हें तानों का सामना करना पड़ा। लोगों ने उन्हें ‘काली परी’ कहकर चिढ़ाया। उस दिन की चोट गहरी थी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने खुद से कहा“हर परी गोरी नहीं होती।”

घर की जिम्मेदारियां और सपनों का दबाव

रेने ने जैसे-तैसे अपनी पढ़ाई पूरी की, लेकिन मॉडलिंग के लिए पैसे जुटाना आसान नहीं था। परिवार से सपोर्ट मिलने की उम्मीद कम थी। ऐसे में उन्होंने होटल में वेट्रेस की नौकरी की, ताकि अपने सपनों को थोड़ा सहारा दे सकें। यहां तक कि मंदिरों के बाहर खाना लेने की लाइन में लगना और दान के कपड़े पहनना भी उनकी जिंदगी का हिस्सा रहा।

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तानों से भरी दुनिया, लेकिन हिम्मत नहीं टूटी

रेने को सिर्फ आर्थिक संघर्ष ही नहीं, बल्कि समाज की सोच से भी लड़ना पड़ा। उनके रंग और लुक्स को लेकर अक्सर ताने दिए जाते। यहां तक कि कुछ लोगों ने मॉडलिंग इंडस्ट्री को लेकर गलत बातें भी कहीं। कई बार फोटोग्राफर्स और मेकअप आर्टिस्ट उनके स्किन टोन को फोटोशॉप से हल्का करने की कोशिश करते थे। एक घटना में तो एक मेकअप आर्टिस्ट ने सबके सामने यह तक कह दिया कि “सांवली लड़की को खूबसूरत दिखाना ही असली चुनौती है।” ऐसे अनुभव किसी को भी तोड़ सकते थे, लेकिन रेने ने इन्हें अपनी ताकत बना लिया।

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जब मिला ‘रिहाना’ जैसा लुक का टैग

रेने की जिंदगी में एक बड़ा मोड़ तब आया, जब एक दोस्त ने कहा कि वह Rihanna जैसी दिखती हैं। शुरुआत में उन्हें यकीन नहीं हुआ, लेकिन जब उन्होंने खुद तुलना की, तो उन्हें भी समानता नजर आई। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी और रिहाना की तस्वीर का कोलाज शेयर किया और यही पोस्ट वायरल हो गई। धीरे-धीरे लोग उन्हें ‘इंडियन रिहाना’ कहने लगे और मॉडलिंग में उन्हें पहचान मिलने लगी।

संघर्ष से मिली पहचान

जिस रंग को लोग उनकी कमजोरी मानते थे, वही उनकी सबसे बड़ी पहचान बन गया। रेने को कई बड़े ब्रांड्स के साथ काम करने का मौका मिला। आज वह ज्वेलरी और फैशन ब्रांड्स के लिए शूट कर चुकी हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी जगह बना रही हैं। रेने का मानना है कि समाज में आदिवासी समुदाय को लेकर कई गलत धारणाएं बनी हुई हैं। लोग सोचते हैं कि वे सिर्फ सीमित दायरे में ही रह सकते हैं। लेकिन रेने ने इन सभी धारणाओं को तोड़ दिया। वह कहती हैं “मैं उन सभी सोचों को बदलना चाहती थी, जो आदिवासियों के बारे में बना ली गई हैं।”

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आज की रेने: एक मिसाल

जिस लड़की को कभी ‘काली परी’ कहकर चिढ़ाया जाता था, आज वही लंदन और इंटरनेशनल फैशन सर्किट में अपनी पहचान बना चुकी है। रेने कुजूर आज उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा हैं, जो अपने रंग, हालात या परिस्थितियों के कारण खुद को पीछे समझते हैं। रेने की कहानी यही बताती है कि अगर हिम्मत और जुनून हो तो कोई भी बाधा रास्ता नहीं रोक सकती। समाज की सोच बदलने के लिए पहले खुद पर भरोसा करना जरूरी है और रेने ने यही करके दिखाया।
 

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