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धरती के करीब बढ़ रहा  प्लेन जितना बड़ा एस्टेरॉयड, क्या दुनिया को है इससे खतरा?

  • Edited By vasudha,
  • Updated: 14 May, 2026 12:13 PM
धरती के करीब बढ़ रहा  प्लेन जितना बड़ा एस्टेरॉयड, क्या दुनिया को है इससे खतरा?

नारी डेस्क: NASA और पृथ्वी के नज़दीक मौजूद चीज़ों पर नज़र रखने वाले खगोलविदों द्वारा ट्रैक किए गए ऑर्बिटल डेटा के अनुसार एक ही दिन दो एस्टेरॉयड एक के बाद एक पृथ्वी के करीब से गुज़रेंगे, जिनमें से एक का आकार लगभग एक हवाई जहाज़ जितना है। यह इस महीने पृथ्वी के करीब से गुज़रने वाली छोटी खगोलीय चीज़ों में से एक है, जिस पर सबसे ज़्यादा नज़र रखी जा रही है। हालांकि इस चीज से पृथ्वी पर टकराने का कोई खतरा नहीं है, लेकिन इसकी गति इसे खगोलीय नज़रिए से पृथ्वी के बहुत करीब ले आएगी।


आसमान में दिखेगा दुर्लभ नजारा

 इससे खगोलविदों और शौकिया तौर पर आसमान देखने वालों को पृथ्वी के करीब से गुज़रते हुए इस नए खोजे गए एस्टेरॉयड को देखने का एक दुर्लभ मौका मिलेगा।  एस्टेरॉयड ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, एस्टेरॉयड 2026 JV1 और 2026 JT, 14 मई 2026 को पृथ्वी के काफी करीब से गुज़रने वाले हैं। इन फ्लाईबाई (करीब से गुज़रने) की बात सुनने में खतरनाक लग सकती है, लेकिन वैज्ञानिकों ने पुष्टि की है कि ये दोनों ऑब्जेक्ट बिना किसी टक्कर के खतरे के, सुरक्षित रूप से ग्रह के पास से गुज़र जाएंगे।


एस्टेरॉयड का इतना होगा आकार

एस्टेरॉयड 2026 JH2 को अपोलो-टाइप नियर-अर्थ एस्टेरॉयड के तौर पर वर्गीकृत किया गया है, जिसका मतलब है कि इसकी कक्षा सूर्य के चारों ओर पृथ्वी के कक्षीय मार्ग को काटती है। इस खगोलीय पिंड की पहचान एरिज़ोना में माउंट लेमन सर्वे सहित उन वेधशालाओं द्वारा की गई, जो अंतरिक्ष में संभावित रूप से खतरनाक पिंडों का पता लगाने के लिए समर्पित वैश्विक नेटवर्क का हिस्सा हैं। शुरुआती प्रेक्षणों से पता चलता है कि इस एस्टेरॉयड का आकार लगभग 16 से 35 मीटर के बीच है। आकार के निचले अनुमानों के अनुसार, यह एस्टेरॉयड एक बड़ी बस जितना होगा, जबकि बड़े अनुमानों के मुताबिक यह एक बहुमंजिला इमारत जितना ऊंचा हो सकता है।


यह एस्टेरॉयड पृथ्वी के कितने करीब आएगा?

NASA की जेट प्रोपल्शन लैबोरेटरी के डेटा के अनुसार, एस्टेरॉयड 2026 JH2 के पृथ्वी से लगभग 0.0006 एस्ट्रोनॉमिकल यूनिट (AU) की दूरी से गुज़रने की उम्मीद है। इसका मतलब है कि यह पृथ्वी से लगभग 90,000 किलोमीटर दूर होगा, या पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की औसत दूरी का लगभग एक-चौथाई।  खगोलविद इस बात पर ज़ोर देते हैं कि यह एस्टेरॉयड पृथ्वी से सुरक्षित दूरी पर ही रहेगा। हालांकि, ब्रह्मांडीय नज़रिए से देखें तो यह गुज़रना (flyby) बहुत करीब माना जाता है, खासकर तब जब किसी वस्तु की खोज उसके पृथ्वी के करीब आने से कुछ ही समय पहले हुई हो। यह भी उम्मीद है कि सूर्य की परिक्रमा करते हुए अपने रास्ते पर आगे बढ़ने से पहले, यह एस्टेरॉयड चंद्रमा के भी काफी करीब से गुज़रेगा।
 

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