नारी डेस्क: आजकल बदलती लाइफस्टाइल और गलत खानपान की वजह से पाइल्स यानी बवासीर की समस्या तेजी से बढ़ रही है। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें गुदा और मलाशय की नसों में सूजन आ जाती है, जिससे व्यक्ति को शौच के दौरान तेज दर्द, जलन और कई बार खून आने जैसी परेशानी का सामना करना पड़ता है।अक्सर लोग इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन समय पर ध्यान न देने पर यह समस्या बढ़ सकती है और जीवन की गुणवत्ता पर असर डाल सकती है।
पाइल्स क्या है और क्यों होती है यह समस्या?
पाइल्स को मेडिकल भाषा में हेमोरॉयड्स कहा जाता है। इसमें गुदा क्षेत्र की नसें सूज जाती हैं और उन पर दबाव पड़ने पर दर्द और जलन महसूस होती है। यह समस्या मुख्य रूप से कब्ज, गलत खानपान और लंबे समय तक बैठे रहने जैसी आदतों के कारण होती है। खासकर वे लोग जो डेस्क जॉब करते हैं या फिजिकल एक्टिविटी कम करते हैं, उनमें इसका खतरा ज्यादा देखा जाता है।

बाहरी और आंतरिक पाइल्स के लक्षण
पाइल्स दो प्रकार की होती है बाहरी और आंतरिक, और दोनों के लक्षण अलग-अलग होते हैं। गुदा के आसपास खुजली, जलन, सूजन या गांठ बनना इसके प्रमुख संकेत हैं। बैठने या शौच के समय दर्द बढ़ सकता है और कभी-कभी गांठ सख्त भी हो जाती है।
आंतरिक पाइल्स के लक्षण
इसमें शौच के दौरान खून आना सबसे आम लक्षण है। इसके अलावा टॉयलेट पेपर पर खून या बलगम दिखना, पेट पूरी तरह साफ न होने का एहसास और बार-बार शौच जाने की इच्छा महसूस हो सकती है।
किन लोगों को ज्यादा होता है पाइल्स का खतरा?
पाइल्स किसी भी उम्र में हो सकती है, लेकिन कुछ लोगों में इसका जोखिम ज्यादा होता है। 45 से 65 साल की उम्र के लोग, गर्भवती महिलाएं, लंबे समय तक बैठकर काम करने वाले लोग, कब्ज या पाचन की समस्या से परेशान लोग, फाइबर कम लेने वाले और जंक फूड ज्यादा खाने वाले लोग, मोटापे से ग्रस्त व्यक्ति भारी वजन उठाने वाले लोग, जिनके परिवार में पहले से पाइल्स का इतिहास हो इन सभी स्थितियों में गुदा क्षेत्र पर दबाव बढ़ता है, जिससे पाइल्स की समस्या विकसित हो सकती है।

रोज की ये 3 आदतें बढ़ा सकती हैं पाइल्स का खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ आम गलत आदतें इस बीमारी का बड़ा कारण बनती हैं। लंबे समय तक टॉयलेट में बैठना या मोबाइल का इस्तेमाल करना, मल त्याग के दौरान जोर लगाना, लंबे समय तक बिना ब्रेक बैठे रहना इन आदतों से गुदा की नसों पर लगातार दबाव पड़ता है, जिससे सूजन और दर्द की समस्या शुरू हो सकती है।
क्या बवासीर से कैंसर हो सकता है?
यह एक आम सवाल है, लेकिन इसका जवाब साफ है पाइल्स से कैंसर नहीं होता। हालांकि, दोनों स्थितियों के लक्षण एक जैसे हो सकते हैं, जैसे मल त्याग के दौरान खून आना। इसलिए अगर यह समस्या बार-बार हो या लंबे समय तक बनी रहे, तो डॉक्टर से जांच जरूर करानी चाहिए ताकि सही कारण का पता चल सके।

पाइल्स से बचने के आसान उपाय
पाइल्स से बचाव के लिए जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव बहुत मददगार हो सकते हैं। फाइबर युक्त भोजन जैसे फल, सब्जियां, दालें और साबुत अनाज का सेवन बढ़ाएं। दिनभर में 8–10 गिलास पानी जरूर पिएं। रोजाना 20–30 मिनट टहलने या हल्की एक्सरसाइज की आदत डालें। लंबे समय तक लगातार बैठने से बचें और बीच-बीच में ब्रेक लें। टॉयलेट में ज्यादा देर न बैठें और जोर लगाकर मल त्याग न करें। वजन को नियंत्रित रखें।
आयुर्वेद में पाइल्स का उपचार
आयुर्वेद में पाइल्स को “अर्श” कहा गया है और इसे पाचन सुधारकर नियंत्रित किया जाता है। छाछ में जीरा और सेंधा नमक मिलाकर पीना।लौकी, कद्दू और दालों का सेवन, हल्का गर्म पानी पीना, सिट्ज बाथ (गर्म पानी में बैठना) ये सभी उपाय पाचन को सुधारने और सूजन को कम करने में मदद करते हैं।
कब डॉक्टर से मिलना जरूरी है?
अगर शौच के दौरान बार-बार खून आए, तेज दर्द हो, गांठ बाहर आ जाए या कब्ज लंबे समय तक बना रहे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे मामलों में समय पर मेडिकल सलाह लेना बेहद जरूरी है।