नारी डेस्क: आजकल दांतों और मसूड़ों की सेहत को लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह छोटी-सी लगने वाली समस्या आपकी पूरी सेहत और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया पर असर डाल सकती है? हाल ही में सामने आई विशेषज्ञों की राय और रिसर्च यह संकेत देती है कि खराब मसूड़ों की सेहत सिर्फ मुंह तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह शरीर में सूजन बढ़ाकर दिल, दिमाग और इम्यून सिस्टम को भी प्रभावित कर सकती है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या वाकई मसूड़ों की बीमारी हमारी उम्र को भी तेजी से बढ़ा सकती है? आइए जानते हैं एक्सपर्ट्स की राय और इसके पीछे की सच्चाई।
मसूड़ों की बीमारी और शरीर में सूजन का गहरा रिश्ता
दंत विशेषज्ञों का कहना है कि मुंह शरीर से अलग नहीं है, बल्कि यह पूरे शरीर के लिए एक एंट्री पॉइंट की तरह काम करता है। मसूड़ों में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया अगर बढ़ जाते हैं, तो शरीर की इम्यून सिस्टम प्रतिक्रिया देने लगती है। Dr David Roze के अनुसार, मसूड़ों की समस्या सिर्फ दांतों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह दिल, इम्यून सिस्टम और शरीर के अन्य हिस्सों को भी प्रभावित कर सकती है। लंबे समय तक चलने वाली सूजन (chronic inflammation) उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को तेज कर सकती है।

शरीर के अंगों पर पड़ता है असर
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मसूड़ों की बीमारी का इलाज समय पर न किया जाए, तो यह शरीर में लगातार सूजन बनाए रखती है। यह स्थिति दिल की बीमारियों, कमजोर इम्यूनिटी और याददाश्त से जुड़ी समस्याओं से जुड़ी हो सकती है। रिसर्च यह भी बताती है कि मसूड़ों की बीमारी से रक्त वाहिकाओं (blood vessels) की अंदरूनी परत को नुकसान पहुंच सकता है, जो उम्र बढ़ने के शुरुआती संकेतों में से एक माना जाता है।
इम्यून सिस्टम पर भी बढ़ता है दबाव
लगातार इंफेक्शन की वजह से शरीर का इम्यून सिस्टम हमेशा एक्टिव रहता है, जिससे समय के साथ उसकी क्षमता कम हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति शरीर की मरम्मत करने की क्षमता को भी प्रभावित कर सकती है।
क्या फ्लॉसिंग से सेहत और उम्र पर असर पड़ता है?
डॉक्टरों का कहना है कि फ्लॉसिंग एक सरल लेकिन बेहद जरूरी आदत है। यह मसूड़ों में फंसी गंदगी और बैक्टीरिया को हटाकर सूजन को कम करने में मदद करती है। Dr Rajaa Antar के अनुसार, नियमित फ्लॉसिंग से मसूड़ों की बीमारी का खतरा कम होता है और शरीर में सूजन भी नियंत्रित रहती है। हालांकि यह सीधे तौर पर उम्र बढ़ाने का दावा नहीं करती, लेकिन यह स्वस्थ उम्र बढ़ने (healthy aging) में मदद जरूर करती है।

किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए
डॉक्टरों के मुताबिक कुछ संकेत ऐसे हैं जिन्हें हल्के में नहीं लेना चाहिए
मसूड़ों से खून आना
लगातार बदबूदार सांस
दांतों में संवेदनशीलता
दांतों का हिलना
चबाने में परेशानी
अगर ये लक्षण दिखें तो तुरंत डेंटिस्ट से जांच करानी चाहिए।
नियमित डेंटल चेकअप क्यों जरूरी है
विशेषज्ञों का कहना है कि हर 6 महीने में एक बार डेंटल चेकअप कराना चाहिए। जिन लोगों को पहले से मसूड़ों की बीमारी, डायबिटीज या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हैं, उन्हें और भी नियमित जांच की जरूरत हो सकती है। डॉक्टरों का मानना है कि समय पर जांच और इलाज से गंभीर समस्याओं को रोका जा सकता है और लंबे समय तक दांत और मसूड़े स्वस्थ रखे जा सकते हैं।

बच्चों की शुरुआती डेंटल केयर भी जरूरी
दंत विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि बच्चों की पहली डेंटल विजिट पहले दांत निकलते ही करानी चाहिए। इससे शुरुआती उम्र में ही दांतों और जबड़े से जुड़ी समस्याओं को समझा और ठीक किया जा सकता है। विशेषज्ञों की राय साफ है कि मसूड़ों की सेहत सिर्फ दांतों की नहीं, बल्कि पूरे शरीर और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया से जुड़ी हुई है। सही देखभाल, नियमित सफाई और समय पर जांच से न सिर्फ दांत स्वस्थ रहते हैं, बल्कि शरीर की समग्र सेहत भी बेहतर बनी रहती है।