नारी डेस्क: आज के दौर में जिस तेजी से वायु प्रदूषण बढ़ रहा है और मौसम में लगातार बदलाव हो रहे हैं, उसका सीधा असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। खासकर सांस से जुड़ी बीमारियां अब पहले से ज्यादा आम हो चुकी हैं। इन्हीं में से एक है Asthma, जो अब शहरों ही नहीं बल्कि ग्रामीण इलाकों में भी तेजी से फैल रही है। यह स्थिति इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि यह बीमारी व्यक्ति की रोजमर्रा की जिंदगी को काफी हद तक प्रभावित कर सकती है। ऐसे में आज वर्ल्ड अस्थमा डे पर हम आज आपको बताएंगे कि जब अस्थमा की शरुवात होती हैं तो शरीर में क्या संकेत और बदलव नजर आते हैं।
क्यों बढ़ रहे हैं अस्थमा के मामले?
विशेषज्ञों के अनुसार, अस्थमा एक क्रॉनिक बीमारी है जिसमें फेफड़ों की श्वासनलियां सूज जाती हैं और संकुचित हो जाती हैं। इसके कारण सांस लेना मुश्किल हो जाता है और कई बार अचानक अटैक भी आ सकता है। पिछले कुछ वर्षों में इसके मामलों में बढ़ोतरी का मुख्य कारण पर्यावरण में हो रहे बदलाव और एलर्जी पैदा करने वाले तत्वों की बढ़ती मात्रा को माना जा रहा है।

एलर्जी निभाती है सबसे बड़ी भूमिका
अस्थमा के पीछे सबसे बड़ा कारण एलर्जी को माना जाता है। धूल, धुआं, परागकण, पालतू जानवरों के बाल, फफूंदी और केमिकल्स जैसे तत्व शरीर में एलर्जिक रिएक्शन पैदा करते हैं। इसके अलावा, ट्रैफिक और औद्योगिक क्षेत्रों में बढ़ता प्रदूषण इस समस्या को और गंभीर बना देता है। मौसम में अचानक बदलाव, ठंडी हवा, वायरल इंफेक्शन और कई मामलों में आनुवंशिक कारण भी इसके लिए जिम्मेदार होते हैं।
इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें
अस्थमा के लक्षण धीरे-धीरे नजर आते हैं, लेकिन इन्हें पहचानना बेहद जरूरी है। लगातार खांसी आना, सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज आना (व्हीजिंग), सीने में जकड़न और हल्की मेहनत में भी सांस फूलना इसके सामान्य संकेत हैं। कई बार ये लक्षण रात या सुबह के समय ज्यादा बढ़ जाते हैं। अगर ये परेशानी बार-बार हो रही है, तो इसे हल्के में लेना ठीक नहीं है।

पूरी तरह खत्म नहीं, लेकिन कंट्रोल संभव
डॉक्टरों का मानना है कि अस्थमा को पूरी तरह खत्म करना संभव नहीं है, लेकिन सही देखभाल और इलाज से इसे नियंत्रित जरूर किया जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि एलर्जी पैदा करने वाले कारणों से दूरी बनाई जाए। घर की साफ-सफाई का ध्यान रखें, धूल और धुएं से बचें, मास्क का इस्तेमाल करें और धूम्रपान से दूर रहें। साथ ही, डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाइयों और इनहेलर का नियमित उपयोग करना चाहिए।
जागरूकता ही है सबसे बड़ा बचाव
अंत में यही कहा जा सकता है कि अस्थमा जैसी बीमारी से बचाव के लिए जागरूक रहना बेहद जरूरी है। अगर समय रहते इसके लक्षणों को पहचान लिया जाए और सही कदम उठाए जाएं, तो इसके असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है। छोटी-छोटी सावधानियां अपनाकर भी आप अपनी सांसों को सुरक्षित रख सकते हैं।