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मेनोपॉज के बाद क्यों कमजोर होने लगती हैं महिलाओं की हड्डियां

  • Edited By Priya Yadav,
  • Updated: 27 Jul, 2026 04:27 PM
मेनोपॉज के बाद क्यों कमजोर होने लगती हैं महिलाओं की हड्डियां

नारी डेस्क: मेनोपॉज महिलाओं के जीवन का एक स्वाभाविक चरण है, जो आमतौर पर 45 से 55 वर्ष की उम्र के बीच आता है। इस दौरान शरीर में कई हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिनका असर सिर्फ प्रजनन क्षमता पर ही नहीं बल्कि हड्डियों की सेहत पर भी पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार, मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर तेजी से घटने लगता है। यही हार्मोन हड्डियों को मजबूत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसकी कमी के कारण हड्डियां धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।

एस्ट्रोजन की कमी से क्यों बढ़ता है बोन लॉस

हमारी हड्डियां लगातार टूटने और दोबारा बनने की प्रक्रिया से गुजरती रहती हैं। कम उम्र में नई हड्डियां बनने की गति अधिक होती है, लेकिन बढ़ती उम्र और मेनोपॉज के बाद यह संतुलन बिगड़ने लगता है। एस्ट्रोजन हड्डियों को टूटने की प्रक्रिया को नियंत्रित करने में मदद करता है। जब इसका स्तर कम हो जाता है, तो हड्डियों का क्षरण तेजी से होने लगता है और बोन मिनरल डेंसिटी घटने लगती है। विशेषज्ञों का मानना है कि मेनोपॉज शुरू होने के बाद शुरुआती 5 से 10 वर्षों में महिलाओं की बोन डेंसिटी अपेक्षाकृत तेजी से कम हो सकती है। यही वजह है कि इस दौर में हड्डियों की देखभाल पर विशेष ध्यान देना जरूरी होता है।

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कमजोर होती हड्डियों के शुरुआती संकेतों को न करें नजरअंदाज

मेनोपॉज के बाद कुछ ऐसे संकेत दिखाई दे सकते हैं, जो हड्डियों के कमजोर होने की ओर इशारा करते हैं। अगर समय रहते इन पर ध्यान दिया जाए, तो आगे होने वाली जटिलताओं से बचा जा सकता है।

लगातार कमर या पीठ में दर्द

अगर बिना किसी स्पष्ट कारण के लंबे समय तक कमर या पीठ में दर्द बना रहता है, तो यह रीढ़ की हड्डियों के कमजोर होने का संकेत हो सकता है। कई मामलों में यह ऑस्टियोपोरोसिस से भी जुड़ा हो सकता है।

लंबाई कम होने लगना

उम्र बढ़ने के साथ यदि पहले की तुलना में लंबाई कम महसूस होने लगे या शरीर झुकने लगे, तो इसका कारण रीढ़ की हड्डियों की कमजोरी हो सकती है। बोन डेंसिटी कम होने पर रीढ़ की संरचना प्रभावित होने लगती है।

हल्की चोट में भी फ्रैक्चर होना

अगर मामूली गिरने या हल्की चोट लगने पर भी कलाई, कूल्हे या रीढ़ की हड्डी टूट जाए, तो यह कमजोर हड्डियों का गंभीर संकेत हो सकता है। ऐसे मामलों में तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

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किन कारणों से बढ़ जाता है हड्डियां कमजोर होने का खतरा

मेनोपॉज के अलावा कुछ अन्य कारण भी हड्डियों को प्रभावित कर सकते हैं। बढ़ती उम्र के साथ नई हड्डियां बनने की प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है। कैल्शियम और विटामिन डी की कमी, शारीरिक गतिविधि का कम होना, धूम्रपान और शराब का सेवन, साथ ही परिवार में ऑस्टियोपोरोसिस का इतिहास भी इस जोखिम को बढ़ा सकता है।

मेनोपॉज के बाद हड्डियों को मजबूत रखने के 5 जरूरी उपाय

कैल्शियम से भरपूर आहार लें

दूध, दही, पनीर, रागी, तिल और हरी पत्तेदार सब्जियां कैल्शियम के अच्छे स्रोत हैं। इन्हें नियमित आहार में शामिल करने से हड्डियों को जरूरी पोषण मिल सकता है।

विटामिन डी की कमी न होने दें

कैल्शियम तभी सही तरीके से शरीर में अवशोषित होता है जब विटामिन डी पर्याप्त मात्रा में हो। सुबह की हल्की धूप लेना और विटामिन डी युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन फायदेमंद माना जाता है। जरूरत चलना, सीढ़ियां चढ़ना, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और योग जैसी गतिविधियां हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद कर सकती हैं। नियमित व्यायाम मांसपेशियों को भी मजबूत करता है और गिरने का जोखिम पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट भी लिए जा सकते हैं।

रोजाना एक्सरसाइज और योग करें

तेज चाल से चलना, सीढ़ियां चढ़ना, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और योग जैसी गतिविधियां हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद कर सकती हैं। नियमित व्यायाम मांसपेशियों को भी मजबूत करता है और गिरने का जोखिम कम कर सकता है।

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 प्रोटीन को भी दें महत्व

हड्डियों के साथ-साथ मांसपेशियों के स्वास्थ्य के लिए भी प्रोटीन जरूरी है। दालें, अंडे, दूध, सोया और अन्य प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ संतुलित मात्रा में लेने चाहिए।

समय-समय पर बोन हेल्थ की जांच कराएं

अगर उम्र 65 वर्ष से अधिक है या ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा अधिक है, तो डॉक्टर की सलाह पर बोन मिनरल डेंसिटी (BMD) टेस्ट करवाना उपयोगी हो सकता है। इस जांच से हड्डियों की मजबूती का आकलन किया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर समय रहते उपचार शुरू किया जा सकता है।

छोटी-छोटी सावधानियां बचा सकती हैं बड़ी परेशानी से

मेनोपॉज के बाद हड्डियों का कमजोर होना एक आम समस्या है, लेकिन इसे नजरअंदाज करना सही नहीं है। यदि लगातार कमर दर्द, झुककर चलना या बार-बार फ्रैक्चर जैसी समस्याएं महसूस हों, तो विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त कैल्शियम और विटामिन डी के साथ समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराकर लंबे समय तक हड्डियों को मजबूत और स्वस्थ रखा जा सकता है।

   

 


 

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