नारी डेस्क: विटामिन B12 हमारे शरीर के लिए बेहद जरूरी पोषक तत्वों में से एक है। यह न केवल लाल रक्त कोशिकाओं (Red Blood Cells) के निर्माण में मदद करता है, बल्कि दिमाग और तंत्रिका तंत्र (Nervous System) को स्वस्थ बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हालांकि, इसकी कमी के शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य थकान या बढ़ती उम्र का असर समझकर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं। लेकिन अगर समय रहते इस कमी की पहचान और उपचार न किया जाए, तो यह शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है।
याददाश्त और दिमाग पर पड़ सकता है असर
विटामिन B12 की कमी का सबसे ज्यादा असर मस्तिष्क की कार्यक्षमता पर देखा जाता है। इसकी कमी होने पर व्यक्ति को छोटी-छोटी बातें भूलने की समस्या होने लगती है। ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई होती है और सोचने-समझने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है। कई लोगों को ऐसा महसूस होता है कि उनका दिमाग पहले की तुलना में धीमी गति से काम कर रहा है। इस स्थिति को आम भाषा में 'ब्रविटामिन B12 की कमी केवल याददाश्त तक सीमित नहीं रहती, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकती है। इसके कारण चिड़चिड़ापन, बेचेन फॉग' कहा जाता है, जिसमें व्यक्ति को स्पष्ट रूप से सोचने और निर्णय लेने में परेशानी होती है।

मानसिक स्वास्थ्य पर भी दिख सकते हैं संकेत
विटामिन B12 की कमी केवल याददाश्त तक सीमित नहीं रहती, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकती है। इसके कारण चिड़चिड़ापन, बेचैनी, चिंता और अवसाद (डिप्रेशन) जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। कुछ मामलों में व्यक्ति को भ्रम (कन्फ्यूजन) महसूस हो सकता है या अपनी बात स्पष्ट रूप से व्यक्त करने में भी कठिनाई हो सकती है। यदि लंबे समय तक इस कमी का इलाज न कराया जाए, तो विशेष रूप से बुजुर्गों में डिमेंशिया जैसे लक्षण विकसित होने का खतरा भी बढ़ सकता है।
शरीर में दिखाई देने वाले अन्य लक्षण
याददाश्त कमजोर होने के अलावा विटामिन B12 की कमी कई अन्य संकेत भी देती है। लगातार थकान महसूस होना, कमजोरी, हाथ-पैरों में झुनझुनी या सुन्नपन, संतुलन बनाए रखने में परेशानी और बार-बार चक्कर आना इसके सामान्य लक्षण हैं। कुछ लोगों की त्वचा पीली पड़ सकती है और सांस फूलने की समस्या भी हो सकती है। यदि ये लक्षण लगातार बने रहें, तो डॉक्टर से सलाह लेकर जांच करानी चाहिए।
किन लोगों में ज्यादा रहता है विटामिन B12 की कमी का खतरा?
कुछ लोगों में विटामिन B12 की कमी होने की संभावना दूसरों की तुलना में अधिक होती है। बढ़ती उम्र के साथ शरीर की इस विटामिन को अवशोषित करने की क्षमता कम हो जाती है, इसलिए बुजुर्गों में इसका खतरा ज्यादा रहता है। इसके अलावा, जो लोग पूरी तरह शाकाहारी या वीगन डाइट का पालन करते हैं, उनमें भी इसकी कमी देखी जा सकती है क्योंकि विटामिन B12 प्राकृतिक रूप से मुख्य रूप से पशु-आधारित खाद्य पदार्थों में पाया जाता है। आंतों से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित लोग, पेट या आंत की सर्जरी करा चुके मरीज औरयदि डॉक्टर को विटामिन B12 की कमी का संदेह होता है, तो इसकी पुष्टि के लिए ब्लड टेस्ट कराया जाता है। कुछ मामलों में कमी की वास्तविक स्थिति जानने के लिए अतिरिक्त जांच की भी आवश्यकता पड़ सकती है। जांच के बाद ही डॉक्टर मरीज की लंबे समय तक कुछ विशेष दवाइयों का सेवन करने वाले लोगों में भी इसका जोखिम बढ़ सकता है।

विटामिन B12 की कमी की जांच कैसे होती है
यदि डॉक्टर को विटामिन B12 की कमी का संदेह होता है, तो इसकी पुष्टि के लिए ब्लड टेस्ट कराया जाता है। कुछ मामलों में कमी की वास्तविक स्थिति जानने के लिए अतिरिक्त जांच की भी आवश्यकता पड़ सकती है। जांच के बाद ही डॉक्टर मरीज की स्थिति के अनुसार उपचार की सलाह देते हैं।
इलाज में क्या किया जाता है
विटामिन B12 की कमी का उपचार इस बात पर निर्भर करता है कि कमी कितनी गंभीर है। यदि कमी शुरुआती स्तर पर हो, तो डॉक्टर विटामिन B12 सप्लीमेंट लेने और खानपान में बदलाव की सलाह दे सकते हैं। वहीं, गंभीर मामलों में विटामिन B12 के इंजेक्शन लगाए जाते हैं ताकि शरीर में इसकी मात्रा तेजी से सामान्य हो सके। किसी भी प्रकार की दवा या सप्लीमेंट बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं लेना चाहिए।
इन खाद्य पदार्थों से पूरी हो सकती है विटामिन B12 की जरूरत
विटामिन B12 की पर्याप्त मात्रा पाने के लिए अपने आहार में मछली, चिकन, अंडा, दूध, दही, पनीर और चीज जैसे खाद्य पदार्थ शामिल किए जा सकते हैं। इसके अलावा, फोर्टिफाइड अनाज (Fortified Cereals) और विटामिन B12 से समृद्ध खाद्य पदार्थ भी अच्छे विकल्प हो सकते हैं। जो लोग शाकाहारी हैं, उन्हें डॉक्टर की सलाह के अनुसार फोर्टिफाइड फूड्स या सप्लीमेंट्स लेने की आवश्यकता पड़ सकती है।
समय रहते पहचान है सबसे जरूरी
विटामिन B12 की कमी के लक्षण धीरे-धीरे सामने आते हैं, इसलिए इन्हें सामान्य कमजोरी या उम्र का असर समझकर अनदेखा करना सही नहीं है। यदि लगातार थकान, याददाश्त कमजोर होना, हाथ-पैरों में सुन्नपन या मानसिक बदलाव जैसे लक्षण दिखाई दें, तो जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क कर जांच करानी चाहिए। समय पर इलाज और संतुलित आहार अपनाकर इस कमी से होने वाली गंभीर जटिलताओं से काफी हद तक बचा जा सकता है।